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पहली बारिश 

कुछ जगह यह क्षण गुजर चुका है और कुछ जगह इसका इंतजार हो रहा है। पहली बारिश, यानी उम्मीदों के साकार होने की बारिश, स्वप्नों के धरातल पर उतरने की बारिश और खुशहाली में हिलोरें लेने की बारिश। गरमी से तप्त धरा पर जब पहली बारिश की बूंदें गिरती हैं, तब जर्रे-जर्रे पर तृप्ति की आभा जगमगाने लगती है। पहली बारिश और धरती की ऊपरी परत से वाष्पीकरण के साथ मिट्टी की गंध। लोग लंबी-लंबी सांस लेकर उस सौंधी महक को अपने तन-मन में उतारने लगते हैं। माटी की महक के साथ माटी की देह का एक अभिन्न रिश्ता जो है।
बारिश की झमाझम बूंदें जिस लय का सृजन करती हैं, उसी में तो सृष्टि का आनंद छिपा है। बारिश के रस और बीज के अंकुरण के बाद पौधे का एक सबल पेड़ में तब्दील हो जाना, दरअसल सृजन के अनादि काल से चली आ रही संतति परंपरा का द्योतक है। आरंभ के साथ अंत का जुड़ाव है। पहली बारिश का लुत्फ उठाने के लिए बच्चे-बूढ़े सभी लालायित रहते हैं। क्षण भर के लिए ही सही, पर इसमें भीग जाने को उनका मन छटपटाता रहता है। कहते हैं, देखने वाले की आंख में सुंदरता बसती है। काश, देखने वाले की आंखों में थोड़ी उदारता भी बसती, तो वह प्रकृति की तरह ही दानी हो जाता। न संग्रह की लालसा होती और न पणता का लोभ होता। कवि ने यूं ही नहीं कहा होगा, मिट्टी में स्वर है, संयम है, होनी-अनहोनी कह जाए/ हंसकर हलाहल पी जाए, छाती पर सब कुछ सह जाए।  यथार्थ की तपती धूप के बाद पुन: प्रकृति की कमनीय छांव की ओर लौटना हमारा ध्येय होना चाहिए। अपनी जमीन को ही नहीं, हमारे मन को भी उदात्त गुणों से भर देगा। 
 

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  • Web Title:Mansa vacha karmana article of hindustan on 12 july