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अकेले हैं तो क्या

अकेले होने को प्राय: अच्छा नहीं माना जाता। ज्यादातर शोध ऐसी स्थिति को मनोरोग से जोड़ते हैं और इनके बीच वे शोध रिपोट्र्स कहीं खो जाती हैं, जो इसे लेकर सकारात्मक हैं। अकेलेपन को उसके फायदे के हिसाब से भी देखना जरूरी है। मो येन चीन के पहले लेखक हैं, जिन्हें साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला है। येन कहते हैं, अकेलापन मेरे लेखन का अभिन्न अंग है। येन को गरीबी के कारण स्कूल छोड़ मवेशियों को चराने का काम करना पड़ा था। वे मवेशियों के बीच अकेले होते और इस अकेलेपन को अपने ऊपर छाने देते। इतना कि उन्होंने अपना नाम भी ग्वान मोए से बदलकर मो येन रख लिया। इसका अर्थ चीनी में होता है- मत बोलो।

अकेलापन हमें उस अवस्था में ले जाने में मददगार है, जिसमें हम धीरे-धीरे अपनी भावनाओं को समझते हैं। विचारक ज्यां पाल सात्र्र अकेलेपन को जिंदगी से जोड़कर देखते हैं। वह कहते हैं, एकाकीपन व ब्रह्मांड की शून्यता के साथ सार्थकता पाने की मानव चेतना की इच्छा के बीच के विरोधाभास के कारण अकेलापन मानवीय स्थिति का मौलिक अंग है। सरल शब्दों में कहें, तो यह जिंदगी से जुड़ा है। इसलिए जरूरी है कि इसे समझा जाए। इसे अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया जाए। यह देय की भूमिका में रहे, इसके लिए एकांत में डूबने और फिर उससे बाहर निकलने की कला सीखनी होगी। 

अमेरिकी चित्रकार एडवर्ड हॉपर अकेले होकर भी सतर्क होते। उनके लिए बाकी चीजों से कटना संवेदना, करुणा और सहानुभति के भाव जगाने जैसा होता। समर इंटीरियर, गर्ल एट स्वीईंग मशीन  जैसी उनकी कृतियां अकेलेपन की महान भेंट हैं।

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  • Web Title:Mansa vacha Karmana article in Hindustan on 30 august