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खुशियों के शहर में

फिनलैंड की राजधानी हेलसिंकी की उड़ान के दौरान, सामने सीट पॉकेट में रखी मैगजीन ब्लू विंग्स  पर नजर पड़ी। पन्ने पलटाए, तो जाना कि फिनलैंड में दुनिया के सबसे ज्यादा हैप्पी यानी खुश लोग रहते हैं। तभी विमान की बुजुर्ग एयरहोस्टेस के झुर्रियों भरे चेहरे पर भी अनूठी मुस्कान देखकर लगा कि वाकई खुशी भरे शहर में जा रहा हूं। टेक ऑफ होने के कुछ देर बाद सभी मुसाफिरों को खाने के लिए स्ट्रॉबेरी पेशकर स्वागत किया गया। 

पन्ने और पलटे, तो नजर फिलॉसफर फ्रेंक मारटेला के लेख हाउ टु लिव अ गुड लाइफ  पर ठहर गई। उनका मानना है कि सार्थक जिंदगी जीने से ही खूब खुशियां मिलती हैं। खुशी के लिए पीछे-पीछे दौड़ने की जरूरत नहीं। हर बार और हासिल करने की चाहत हमारी खुशी को वर्तमान से परे खिसकाती रहती है। सार्थक जीना दो तरीकों से मुमकिन होगा- खुद को जानें और दूसरों से मेलजोल बढ़ाएं। आमतौर पर, हर इंसान खुद के उसूलों पर सबको चलाना चाहता है। हेलसिंकी की सड़कों पर भी लगा कि वहां तनाव का नामोनिशान नहीं है। वहां पैदल और साइकिल दौड़ाने वालों को खासी अहमियत मिलती है। जेब्रा क्रॉसिंग से सड़क पार करने वालों के लिए ट्राम के पहिए तक रुक जाते हैं और ड्राइवर मुस्कराकर पहले उन्हें सड़क पार करने का इशारा करता है। ऐसे माहौल में, बूढे़ भी लाठियों के सहारे मजे से चलते-फिरते हैं। हेलसिंकी छोटा-सा शहर है, छोटी-छोटी सड़कें हैं, फिर भी आमदनी, सेहतमंद लंबी उम्र, आपसी मदद, आजादी, एक-दूसरे पर विश्वास और उदारता के मोर्चे पर ऊपर है। ये तमाम कारक, व्यक्ति और समाज, दोनों की खुशहाली के लिए अहम हैं।

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  • Web Title:Mansa vacha Karmana article in Hindustan on 05 September