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कार्य-कारण की सोच

पहले मुरगी हुई या अंडा, इस सवाल को छोटा न समझें। ग्रीस में इस पहेली पर सोचने की शुरुआत हुई। सदियों से सैकड़ों दार्शनिक, वैज्ञानिक इस सवाल पर ऊहापोह में रहे, पर अभी तक कोई तर्कसंगत जवाब नहीं मिला है। हम अक्सर कारण और कार्य की भाषा में सोचते हैं, यह मानते हैं कि हर चीज का कोई न कोई कारण होना ही चाहिए। यही नहीं, कारण कार्य से पहले होना चाहिए, वरना कार्य पैदा कैसे होगा? मगर यह हुआ तर्क का नजरिया। एक और तरह की सोच है, जो तर्कातीत है। तर्क से आदमी का मन चलता है, अस्तित्व नहीं। 

यह जो दूसरा नजरिया है, उसे क्वांटम फिजिक्स कहते हैं। क्वीन्सलैंड यूनिवर्सिटी में कुछ वैज्ञानिकों ने इस अंतहीन पहेली का हल एक नए नियम से किया है। उन्होंने पाया है कि अस्तित्व में किसी तल पर कारण और कार्य, दोनों एक साथ हो सकते हैं। यानी अंडा और मुरगी, दोनों ही एक साथ हो सकते हैं। इसे अनिश्चित कारण क्रम कहा जाता है। इलेक्ट्रॉन और फोटान का अवलोकन करते समय वैज्ञानिकों को इस रहस्य का पता चला है। हालांकि इसे हम रोजमर्रा की जिंदगी में नहीं देख सकते। इसे वैज्ञानिक लैब में अदृश्य अणुओं का व्यवहार देखकर खोजा जा सकता है। अगर इस नियम को हमने समझ लिया, तो हमारी सोच में क्रांतिकारी बदलाव होगा। इससे विचारों की संकीर्णता, उससे पैदा अहंकार कम हो सकता है, क्योंकि अगर दो विपरीत चीजें एक साथ हो सकती हैं, तो दो विपरीत विचार भी एक साथ सही हो सकते हैं। अत:  सही-गलत की बहस बेमानी हो जाएगी। मनुष्य के मानसिक विकास में क्वांटम फिजिक्स सचमुच एक बड़ी छलांग सिद्ध होगी। 

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  • Web Title:Mansa vacha Karmana article in Hindustan on 05 november