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कर्म को समझें

लोग सोचते हैं कि बुरा कर्म करो, तो बुरा फल मिलेगा, अच्छा करो, तो अच्छा मिलेगा। जब लोग कहते हैं कि फल मिलेगा, तो उसका मतलब है, भविष्य में मिलेगा। मानो ऊपर कोई है, जो हिसाब-किताब करके हमें फल देगा। लेकिन ऐसा कहीं कोई भी नहीं है। यह तो एक गहरे वैज्ञानिक सिद्धांत का गलत अर्थ लगा लिया गया है। ओशो ने इसकी धुंध हटाकर बताया है कि कर्म का परिणाम तत्काल है, तत्क्षण है, यह भविष्य में आगे नहीं मिलेगा। कुछ बुरा किया, उसी क्षण हमारे भीतर कुछ बुरा हो गया। कुछ भला किया, उसी क्षण हमारे भीतर कुछ भला हो गया। हम अपने को सतत निर्मित कर रहे हैं। हमारा प्रत्येक कर्म हमको इसी क्षण बना रहा है। हम जिसको जीवन कहते हैं, वह एक सेल्फ क्रिएशन भी है। जो-जो हम कर रहे हैं, उससे हम बन रहे हैं।

लोग अक्सर कहते हैं कि आप नरक में चले जाएंगे, या स्वर्ग में चले जाएंगे। नरक और स्वर्ग कोई भौगोलिक प्रदेश नहीं हैं, बल्कि मानसिक स्थितियां हैं। जब आप क्रोध करते हैं, तो उत्तप्त हो जाते हैं और अग्नि की लपटों से घिर जाते हैं, उसी क्षण नरक में चले जाते हैं। इस तरह चौबीस घंटे में आप अनेक बार नरक में होते हैं और अनेक बार स्वर्ग में होते हैं। यह तो हो ही नहीं सकता कि मैं अभी क्रोध करूं और अगले जन्म में मुझे उसका फल मिले। इतनी देर क्यों होगा? जब मैं प्रेमपूर्ण हूं, तो मुझे उसी क्षण फल मिल रहा है, क्योंकि प्रेम से जो आनंद मिलता है, वही उसका फल हैै। कर्म सिद्धांत एक बहुमूल्य विधि है, जो आपको पूरी तरह से जिम्मेदार बनाती है, जिससे आप परिपक्व हो जाएं और हर काम पूरे होश के साथ करें।

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  • Web Title:Hindustan Mansa Wacha Karmna Column on 24th June