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कृतज्ञता का अर्थ

धन्यवाद करना अलगाव के भाव को इंगित करता है। धन्यवाद देने का अर्थ है कि सामने वाला व्यक्ति हमसे अलग है। यदि तुम गहराई से धन्यवाद देते हो, इसका अर्थ है कि तुम अलगाव को अधिक गहराई से महस...

कृतज्ञता का अर्थ
Monika Minalहिन्दुस्तानFri, 01 Mar 2024 11:20 PM
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धन्यवाद करना अलगाव के भाव को इंगित करता है। धन्यवाद देने का अर्थ है कि सामने वाला व्यक्ति हमसे अलग है। यदि तुम गहराई से धन्यवाद देते हो, इसका अर्थ है कि तुम अलगाव को अधिक गहराई से महसूस करते हो। अंत:करण में धन्यवाद की कोई आवश्यकता ही नहीं, क्योंकि वहां एकता है। 
जब तुम धन्यवाद देते हो, तुम कुछ समाप्त कर रहे हो- कोई आदान-प्रदान, कोई संबंध, किसी क्रम को खत्म कर रहे हो। धन्यवाद अलविदा के समान है। ऊपरी स्तर पर तुम सभी लेन-देन को खत्म कर सकते हो, पर गहराई में तो सब एक ही है। गहराई में जाओ, तो धन्यवाद का कोई अर्थ नहीं। 
क्या तुम कृतज्ञ हो? अगर तुम कृतज्ञ हो, तो मेरे नहीं हो! जब कोई तुम्हें कुछ देता है और तुम कृतज्ञता महसूस करते हो, तो इसका मतलब है कि तुम स्वयं को उससे अलग समझते हो। तुम अपने प्रति तो कभी आभार नहीं प्रकट करते? कृतज्ञता स्वाभाविक है, पर जब तुम कृतज्ञता से ऊपर उठते हो, तब समन्वय होता है। तब न ‘मैं’ रहता है, न ‘तुम’। तुम्हें कृतज्ञता से भी आगे बढ़ना है। बच्चे जब तक एकता महसूस करते हैं, कृतज्ञता नहीं महसूस करते हैं। वे सब कुछ अपना ही मानते हैं। तुम्हारे अपने हाथ, जो तुम्हें भोजन कराते हैं, उनके प्रति तुम कृतज्ञता नहीं महसूस करते। 
जब तुम कृतज्ञ होते हो, तब मुख्य बन जाते हो, अधिक महत्वपूर्ण हो जाते हो। जब तुम किसी खूबसूरत वस्तु को पाकर ईश्वर के प्रति कृतज्ञ होते हो, जैसे तुम्हारी आंखों की दृष्टि, तब कौन अधिक महत्वपूर्ण होता है? तुम या ईश्वर? तुम! तो तुम्हारी कृतज्ञता अहंकार दर्शाती है।
श्री श्री रविशंकर 

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