फोटो गैलरी

Hindi News ओपिनियन मनसा वाचा कर्मणासुनेंगे नहीं, तो सीखेंगे कैसे 

सुनेंगे नहीं, तो सीखेंगे कैसे 

ज्ञान के संचय से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है- सीखना। सीखना एक कला है। एक इलेक्ट्रॉनिक मस्तिष्क, यानी कंप्यूटर में जानकारियां भरी जा सकती हैं और फिर उसके बदले हर प्रकार की सूचनाएं प्राप्त की जा सकती हैं...

सुनेंगे नहीं, तो सीखेंगे कैसे 
Monika Minalहिन्दुस्तानMon, 26 Feb 2024 11:09 PM
ऐप पर पढ़ें

ज्ञान के संचय से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है- सीखना। सीखना एक कला है। एक इलेक्ट्रॉनिक मस्तिष्क, यानी कंप्यूटर में जानकारियां भरी जा सकती हैं और फिर उसके बदले हर प्रकार की सूचनाएं प्राप्त की जा सकती हैं। मगर ये मशीनें चाहे जितनी चतुर हों, इनमें चाहे जितनी जानकारियां भर दी जाएं, ये सीख नहीं सकतीं। केवल मनुष्य का मन है, जो सीख सकता है। 
सीखने की क्रिया और ज्ञान की प्रक्रिया में काफी अंतर है। ज्ञान की प्रक्रिया कुछ ऐसी है, जिसमें अनुभवों, तरह-तरह के सामाजिक दबावों, प्रभावों आदि का संचय होता है। यह संचय ज्ञान के रूप में अपना अवशेष छोड़ता है और उस ज्ञान और पृष्ठभूमि से हम क्रियाशील होते हैं। अगर ऐसा न हो, यानी सदियों से एकत्र ज्ञान न हो, तकनीकी जानकारियां न हों, तो हम शायद काम ही नहीं कर पाएं। हमें यही नहीं पता चलेगा कि हम कहां रहते हैं और हमें क्या करना है? दूसरी तरफ, सीखने की क्रिया एक निरंतर गति है। जिस क्षण आपको लगता है कि आपने सीख लिया है, वह ज्ञान का रूप ले लेता है। उस ज्ञान से आप क्रिया करते हैं। तब आप वर्तमान में रहते हुए अतीत के माध्यम से कार्य करते हैं।
सीखने का अर्थ है बिना अतीत के मुताबिक हुए वर्तमान में क्रियाशील होना, क्योंकि जब आप ज्ञान के साथ सुनते हैं, तो सीखना नहीं होता। अगर आप ज्ञान के साथ सुनते हैं, तो आप वास्तव में सुनते ही नहीं, बल्कि तब आप व्याख्या, तुलना, मूल्यांकन और निर्णय कर रहे होते हैैं। आप किसी स्थापित ढांचे के अनुरूप हो रहे होते हैं। सुनने की क्रिया एक बिल्कुल अलग चीज है; जब आप पूर्ण ध्यान के साथ बिना तुलना, मूल्यांकन, व्याख्या और अनुरूपण के सुनते हैं, सिफ तभी आप वास्तव में सुन रहे होते हैं।
जीवन का अर्थ है जीना और उसे गहराई से समझना। जीवन के बारे में हमारा सीखना तब बंद हो जाता है, जब हम जीवन के पास अतीत के साथ, ज्ञान रूपी संस्कारबद्धता के साथ जाते हैं और उससे तर्क-वितर्क करते हैं। तो ज्ञान अर्जित करना और सीखने में अंतर है। आपके पास ज्ञान होना चाहिए, वरना आपको पता ही नहीं चलेगा कि आप कहां रहते हैं, आपका नाम क्या है आदि। एक स्तर पर ज्ञान बहुत आवश्यक है, पर उस ज्ञान का इस्तेमाल आप जीवन को समझने के लिए नहीं कर सकते, क्योंकि जीवन हर क्षण बदलती गति है। और जब आप जीवन के साथ नहीं चलते, तब आप अतीत में चले जाते हैं और जीवन रूपी अद्भुत चीज को समझने की कोशिश करते हैं। लेकिन जीवन को समझने के लिए उसके हर क्षण के बारे में सीखना पड़ेगा और यह कहते हुए उसके पास कभी नहीं जाना होगा कि मैं इसके बारे में पहले से ही जानता हूं।
जे कृष्णमूर्ति‘ 

हिन्दुस्तान का वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें
अगला लेख पढ़ें