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कुछ भय भी जरूरी

भय को प्राय: नकारात्मक रूप में चित्रित किया जाता है, लेकिन वास्तव में ऐसा है नहीं, क्योंकि यह प्रेम का ही दूसरा रूप है, इसलिए हर बात की व्याख्या जो प्रेम से की जा सकती है, वह भय से भी की जा सकती है...

कुछ भय भी जरूरी
Monika Minalहिन्दुस्तानFri, 17 May 2024 09:50 PM
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भय को प्राय: नकारात्मक रूप में चित्रित किया जाता है, लेकिन वास्तव में ऐसा है नहीं, क्योंकि यह प्रेम का ही दूसरा रूप है, इसलिए हर बात की व्याख्या जो प्रेम से की जा सकती है, वह भय से भी की जा सकती है। इसको आप इस बात से समझिए कि एक शिशु अपनी मां से चिपकता है, तो यह  प्रेम के कारण हो सकता है और भय के कारण भी। मनुष्य में भय की इस पुरातन मूलवृत्ति को ईश्वरीय प्रेम के ज्ञान द्वारा पूर्ण रूप से परिवर्तित किया जा सकता है।
भय अतीत का एक चिह्न है, जो वर्तमान में भविष्य को दर्शाता है। जब लोग भय को स्वीकार नहीं करते, तो वे अहंकारी हो जाते हैं; जब भय को समझकर उसे स्वीकार कर लेते हैं, तब वे उससे मुक्त हो जाते हैं। तुम बिल्कुल निडर या तो पूर्ण व्यवस्थित स्थिति में होते हो या सर्वथा अस्त-व्यस्तता में। न तो संत को भय होता है और न ही मूर्ख को, इनके अलावा हर अवस्था में भय होता है। संसार को व्यवस्थित रखने के लिए भय आवश्यक है। भय मौलिक प्रवृत्ति है। मृत्यु का भय जीवन की रक्षा करता है। गलती का भय इंसान को सही राह पर रखता है। बीमारी का भय स्वच्छता के लिए प्रोत्साहित करता है। दुख का भय तुम्हें नेकी के मार्ग पर रखता है।
शिशु के मन में थोड़ा सा भय होता है, जो चलने के समय उसे चौकन्ना और सावधान रखता है। थोड़ा सा भय आवश्यक है, जिससे संसार के सभी काम भली-भांति चलते रहें। इसलिए भय को मिटाने का प्रयास मत करो, केवल ध्यान करो और यह जानने की कोशिश करो कि या तो तुम कोई भी नहीं या किसी विशिष्ट शक्ति के अपने हो!
श्री श्री रविशंकर