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नेकी करो, खुश रहो

पिछले दिनों यूनिवर्सिटी ऑफ नार्थ कैरोलिना में हुए एक अध्ययन में पता चला कि भलाई करने वाले लोग ज्यादा खुश रहते हैं। अध्ययन में यह बात सामने आई कि लोगों की भलाई करने से शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली सुधरती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन की पुष्टि के लिए डर, घबराहट, नकारात्मक मानसिक अवस्था का मानव शरीर और जींस पर भी अध्ययन किया। पहले भी कई शोधों से यह प्रमाणित हो चुका है कि डर, घबराहट आदि से जींस पर खराब असर पड़ता है। प्रोफेसर स्टीवन कोल के अनुसार, भलाई करने वाले लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी होने के कारण उनका शरीर मौसमी तथा अन्य प्रकार की बीमारियों से अच्छी तरह निपट लेता है। 

माना जाता है कि स्वस्थ रहने के लिए खुश रहना बहुत जरूरी है। आत्मसंतुष्टि के बिना हम खुश नहीं रह सकते हैं। जब हम भलाई का कोई काम करते हैं, तो हमें आत्मसंतुष्टि अपने आप मिलती है। आत्मसंतुष्टि कोई ऐसी चीज नहीं है कि उसे पाने के लिए अतिरिक्त प्रयास किए जाएं। अगर प्रत्यक्ष रूप से इसे पाने की कोशिश की जाएगी, तो यह हमसे दूर भागती रहेगी। यह एक ऐसा आभास है, जो कुछ क्रिया-कलापों के माध्यम से हमें अप्रत्यक्ष रूप से ही प्राप्त होता है। हर व्यक्ति की संतुष्टि का स्तर अलग होता है। मुख्य बात यह है कि हम क्या काम करने के बाद संतुष्ट हो रहे हैं। हम खुद को अच्छा लगने वाला काम करते हैं, तो हमें तृप्ति मिलती है। इससे हमारे चेतन तथा अचेतन में जो तरंगें उत्पन्न होती हैं, उन्हें हम संतुष्टि कह सकते हैं। इसीलिए कोई भी अच्छा काम या फिर भलाई अप्रत्यक्ष रूप से हमारा ही हित करती है। 

 

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