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जागरूकता ही जीवंतता

आखिर जागरूकता है क्या? अलग-अलग लोगों के लिए इसके मायने भी अलग हैं। जब हम जागरूकता कहते हैं, तो इसे मन की सतर्कता समझने की गलती न करें। दिमाग की सतर्कता दुनिया में खुद को बरकरार रखने की आपकी क्षमता...

जागरूकता ही जीवंतता
Monika Minalहिन्दुस्तानTue, 11 Jun 2024 09:57 PM
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आखिर जागरूकता है क्या? अलग-अलग लोगों के लिए इसके मायने भी अलग हैं। जब हम जागरूकता कहते हैं, तो इसे मन की सतर्कता समझने की गलती न करें। दिमाग की सतर्कता दुनिया में खुद को बरकरार रखने की आपकी क्षमता को बढ़ाएगी। जागरूकता कोई ऐसी चीज नहीं है, जो आप करते हैं। एक अवस्था में होने और कुछ करने के बीच फर्क होता है। यह कुछ और नहीं, बल्कि आप ही हैं।
नींद, अनिद्रा, मृत्यु, ये जागरूकता के बस अलग-अलग स्तर हैं। मान लीजिए, आप ऊंध रहे हैं और किसी ने आपको कोहनी मार दी। आप अचानक इस दुनिया में लौट आते हैं। यह छोटी बात नहीं है। आपने एक पल में पूरे अस्तित्व को फिर से रच लिया। वह दुनिया, जो आपके अनुभव से गायब थी, अचानक प्रकट हो जाती है। आप यह कैसे जानते हैं कि पूरा अस्तित्व मौजूद है या नहीं? सिर्फ अपने अनुभव से; उसका कोई दूसरा सुबूत नहीं है। जागरूकता वह चीज है, जो इस अस्तित्व को पैदा कर सकती है या उसे मिटा सकती है। अगर यह नहीं है, तो पूरा अस्तित्व गायब हो जाता है। अपनी जागरूकता को आप अलग-अलग स्तर तक ले जा सकते हैं। जैसे-जैसे यह ऊपर, और ऊपर जाती है, अस्तित्व के बिल्कुल नए आयाम आपके अनुभव मेंखुलते जाते हैं। ऐसी दुनिया, जिसके बारे में किसी ने सपने में भी नहीं सोचा होगा, आपके लिए एक जीती-जागती वास्तविकता बन जाती है।
मान लीजिए, आपको किसी सोते हुए इंसान से उसे बिना जगाए यह पूछना होता, ‘क्या दुनिया का अस्तित्व है?’ उसका जवाब ‘नहीं’ होगा। जहां तक उसका सवाल है, उसके लिए दुनिया का अस्तित्व नहीं है, क्योंकि वह जागरूक नहीं है। लेकिन नींद में भी आप पूरी तरह बेखबर नहीं होते। सोए हुए इंसान और मरे हुए इंसान के बीच फर्क जागरूकता का होता है। इसी तरह, जगे हुए आदमी और प्रबुद्ध आदमी के बीच में भी एक फर्क होता है। प्रबुद्ध आदमी भी सोता है, लेकिन उसने इतनी जागरूकता हासिल कर ली होती है कि उसका कुछ हिस्सा नहीं सोता। ऐसा इसलिए है, क्योंकि उसने अपनी जागरूकता को अलग स्तर तक पहुंचा दिया है!
सबको साथ शामिल करने की प्रक्रिया है जागरूकता। इस पूरे अस्तित्व को गले लगाने का एक तरीका। आप इसे कर नहीं सकते, पर ऐसा सही माहौल बना सकते हैं, जिससे यह खुद-ब-खुद हो जाए। जागरूक बनने की कोशिश मत कीजिए। यह कारगर नहीं होगा। अगर आप अपने शरीर, मन और ऊर्जा में सही ढंग से तालमेल रखते हैं और उसे विकसित करते हैं, तो जागरूकता अपने आप खिलेगी। आप जैसे अभी हैं, उसकी तुलना में कहीं ज्यादा जीवंत हो जाएंगे।
सद्गुरु जग्गी वासुदेव 

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