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सहज जीवन के सूत्र

कभी-कभी हम कहना कुछ चाहते हैं, पर कुछ और ही मुंह से निकल जाता  है, या उसका कोई और अर्थ निकाल लिया जाता है। कहा जाता है कि ऐसी स्थिति में अपनी बात को वापस लेते हुए क्षमा मांग लेना ही उचित है। पर क्षमा मांगना अक्सर हमारे स्वाभिमान के आड़े आता है। वैसे अक्सर यह स्वाभिमान नहीं, अहंकार होता है। अहंकार जीवन की सरलता व सहजता को नष्ट कर देता है। रिश्तों की मिठास बनाए रखने के लिए सत्य वचन और सहज व्यवहार चाशनी का काम करते हैं। यही वह सेतु है, जो आदमी को आदमी से जोड़ता है। सरल व्यक्ति के साथ लोगों की सहानुभूति होती है। जीवन को सहज भाव से जीने वाला असामान्य स्थिति में भी हिम्मत नहीं हारता, बल्कि सही समय की प्रतीक्षा करते हुए विपरीत परिस्थितियों को अपने अनुकूल बनाता है। प्रयासरत व्यक्ति अक्सर आपा खो बैठता है, क्रोध की सबसे भद्दी अभिव्यंजना तभी होती है। 

एक साधारण मनुष्य के लिए सहज जीवन जीना इतना आसान नहीं है, क्योंकि जिसने इस सत्य को जान लिया कि दुख-सुख का आना-जाना धूप-छांव की तरह है और विषमताओं के निवारण के लिए फल की चिंता छोड़कर केवल ईमानदारी से मेहनत करना है, तो वह जीवन जीने की कला जान जाता है। ऐसे मनुष्य नरोत्तम होते हैं। इतनी बड़ी उपलब्धि तुरंत नहीं मिलती है। उसके लिए अनेक तृष्णाओं का त्याग करना होता है। सहजता की बुनियाद सत्य पर टिकी होती है, जो दिल-दिमाग में स्वत: ही समा जाता है। इसी कारणवश सहज भाव वाले व्यक्ति मानसिक तनाव से दूर रहते हैं और छोटी-छोटी खुशियों में अलौकिक आनंद का अनुभव करते हैं।

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  • Web Title:Hindustan Mansa Vacha Karmana Column April 17