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डीप फेक और रामायण

आजकल डीप फेक के बडे़ चर्चे हैं। कंप्यूटर के सहारे यह तकनीक लोगों के चेहरों, वीडियो या ऑडियो की नकल बना सकती है। यकीनन दुश्मनों या धोखेबाजों के हाथ में यह एक शक्तिशाली हथियार बन सकता है...

डीप फेक और रामायण
Pankaj Tomarहिन्दुस्तानSun, 26 May 2024 09:26 PM
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आजकल डीप फेक के बडे़ चर्चे हैं। कंप्यूटर के सहारे यह तकनीक लोगों के चेहरों, वीडियो या ऑडियो की नकल बना सकती है। यकीनन दुश्मनों या धोखेबाजों के हाथ में यह एक शक्तिशाली हथियार बन सकता है। डीप फेक की जो संभावनाएं हैं, वे कुछ ऐसी ही हैं, जिस तरह पुराण काल में राक्षसों की मायावी शक्ति होती थी। सबसे बड़ा उदाहरण है मारीच राक्षस का, जिसने सुनहरे हिरण का रूप लेकर राम जी को धोखा दिया था। उसने न केवल रूप धरा, मरते समय उसने राम जी की डीप फेक आवाज में पुकार भी दी, ‘हा, लक्ष्मण!’ ताकि कुटी में बैठी देवी सीता को लगे कि राम का जीवन संकट में है। 
यह जो डीप फेक जैसी मायावी शक्ति थी, यह मनुष्य के हाथों में थी, इसलिए इसका उपयोग करना है या न करना, इसे वही तय कर सकता था। मारीच की कथा का एक छिपा हुआ पहलू है। वह राक्षस जाति का था, लेकिन उस समय इस शब्द का अर्थ इतना बुरा नहीं था। राक्षस का मूल धातु है रक्षा करना। तो जो रक्षा करते थे, वे राक्षस। रावण का पूरा खानदान इसी जाति का था। ऋग्वेद  में राक्षस शब्द का उपयोग सकारात्मक अर्थों में किया गया है। बताया जाता है कि पहले राक्षस धरती और आकाश में रहने वाले प्राणियों की रक्षा करते थे, लेकिन धीरे-धीरे इन राक्षसों में अपनी शक्ति और बल का अहंकार आने लगा। इसके कारण इन्होंने शुभ कर्म करने वालों को परेशान करना शुरू कर दिया। वे विघ्नकर्ता बन गए। जाहिर है कि शक्ति एक दोधारी तलवार है, जो काट सकती है और बचा भी सकती है। 
मारीच की एक कहानी यह भी है कि रावण अपने मामा मारीच को मनाने गया कि वह हिरण का रूप धरकर श्रीराम को भटकाए, ताकि अकेली सीता का अपहरण किया जा सके। मगर मारीच ने मना करते हुए कहा, ‘अपनी समस्त मायावी शक्तियों का त्याग करके मैंने संन्यास ले लिया है और श्रीराम दिव्य पुरुष हैं। अत: यह काम मैं नहीं कर सकूंगा।’ तब रावण ने क्रोध से भरकर कहा, ‘मेरी आज्ञा नहीं माननी है, तो आप मृत्यु के लिए तैयार हो जाएं।’ 
मारीच ने सोचा, मेरी मौत तो सुनिश्चित है ही, फिर क्यों न श्रीराम के बाण से मरूं? यह दर्शाता है कि मारीच के अंदर उसका सात्विक भाव जिंदा था। वह श्रीराम की दिव्यता से परिचित था। इसकी पुष्टि श्रीराम की ओर से भी मिलती है। जब श्रीराम ने हिरण को बाण मारा, तो मारीच ने अपना असली रूप प्रकट किया और दोनों हाथ जोड़ दिए। रामजी ने भी उसके भक्त-हृदय को पहचान लिया और उसे मुक्ति दे दी। डीप फेक जैसी शक्तियां अगर सद्भाव से भरे लोगों के हाथों में हों, तो उनसे नुकसान नहीं होगा।
अमृत साधना 

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