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28 जनवरी, 2021|2:16|IST

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साहस से कामयाबी

साहस की सीढ़ियां चढ़कर ही उपलब्धियों का मुकाम हासिल किया जा सकता है। इसकी पहली सीढ़ी पाने के लिए अधिसंख्य लोगों की उम्र रील की तरह खिसक जाती है और सोचा हुआ मुकाम हाथ से निकल जाता है। बहुत बार अनमने भाव से भरी गई साहसी उड़ान लक्ष्य को सहज रूप से मिलवा देती है। 
साहस दो रूपों में जीवन के लिए लाभकारी सिद्ध हो सकता है। पहला, स्वयं के विकास के लिए और दूसरा, औरों के नेतृत्व के लिए। न्यूयॉर्क टाइम्स  की बेस्ट सेलर लेखिका बेरेन ब्राउन अपनी बहुचर्चित पुस्तक डेयर टु लीड  में लिखती हैं, नेतृत्व केवल पद, प्रतिष्ठा, जन-समूहों या शक्तियों पर राज करने का नाम नहीं, बल्कि इसका मतलब है साहसी बनना, दृढ़ता से आगे बढ़ना तथा अपनी कमजोरियों पर काबू पाकर सफलता हासिल करना। जब हम अपनी अच्छी बातों और विश्वसनीयता को औरों में बांटते हैं, तो शक्ति का दौरा और व्यापक होता है, कार्य के प्रति जवाबदेही बढ़ती है। हमें दिक्कतों से घबराना नहीं चाहिए, बल्कि चुनौती के रूप में इन्हें स्वीकार करके आगे बढ़ना चाहिए। ब्राउन ने अपने दो दशकों के शोध अध्ययनों से यह सिद्ध किया है कि घरेलू उद्योगों से लेकर बडे़ उद्योगों की सफलता के मूल में साहस की बड़ी भूमिका है। इसके लिए प्रतिबद्धता की आवश्यकता है। कमरतोड़ मेहनत, मजबूत इरादे और साहसी कदमों से लक्ष्यों की दशा और सपनों की दिशा बदली जा सकती है। निष्क्रियता की दहलीज पर साहस को चुनना आसान नहीं है। यदि एक बार आप साहस दिखाते हैं, तो अगली बार जरूर कुछ नया कर सकते हैं। साहस बडे़ लक्ष्यों को प्राप्त करने की महत्वपूर्ण सीढ़ी है।
 

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  • Web Title:hindustan mansa vacha karmana column 25 september 2020