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तुम्हारे गांव के लोग कैसे थे

एक आदमी अपने घर के दरवाजे पर बैठा था। एक घुड़सवार रुका और उससे पूछा, ‘इस गांव के लोग कैसे हैं?’ बूढ़े आदमी ने पूछा, ‘तुम यह क्यों पूछ रहे हो?’ घुड़सवार बोला, ‘जिस गांव से मैं आ रहा हूं, वहां के लोग...

तुम्हारे गांव के लोग कैसे थे
Amitesh Pandeyहिन्दुस्तानWed, 22 Nov 2023 10:50 PM
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एक आदमी अपने घर के दरवाजे पर बैठा था। एक घुड़सवार रुका और उससे पूछा, ‘इस गांव के लोग कैसे हैं?’ बूढ़े आदमी ने पूछा, ‘तुम यह क्यों पूछ रहे हो?’ घुड़सवार बोला, ‘जिस गांव से मैं आ रहा हूं, वहां के लोग बडे़ बदतमीज हैं। उनके कारण मैं परेशान और विचलित हो गया था। मुझे वह गांव छोड़ना पड़ा। अब मैं किसी नए गांव का वासी बनना चाहता हूं, इसलिए आपसे पूछ रहा हूं कि यहां के लोग कैसे हैं?’
बूढ़ा आदमी बोला, ‘भाई, अच्छा होगा कि तुम आगे चले जाओ। इस गांव के लोग और भी गए-गुजरे हैं। अत्यधिक दुष्ट, बेहद बदतमीज! यहां तुम और अधिक परेशानी में पड़ जाओगे, इसलिए कहीं और चले जाओ।’ घुड़सवार आगे चला गया। ठीक इसी के पीछे एक बैलगाड़ी आई और उसमें बैठे आदमी ने उसी वृद्ध को देखा, तो उससे पूछा, ‘दादाजी, इस गांव के लोग कैसे हैं? मैं नई रिहाइश ढूंढ़ रहा हूं।’
बूढे़ व्यक्ति ने उससे वही प्रश्न पूछा, ‘जिस गांव को तुम छोड़ आए हो, उसके लोग कैसे थे?’ उस आदमी की आंखों में आंसू आ गए। बोला, ‘मैं उन्हें छोड़ना नहीं चाहता था, पर मुझे छोड़ना पड़ा। उस गांव के लोग बहुत ही प्रेमपूर्ण थे। मैं असहाय था, मुझे आर्थिक तकलीफ थी। मुझे वह गांव छोड़कर निकलना पड़ा, ताकि मैं पैसे कमा सकूं। अपनी तकदीर कहीं और आजमाना चाहता हूं। मगर मेरी यही ख्वाहिश है कि जब कभी भी मेरा भाग्योदय होगा, वापस उसी गांव में चला जाऊंगा। मैं उसी गांव में मरना चाहता हूं। मैं वहां रह तो न सका, पर कम से कम अंतिम सांस तो वहां ले लूं।’ यह सुनकर बूढ़ा आदमी बोला, ‘तुम्हारा स्वागत है। तुम इस गांव में उस गांव से अधिक प्रेमपूर्ण लोग पाओगे।’
एक आदमी वहां बैठा यह सब देख-सुन रहा था। उसने बूढे़ व्यक्ति से कहा, ‘आपने तो मुझे हैरत में डाल दिया है। पहले आदमी को आपने बोला कि यह बहुत बुरे और असभ्य लोगों का गांव है, आगे चले जाओ, और दूसरे से आप कह रहे हैं कि यह बहुत प्रेमपूर्ण गांव है, तुम्हें कहीं और जाने की जरूरत नहीं, तुम्हारा यहां स्वागत है। ऐसा क्यों?’ तब बूढ़े आदमी ने समझाया, ‘लोग तो तुम्हारा आईना भर हैं। हर जगह लोग तो एक जैसे ही हैं। असली चीज तो आप स्वयं हैं।’
यह सूफी कहानी इंसान के बारे में बुनियादी सच बताती है : जहां कहीं तुम जाओ, तुम हमेशा स्वयं को ही पाओगे; जहां कहीं तुम देखो, तुम हमेशा स्वयं को ही देखोगे। यह संसार और कुछ नहीं, बस आईना भर है, सारे रिश्ते आईने हैं। बार-बार तुम खुद के ही सामने होते हो और बार-बार भ्रमित होते हो। तुम कभी यह बात नहीं समझे कि यह तुम्हारी अपनी भावदशा है, जिससे तुम्हारा बार-बार सामना होता है।    
ओशो 

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