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इंद्रियों की संवेदनशीलता

आम तौर पर इंद्रियों की बड़ी निंदा की जाती है, लेकिन इंद्रियां अनुभव लेने के द्वार हैं। हमने इंद्रियों को जड़ कर दिया है, इसलिए हमें रोजमर्रा के जीवन में ऊब होती है और हम कृत्रिम मनोरंजन के साधन...

इंद्रियों की संवेदनशीलता
Pankaj Tomarहिन्दुस्तानSun, 07 Jan 2024 11:49 PM
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आम तौर पर इंद्रियों की बड़ी निंदा की जाती है, लेकिन इंद्रियां अनुभव लेने के द्वार हैं। हमने इंद्रियों को जड़ कर दिया है, इसलिए हमें रोजमर्रा के जीवन में ऊब होती है और हम कृत्रिम मनोरंजन के साधन खोजते हैं। भगवान महावीर ने मति-ज्ञान का उल्लेख किया है, इसे साइकिक संवेदन कह सकते हैं। मनुष्य की हर इंद्रिय के पीछे एक सूक्ष्म इंद्रिय है, जिनको यदि हम जगा पाएं, तो हमारा सामान्य जीवन अद्भुत हो जाएगा।
ओशो कहते हैं, मनुष्य की सूक्ष्म इंद्रियां बड़ी शक्तिशाली हैं; इनके आगे समय और स्थान की कोई बाधा नहीं है। प्राचीन समय में विज्ञान विकसित था, लेकिन सारा विज्ञान सूक्ष्म इंद्रियों के आधार पर था। आधुनिक विज्ञान स्थूल के आधार पर है। जैसे आज हमारे पास टेलीफोन है, रेडियो है, टेलीविजन है- ये सब बाह्य इंद्रियों का विस्तार हैं। प्राचीन आदमी ने अंतर-इंद्रियों का विस्तार किया था और उनके आधार पर उसने बहुत सारे काम कर लिए थे, जो हमारी पकड़ के बाहर हैं। सवाल है कि सूक्ष्म इंद्रियों को कैसे विकसित करें? कुछ इस तरह से आप थोडे़ से प्रयोग करें। स्नान करते समय फव्वारे के नीचे खडे़ हो जाएं, सारे विचार छोड़ दें, दुनिया को भूल जाएं। जो पानी आपके सिर पर गिर रहा है और उसकी धाराएं शरीर पर बही जा रही हैं, उस स्पर्श का पीछा करें। पूरे शरीर से उस स्पर्श को पीएं। रोएं-रोएं से पानी की ताजगी को भीतर जाने दें। आपका शरीर पचहत्तर प्रतिशत पानी है। तो जब पानी आपको बाहर से स्पर्श करता है, आपका पूरा शरीर संवेदनशील हो, तो भीतर का पानी भी आंदोलित होने लगेगा।
स्पर्श की इंद्रिय सबसे ज्यादा उपेक्षित है, जबकि वह सबसे बड़ी है। पूरा शरीर स्पर्श का आनंद ले सकता है, लेकिन हम कभी उसका उपयोग ही नहीं करते। कभी समुद्र की रेत में आंखें बंद करके लेट जाएं, ताकि पीठ को रेत का स्पर्श अनुभव हो सके; पानी के झरने में सिर झुकाकर बैठ जाएं। आंखें बंद करके किसी को स्पर्श करें, ताकि एक-दूसरे के शरीर की प्रतीति हो सके। दो प्रेमी भी एक-दूसरे के शरीर से बडे़ रूटीन ढंग से परिचित होते हैं। कभी आपने अपनी पीठ और अपने प्रेमी की पीठ को मिलाकर देखा है कि दोनों कैसा अनुभव करते हैं? अगर आप अपनी प्रेयसी की पीठ के साथ अपनी पीठ मिलाकर आंखें बंद करके खडे़ हो जाएं, तो आपको पहली दफा एक नए व्यक्ति का अनुभव होगा, क्योंकि पीठ की तरफ से हर व्यक्ति बिल्कुल भिन्न है। 
कभी आप अपने बच्चे को पास लेकर, उसके गाल को अपने गाल से लगाकर थोड़ी देर शांत बैठे हैं? बच्चा अभी शुद्ध है, अभी उसकी जीवन-ऊर्जा प्रवाहित हो रही है। अगर आप बैठ जाएं अपने बच्चे के पास, तो आपका बच्चा आपके लिए जीवनदायी सिद्ध होगा।
अमृत साधना
 

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