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मनसा वाचा कर्मणा

कर्म फल

 पुष्पेंद्र दीक्षितPublished By: Naman Dixit
Wed, 01 Sep 2021 03:21 AM
कर्म फल

प्रत्येक प्राणी का जीवन जन्म से लेकर मृत्यु तक कर्म के पथ पर चलता है। और हम जैसा कर्म करते हैं, उसी के अनुरूप हमको उसका फल भी प्राप्त होता है। हमारे जीवन की दिशा हमारे किए हुए कर्मों पर पूरी तरह निर्भर है। समाज कल्याण की खातिर और जीवनोपयोगी किए गए कर्म हमको उचित दिशा प्रदान करते हैं। इसके विपरीत कर्म हमारे जीवन में संकटों को आमंत्रित करते हैं। भगवद् गीता  में कहा गया है कि कर्म करो, फल की चिंता मत करो। यह बात बिल्कुल सत्य है, किंतु इसके पीछे यह संदेश दिया गया है कि अच्छे कर्म करते समय फल की चिंता नहीं होनी चाहिए। वही बुरे कर्म से पहले एक बार उसके उपरांत होने वाले दुष्परिणामों के बारे में हमको जरूर मंथन करना चाहिए। मनीषियों का मत है कि हम कर्म चाहे जैसा भी करें, हमारी अंतरात्मा सही व गलत का भेद भली-भांति जानती है। यह अलग बात है कि त्वरित लाभ या लोभवश हम गलत कर्म कर बैठते हैं, जिसका परिणाम हमको आगे चलकर इसी जीवन में भुगतना पड़ता है।
इतिहास हमेशा से हमारा शिक्षक रहा है। इतिहास की तरफ देखें, तो हम सीख सकते हैं कि अपने कर्म का  फल हमको भुगतना ही पड़ता है। जैसे रावण ने माता सीता का अपहरण करके लोक निंदित कृत्य किया, जिसके परिणामस्वरूप उसके कुल का सर्वनाश हो गया। वहीं उसके सहोदर विभीषण ने धर्म युक्त कर्म करके श्री नारायण के चरणों में स्थान पाया। महर्षि वाल्मीकि का उदाहरण भी इसका प्रमाण है। अत: हमें नहीं भूलना चाहिए कि अपने कर्मों का फल किसी न किसी रूप में भुगतना ही पड़ता है। 
 

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