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बंदूक लॉबी से लड़ती बीस साल की बाला

ema gonzalez

दो बजकर 20 मिनट हुए होंगे कि पूरा परिसर गोलियों की आवाज से थर्रा उठा। कोई कुछ समझ पाता, इसके पहले अनर्थ हो चुका था। 17 किशोर छात्र-छात्राओं और शिक्षकों के शव फर्श पर थे और लगभग इतने ही जमीन पर तड़प रहे थे। पूरा स्कूल गम और दहशत में डूब गया था।


आने वाले 11 नवंबर को वह 20 साल की हो जाएंगी। मगर इस छोटी-सी उम्र में मिले एक जख्म ने उनकी जिंदगी की दिशा ही बदल दी। वह सिर्फ उनका दर्द नहीं था, बल्कि पूरे अमेरिका और दुनिया के हर उस शख्स की उस पीड़ा में साझेदारी है, जिसने अपने किशोरवय बेटे-बेटी की अर्थी को कंधा दिया है। एमा गोंजालिस ने तो अपने स्कूल के 17 सहपाठियों की लाशें को सुरक्षाकर्मियों को बटोरते देखा था। उनके बाएं बाजू पर आज भी रबड़ के फ्रेंडशिप बैंड मौजूद हैं, जो पार्कलैंड नरसंहार के शिकार दोस्तों की उन्हें हर पल याद दिलाते हैं।


वह 14 फरवरी, 2018 की तारीख थी। फ्लोरिडा के मर्जरी स्टोनमैन डगलस हाईस्कूल की सुबह आम दिनों की तरह बेहद खुशगवार थी। करीब 900 किशोर लड़के-लड़कियों की चहलकदमी से पूरा परिसर आबाद था। लेकिन एक मनहूस दोपहरी उन सबके जेहन पर हमेशा-हमेशा के लिए नक्श होने का इंतजार कर रही थी। दो बजकर 20 मिनट हुए होंगे कि पूरा परिसर गोलियों की आवाज से थर्रा उठा। किसी को कुछ समझ में आता, इसके पहले अनर्थ हो चुका था। 17 किशोर छात्र-छात्राओं और शिक्षकों के शव फर्श पर थे और लगभग इतने जमीन पर तड़प रहे थे। पूरा स्कूल खौफ और दहशत में था। सभी अपनी जान बचाने के लिए यहां-वहां ठिठक गए थे। 


एमा उस वक्त ऑडिटोरियम में क्लास ले रही थीं। पहले तो उन्हें लगा कि शायद स्कूल में ‘स्वाट’ टुकड़ी आई है, मगर फिर उनके कानों में चीखने की आवाजें आईं। वह दोस्तों के साथ फिर ऑडिटोरियम की ओर भागीं। एक-दूसरे  का हाथ थामे वे सब करीब दो घंटे तक पल-पल मौत की आशंका को जीते रहे। एमा उन  पलों को याद करते हुए भी कांप जाती हैं, ‘मैं नहीं जान रही थी कि क्या हुआ है? मैं अपने फोन 
के इंटरनेट के जरिए भी कुछ जानना नहीं   चाहती थी। मैं कुछ भी जानने-सुनने की मन:स्थिति में नहीं थी।’ 


एमा और उनके साथियों को पुलिस ने ऑडिटोरियम से बाहर निकाला और इस बीच हत्यारा युवक भी पकड़ा जा चुका था। वह उसी स्कूल का एक पूर्व छात्र था, जिसे उसकी गलत हरकतों की वजह से निकाल दिया गया था। प्रतिशोध की उसकी भावना को अमेरिका में आसानी से उपलब्ध हो जाने वाले संहारक हथियारों ने प्रबल बना दिया था और वह ऐसी करतूत को अंजाम दे गया।


बहरहाल, तीन दिन बाद मृतकों की याद में एक सभा का आयोजन हुआ, जिसमें एमा गोंजालिस ने बड़़े साहस के साथ 11 मिनट तक अपने आक्रोश को अभिव्यक्ति दी। उनके एक-एक शब्द ने अमेरिका के दिल को छुआ। अपने संबोधन में एमा ने राष्ट्रपति ट्रंप पर लगभग तंज करते हुए कहा कि अगर वह मुझसे मिले और उन्होंने इसे भयानक त्रासदी बताते हुए अफसोस जताया, तो मैं उनसे पूछूंगी कि राष्ट्रीय राइफल एसोसिएशन से आपने कितने धन लिए? एमा का वह भाषण दुनिया भर में वायरल हो गया। 


एमा और उनके साथियों को मासूम सहपाठियों की मौत ने बुरी तरह आहत किया था। एमा कहती हैं, ‘वह हादसा मुझे रोज सिहरा देता है।’ उन्होंने इसके लिए देश के सत्ता-प्रतिष्ठान को झकझोरने का मनसूबा बांधा। 24 मार्च, 2018 को उन्होंने अपने आधा दर्जन साथियों के साथ मिलकर बंदूक-हिंसा के खिलाफ वाशिंगटन डीसी में ‘मार्च फॉर आवर लाइव्स’ नाम से विशाल जुलूस निकाला। पूरे अमेरिका में जगह-जगह 12 लाख से अधिक लोग हाथों में पोस्टर लिए सड़कों पर उमड़ आए। इसे अमेरिका के ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शनों में गिना गया। इसका असर हुआ। फ्लोरिडा की विधायिका ने नया कानून बनाया और तमाम प्रावधानों के साथ घातक हथियार खरीदारों की उम्र न्यूनतम 21 साल कर दी। 

लेकिन एमा और उनके दोस्तों की बंदूकर्-ंहसा विरोधी मुहिम दक्षिणपंथी समूह के नेताओं को रास नहीं आई। उन्होंने एमा के ऊपर न सिर्फ नस्लीय टिप्पणियां कीं, उनके रंग-रूप और चमड़ी को लेकर हमला किया, बल्कि यौन रुझान तक को निशाना बनाया। रिपब्लिक सांसद स्टीव किंग ने उनके पिता के क्यूबाई मूल की आड़ में उनकी राष्ट्र-निष्ठा पर प्रहार किया, मगर एमा और उनके साथी इससे विचलित नहीं हुए और आज वह दुनिया भर में बंदूक-हिंसा के खिलाफ एक सशक्त आवाज बन चुकी हैं। 


11 नवंबर, 1999 को पैदा हुईं एमा गोंजालिस पार्कलैंड, फ्लोरिडा में ही पली-बढ़ी। उनकी मां गणित की शिक्षिका हैं, जबकि पिता साइबर सुरक्षा मामलों के वकील। एमा से बड़े दो भाई भी हैं। लेकिन एमा ने अपने सारे फैसले अपनी समझ से किए।  आज एमा को 16 लाख लोग ट्विटर पर फॉलो करते हैं। अमेरिकी मीडिया कंपनी वेराइटी  ने साल 2018 में ‘पावर ऑफ वूमन’ सम्मान के लिए जिन पांच महिलाओं को चुना, उनमें से एक नाम एमा गोंजालिस का भी था। एक अन्य पत्रिका वूम  ने साल 2018 की सौ प्रभावशाली हस्तियों में एमा का 10वें पायदान पर बिठाया।
 

प्रस्तुति : चंद्रकांत सिंह
 

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  • Web Title:Women Power and Emma Gonzalez story