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परेशानियों ने दी लड़ने की ताकत

जयम्मा भंडारी

आंध्र प्रदेश की रहने वाली जयम्मा को कभी मां-बाप का प्यार नसीब नहीं हुआ। तीन साल की थीं जब माता-पिता चल बसे। अब सवाल था इस अनाथ बच्ची को कौन पालेगा? कोई रिश्तेदार यह जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं था। आखिरकार दूर रिश्ते के एक चाचा को उन पर दया आ गई। वह हैदराबाद से करीब 300 किलोमीटर दूर नलगोंडा इलाके में रहते थे। 
जयम्मा चाचा के संग रहने लगीं। शुरू से ही परिवार में उन्हें बेगाने होने का एहसास कराया गया। बाकी बच्चों की तरह उन्हें कभी शरारत करने और खेलने-कूदने का मौका नहीं मिला। चाचा की गरीबी ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दीं। स्कूल जाना चाहती थीं, लेकिन उनकी यह चाहत पूरी न हो सकी। 15 साल की हुईं, तो चाचा उनके लिए दूल्हा खोजने लगे। वैसे उस इलाके में इस उम्र की लड़कियों की शादी आम बात थी। इसलिए जयम्मा के पास शादी का विरोध करने की कोई वजह नहीं थी। 
सोलह साल की उम्र में हैदराबाद के एक युवक के संग उनकी शादी हो गई। जयम्मा को लगा, शायद अब उनके दुख कम होंगे। नई खुशियों की उम्मीद के साथ ससुराल की दहलीज पर कदम रखा। कुछ दिन तो ठीक चला, पर इसके बाद पति ने रंग दिखाने शुरू कर दिए। पति ज्यादा पढ़ा-लिखा नहीं था। वह काम-धंधा भी नहीं करता था। पैसे को लेकर घर में झगड़े होने लगे। जयम्मा भी पढ़ी-लिखी नहीं थी, इसलिए नौकरी नहीं कर सकती थीं। 
पति ने अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए उन्हें देह व्यापार में धकेल दिया। वह यह काम नहीं करना चाहती थीं। उन्होंने पति से बहुत मिन्नतें कीं। वह मेहनत-मजदूरी करने को तैयार थीं, पर पति को लगता था कि मजदूरी से जिंदगी नहीं बदलेगी। वह गरीबी से छुटकारा चाहता था। अच्छी जिंदगी के लिए उसे देह व्यापार सबसे आसान रास्ता लगा। जयम्मा ने विरोध किया, तो उसने उन्हें खूब पीटा। घर से निकालने की धमकी भी दी। जयम्मा कहती हैं, मैं कहां जाती? मायके में भी ठिकाना नहीं था। मजबूरी में पति की बात माननी पड़ी। मैं असहाय थी, पर मेरे मन में बड़ा आक्रोश था उसके प्रति। 
दिन बीतने लगे। इस बीच वह एक बेटी की मां बनीं। वह उस अंधेरी जिंदगी से छुटकारा पाने को बेताब थीं, पर कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था। कई बार लगता था कि शरीर के साथ मानो उनकी आत्मा को भी बेच दिया गया है। वह घुट-घुटकर जी रही थीं, लेकिन पति को उनकी भावनाओं की जरा भी परवाह नहीं थी। कई बार जयम्मा के मन में जान देने का ख्याल आया, पर बेटी का ख्याल कर मन बदल लिया। वह जानती थीं कि अगर उन्होंने आत्महत्या कर ली, तो पति बेटी को भी इस धंधे में धकेल देगा। बेटी के लिए उन्होंने संघर्ष जारी रखा। फिर एक दिन वह गैर-सरकारी संगठन के संपर्क में आईं। वह संगठन महिला सेक्स वर्कर के लिए काम करता था। संगठन के अधिकारी ने उन्हें देह व्यापार छोड़कर महिलाओं को जागृत करने को कहा। जयम्मा तुरंत राजी हो गईं।
जिंदगी बदलने लगी।  2012 उन्होंने पति को छोड़ दिया और बेटी के संग अलग रहने लगीं। अब उनका मकसद बाकी महिलाओं को दलदल से बाहर निकालना था। सेक्स वर्करों का भरोसा जीतना बड़ी चुनौती थी। वे तमाम सवाल पूछती थीं। जैसे, अगर हम कमाएंगे नहीं, तो खाएंगे क्या? समाज हमें कभी स्वीकार करेगा? जयम्मा कहती हैं, महिलाओं को समझाना आसान नहीं था। उन्हें समाज के तिरस्कार की चिंता थी। उन्हें रोजी-रोटी की भी फिक्र थी। उन्हें मुख्यधारा में लाना कठिन था, पर हमने अपना अभियान जारी रखा।  
एक साल बाद जयम्मा ने सेक्स वर्कर की मदद के लिए चैतन्य महिला मंडल बनाया। उनकी संस्था मलिन बस्तियों में जाकर सेक्स वर्करों को जागरूक करने लगी। जो महिलाएं मजबूरी में देह व्यापार में शामिल हैं, उन्हें वह कानूनी मदद मुहैया कराती हैं। उनकी रोजी-रोटी चलती रहे और वे अपने बच्चों को अच्छी जिंदगी दे सकें, इसके लिए उनकी संस्था उन्हें स्वरोजगार शुरू करने में मदद करती है। सेक्स वर्कर के बच्चों को उत्पीड़न से बचाना दूसरी बड़ी चुनौती थी। उन्होंने 2011 में हैप्पी होम नामक सेंटर खोला। सेंटर में बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ उनके रहने-खाने का इंतजाम किया गया। जयम्मा कहती हैं, हम अपने सेंटर में न सिर्फ बच्चों को पढ़ाते हैं, बल्कि उनकी सुरक्षा का पूरा ध्यान भी रखते हैं, ताकि शरारती तत्व उन्हें गुमराह न कर सकें। सेंटर के तमाम बच्चे टीचर, डॉक्टर और इंजीनियर बनने का सपना देख रहे हैं। उनका सपना हमारी उम्मीद है। 
जयम्मा ने करीब पांच हजार महिला सेक्स वर्कर की जिंदगी बदली है। करीब एक हजार सेक्स वर्कर को अपने पांव पर खड़े होने में मदद की है। सेक्स वर्करों के करीब साढ़े तीन हजार बच्चों को वोकेशनल ट्रेनिंग दिलवाई, ताकि वे स्वरोजगार शुरू कर सकें। ये बच्चे उन्हें अम्मा कहते हैं। 2017 में कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री ने उन्हें सम्मानित किया। इस साल राष्ट्रपति ने नारी शक्ति अवॉर्ड से नवाजा है। 

 प्रस्तुति: मीना त्रिवेदी

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  • Web Title:Troubles gave the strength to fight