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बेटियों को बालिका वधु मत बनाइए

शेरी जॉनसन, सामाजिक कार्यकर्ता

शेरी अपनी मां के संग फ्लोरिडा के टेंपा सिटी में रहती थीं। उनका घर चर्च के करीब था। परिवार में उनके और मां के अलावा और कोई नहीं था। उन्हें कभी पता नहीं चला कि उनके पिता कौन हैं और वह कहां रहते हैं? 

मां चर्च के नियमों से बंधी थीं। रोजाना चर्च में सर्विस करना अनिवार्य था उनके लिए। आसपास रहने वाले सभी लोग अश्वेत थे। दुश्वारियों भरे दिन थे। मां की कमाई पर्याप्त नहीं थी। शेरी के दोपहर के खाने का इंतजाम उनकी मौसी करती थीं। मौसी का घर पादरी के घर के करीब था। एक दिन पादरी ने शेरी को खाना खिलाने के बहाने अपने कमरे में बुलाया। तब  वह आठ साल की थीं। कमरे के अंदर जाते ही उन पर कहर टूट पड़ा। कमरे से बाहर निकलीं, तो शरीर में तेज दर्द महसूस हुआ। कपड़ों पर खून लगा था। मां को बताया, तो वह मानने को तैयार ही नहीं हुईं कि पादरी गलत कर सकते हैं। 
नन्ही शेरी सहमी-सहमी सी रहने लगीं। पादरी के हौसले बुलंद हो चुके थे। उसने कई बार बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। इस बीच मौके का फायदा उठाकर पादरी के एक सहकर्मी ने भी उनका शारीरिक शोषण किया। शेरी ने जब भी किसी को इस बारे में कुछ बताने की कोशिश की, तो उन्हें डांटकर चुप करा दिया गया। इस तरह दो साल बीत गए। अब वह कक्षा पांच में पढ़ रही थीं। एक दिन उन्हें स्कूल के मेडिकल रूम में बुलाया गया। वहां बच्चों का टीकाकरण होना था। नर्स ने उनका चेकअप किया और वापस क्लास में जाने को कहा। थोड़ी देर बाद उन्हें फिर क्लास से बाहर बुलाया गया। सामने मां खड़ी थीं। उन्होंने डांटते हुए कहा, तुम मां बनने वाली हो, तुमने किसके साथ गलत काम किया है? शेरी ने रोते हुए कहा, मां, मैंने आपसे बताया था, पर आपने मेरा यकीन नहीं किया। 

अजीब बात यह थी कि इस खुलासे के बाद मां ने आरोपी पर सवाल उठाने की बजाय चर्च के आंगन में खड़े होकर कहा कि वह अपनी बेटी की हरकत पर शर्मिंदा हैं। शायद उन पर ऐसा करने का दबाव रहा होगा। यही नहीं, उन्होंने बेटी को प्रसव के लिए अकेले अस्पताल भेज दिया। फरवरी 1970 में मात्र दस साल की उम्र में शेरी एक बच्चे की मां बन गईं। बच्चे के जन्म के बाद समाज कल्याण अधिकारी उनसे पूछताछ करने आए। उन्हें सच बताने से रोका गया। मां ने आनन-फानन में दुष्कर्म करने वाले कनिष्ठ पादरी के साथ उनका रिश्ता तय कर दिया। तब वह 11 साल की थीं और दूल्हा 20 साल का। 29 मार्च, 1971 को उनकी शादी हो गई।

शादी के बाद जिंदगी नरक बन गई। दिन भर घर में काम करना पड़ता और रात में पति का उत्पीड़न सहना पड़ता। जब उनकी हमउम्र बच्चियां गुड्डे-गुड़ियों से खेल रही थीं, तब वह अपने बच्चे को पालने की जद्दोजहद कर रही थीं। उन्हें परिवार नियोजन के बारे में कुछ पता नहीं था। शादी के बाद हर साल वह एक बच्चे की मां बनीं। 17 साल की उम्र में छह बच्चों की मां बन गईं। शेरी कहती हैं, पति ने मेरे साथ कभी अच्छा व्यवहार नहीं किया। जब मैं गर्भवती हो जाती थी, तब मुझे मायके भेज देता था। बच्चा पैदा होने के बाद घर लौटती, तो फिर उत्पीड़न शुरू हो जाता। तब मेरे अंदर इतनी हिम्मत नहीं थी कि उसका विरोध कर पाती।

उत्पीड़न की हदें पार हो चुकी थीं। 19 साल की उम्र में उन्होंने तलाक लेने का फैसला लिया। पर राहत नसीब नहीं हुई। छह बच्चों को पालने की मजबूरी और समाज के दबाव के चलते दूसरी शादी करनी पड़ी। दूसरा पति उनसे 18 साल बड़ा था। वह भी क्रूर निकला। आए दिन शेरी की पिटाई करता। दूसरे पति से तीन बच्चे पैदा हुए। 27 साल की उम्र में वह नौ बच्चों की मां बन चुकी थीं। शेरी कहती हैं, धैर्य की सीमा खत्म हो चुकी थी। मन में आया जान दे दूं। मगर बच्चों का ख्याल आ गया। 

फिर उन्होंने मां के घर से दूर जाने का फैसला किया। वह दूसरे इलाके में रहने लगीं। वहां जिसने भी उनकी कहानी सुनी, दंग रह गया। पहली बार उन्हें लोगों की सहानुभुति मिली। जिंदगी बदलने लगी। शेरी दिव्यांग बच्चों की देखरेख करनी लगीं। 2012 में उन्होंने  बाल विवाह के खिलाफ कानून बनाने की मांग उठाई। उनकी कहानी लोगों के लिए प्रेरणा बन गई। उन्होंने एक एनजीओ बनाया। जगह-जगह जाकर लोगों को बाल विवाह के बारे में जागरूक करने लगीं। इस बीच फ्रैंकलिन अकेडमी से हाईस्कूल का डिप्लोमा भी किया। उनकी मुहिम को जनता का पूरा साथ मिला। पूरे फ्लोरिडा में बाल विवाह के खिलाफ कानून बनाने की मांग जोर पकड़ने लगी। 2014 में कानून संबंधी प्रस्ताव तैयार हुआ। 

हाल में फ्लोरिडा की राज्य सीनेट में बाल विवाह निरोध बिल को मंजूरी मिल गई। इसे प्रतिनिधि सभा में पेश किया जाएगा। बिल के मुताबिक, अब 18 साल से कम उम्र के लड़के-लड़कियों की शादी गैरकानूनी होगी।  58 साल की शैरी कहती हैं, मैंने बाल विवाह का दर्द सहा है। मैं जानती हूं कि एक बच्ची को कितना कुछ सहना पड़ता है। मैं चाहती हूं कि मेरे देश में अब किसी बच्ची के साथ यह अत्याचार न हो। -प्रस्तुति: मीना त्रिवेदी

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  • Web Title:Sheri Johnson article in hindustan on 11 february