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जब तक जिऊंगी, पढ़ती रहूंगी

कार्तियानी अम्मा, साक्षरता मिशन टॉपर

केरल के अलपुझा जिले की रहने वाली कार्तियानी अम्मा को बचपन से पढ़ाई-लिखाई का शौक था। पड़ोस के बच्चों को स्कूल जाते देखकर उनका मन करता था कि वह भी पढ़ाई करें। पर घर के हालात ऐसे नहीं थे कि माता-पिता उन्हें स्कूल भेज पाते। खेलने-कूदने की उम्र में उन्हें पेट पालने के लिए दूसरों के घरों में काम करना पड़ा। कुछ दिनों तक तो मंदिर में सफाईकर्मी का भी काम किया। 

बचपन कड़े संघर्ष में बीता। पिता चाहते थे कि जल्द ही बेटी के हाथ पीले कर दिए जाएं। लिहाजा 13 साल की उम्र में उनकी शादी कर दी गई। पिता को उम्मीद थी कि बेटी को ससुराल में जरूर सुख नसीब होगा। पर शादी के बाद भी कार्तियानी की जिंदगी नहीं बदली। पति पढ़े-लिखे नहीं थे। किसी तरह मेहनत-मजदूरी करके संयुक्त परिवार का खर्च चलता था। बहुत कम उम्र में वह छह बच्चों की मां बन गईं। पति की कमाई परिवार का पेट पालने के लिए काफी नहीं थी। शुरुआत में तो वह घर से बाहर नहीं निकलीं, पर बाद में बच्चों की परवरिश के लिए उन्हें काम करना पड़ा। पढ़ी-लिखी नहीं थीं, इसलिए  मेहनत-मजदूरी की। दूसरों के घरों में झाड़ू-पोंछा किया, बच्चों की देखभाल का काम भी किया। 

कार्तियानी शुरू से मेहनती थीं। वह चाहती थीं कि उनके बच्चे पढ़-लिखकर काबिल बनें, पर गरीबी के कारण यह संभव न हो सका। हालात तब और बिगड़ने लगे, जब पति को बीमारी लग गई। जब पेट भर खाना नसीब न हो, तब इलाज के लिए पैसा कहां से लातीं? पति के बीमार होने के बाद उन पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा। कोई नहीं था मदद करने वाला। स्वाभिमानी कार्तियानी ने कभी किसी के सामने हाथ नहीं फैलाया। कुछ दिनों के बाद पति चल बसे। पति की मौत के बाद वह अकेली हो गईं। पर उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। अकेले परिवार की जिम्मेदारी संभाल ली। बच्चों की शादियां कीं। उनके मन में हमेशा से यह बात थी कि अगर वह पढ़ी-लिखी होतीं, तो जिंदगी बेहतर होती। 

पिछले कुछ साल से वह अपनी बेटी और नाती-पोतों के संग रह रही हैं। इस बीच उनके इलाके में केरल सरकार की तरफ से साक्षरता कार्यक्रम शुरू हुआ। अभियान के तहत गांव के बुजुर्गों को पढ़ाने के लिए क्लास लगने लगीं। कार्तियानी ने 60 साल की बेटी अमीनीम्मा को दोबारा पढ़ाई शुरू करने लिए प्रेरित किया। अमीनीम्मा की पढ़ाई बीच में छूट गई थी। बेटी को पढ़ता देख उन्हें बड़ा अच्छा लगा। उनकी बेटी ने फस्र्ट क्लास से दसवीं की परीक्षा पास की। बेटी का परीक्षा परिणाम देखकर उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। जब बेटी को दसवीं पास का सर्टिफिकेट मिला, तो मां की आंखों में आंसू थे। उन्होंने बेटी को समझाते हुए कहा, देर से ही सही, तूने दसवीं पास कर ली। मैं बहुत खुश हूं। तू अब 12वीं की पढ़ाई कर। 

कार्तियानी अच्छी तरह समझ चुकी थीं कि पढ़ाई की उम्र नहीं होती। जब भी घर में पोते-पोती पढ़ाई करते, वह उनकी किताबें पलटने लगतीं। मन में गहरी टीस थी कि काश, किताबों में लिखी बातें मैं भी पढ़ पाती! तभी उन्हें ख्याल आया, क्यों न मैं भी पढ़ाई शुरू करूं? 90 साल की उम्र में वह अक्षर पहचानने की कोशिश करने लगीं। यह वाकया इस साल जनवरी का है। अब वह 96 साल की हो चुकी थीं। साक्षरता टीम उनके घर पहुंची। टीम ने उनसे पूछा, अम्मा क्या आप पढ़ना चाहेंगी? उन्होंने झट से हां कह दी। साक्षरता मिशन के तहत उनका पंजीकरण हो गया। हालांकि उनकी उम्र को देखते हुए उन्हें क्लास में बुलाने की बजाय टीचर उनके घर आने लगी। कार्तियानी कहती हैं, मुझे पढ़ने में खूब मजा आता है। जब तक मैं जिऊंगी, पढ़ती रहूंगी। आजकल मैं अंग्रेजी सीख रही हूं।  

कार्तियानी के अंदर गजब का उत्साह था। उन्होंने बहुत जल्दी लिखना-पढ़ना सीख लिया। मलयालम भाषा के अलावा उन्होंने गणित का जोड़-घटाव भी सीखा। टीचर एक घंटे की क्लास लेती थी, जबकि वह अपने मन से घंटों पढ़ती रहती थीं। कुछ लोगों ने कहा कि इस उम्र में पढ़ने से क्या होगा? पर उनका उत्साह कम नहीं हुआ। उनकी टीचर सती के कहती हैं, अम्मा में गजब का उत्साह है। वह बहुत जल्दी सीख जाती हैं। उनकी याददाश्त भी अच्छी है। इस उम्र में उनकी ऊर्जा देखकर हमें प्रेरणा मिलती है। पिछले महीने वह साक्षरता परीक्षा में बैठीं। पूरे राज्य में करीब 43 हजार बुजुर्ग इस परीक्षा में शामिल हुए। 

पिछले बुधवार को जब परीक्षा परिणाम आया, तो सब चौंक गए। कार्तियानी ने 100 में 98 अंक हासिल करके पूरे राज्य में टॉप किया। यह खबर फैलते ही उनका नाम सुर्खियों में छा गया। केरल के मुख्यमंत्री ने राजधानी तिरुवनंपुरम बुलाकर उन्हें सम्मानित किया। वहां मौजूद अधिकारियों से अम्मा ने कहा कि वह कंप्यूटर सीखना चाहती हैं, ताकि नौकरी कर सकें। कार्तियानी कहती हैं, मैंने बहुत पढ़ाई की थी, पर परीक्षा में बहुत कम सवाल पूछे गए। मैं हैरान हूं कि मुझे 98 अंक ही मिले। पता नहीं मेरे दो नंबर कैसे कट गए? अगली बार मैं सौ में सौ अंक लाऊंगी। प्रस्तुति: मीना त्रिवेदी

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  • Web Title:Kartiani Amma article in hIndustan on 04 november