DA Image
29 फरवरी, 2020|1:10|IST

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

बच्चों की डॉक्टर और माओं की मां

कहते हैं कि ईश्वर खुद धरती पर नहीं आ सकता था, इसलिए उसने मां बनाया। इस एक शब्द के बारे में दुनिया की तमाम जुबानों में न जाने कितने साहित्य रचे गए, पर दीगर लोगों ने अपनी करनी से इसे मानीखेज बनाया। डॉक्टर अर्मिदा फर्नांडीस ने पेशे के तहत ही नहीं, दिल से इंसानियत की खिदमत की है। सन् 1977 में वह एक नौजवान शिशु विशेषज्ञ व नियोनैटोलॉजिस्ट थीं। उसी समय उन्हें मुंबई के सायन मुनिसिपल हॉस्पिटल की आईसीयू में नवजात बच्चों की देखभाल का प्रभारी बनाया गया। 
उन दिनों आईसीयू के बाहर एक अजीब-सा नजारा पसरा मिलता। टूटे सपनों और बिखरी उम्मीदों की लाश कलेजे से सटाकर बिलखती माओं की आवाजें मानो पूरे गलियारे का दिल चाक कर देती थीं। बड़ी संख्या में नवजात आते और डॉक्टर उन्हें मरा हुआ घोषित करने को विवश होते। अर्मिदा उन दिनों को याद करके आज भी मर्माहत हो जाती हैं- ‘तब आईसीयू में अक्सर समय से पहले पैदा हुए शिशुओं को लाया जाता था और उनमें से 70 फीसदी की मौत पहले ही हो चुकी होती। मैंने अपने स्टाफ से कहा कि इतनी बड़ी संख्या में बच्चों की मौत के पीछे कुछ तो वजह है, हमें उन कारणों तक जल्द से जल्द पहुंचना होगा।’
कारण पता चला। खून का संक्रमण बच्चों की जिंदगियां लील रहा था। अर्मिदा को संदेह हुआ कि आर्ईसीयू की गंदगी की वजह से ही यह संक्रमण फैल रहा है। उन्होंने वहां के सारे इन्क्यूबेटर बाहर निकलवा दिए, पाउडर वाला दूध और बोतलें फिंकवाईं, अन्य तमाम चीजें भी हटवा दीं। मगर एक और उपाय के लिए उन्हें अस्पताल प्रशासन को कुछ नाराज करना पड़ा। दरअसल, आईसीयू में माओं का प्रवेश प्रतिबंधित था। लेकिन अर्मिदा ने माओं को नर्स की भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया। वह कहती हैं, ‘मैंने हरेक मां से कहा कि आप खुद नर्स की भूमिका में आइए। मैंने महसूस किया कि बच्चे अपनी मां के दुग्धपान, स्पर्श, देखरेख में बच रहे हैं। मैंने माओं को इस बात के लिए भी राजी किया कि वे अनाथ बच्चों को भी दूध पिलाएं। मैंने ऐसे कई नियम बदले, जिनसे अस्पताल प्रशासन पर कोई आर्थिक भार न पडे़ और बेहतर नतीजे हासिल किए जा सकें।’ 
दरअसल, ऑक्सफोर्ड में एक फेलोशिप के दौरान उन्होंने देखा था कि किस तरह वहां का अस्पताल प्रशासन मानव दुग्ध इकट्ठा करता है, उसे पैस्चराइज करता है और फिर नवजात शिशुओं को पिलाता है। वह भारत में यही चाहती थीं। उनकी इस दिली चाहत को ऊपर वाले ने भी सुना और उन्हें व उनकी टीम को ताज समूह से माली इमदाद हासिल हो गई। और इस तरह एशिया का पहला मानव दुग्ध बैंक 1989 में सायन हॉस्पिटल में वजूद में आ सका।   
अर्मिदा का यकीन सही साबित हुआ। वहां शिशु मृत्यु-दर में भारी गिरावट आई। उनके प्रभार संभालते समय जो दर 70 प्रतिशत थी, वह नब्बे के दशक तक 12 प्रतिशत तक आ गई थी। पर इस पूरे दौर में उनका यह एहसास अधिक मजबूत होता गया कि नवजातों को बचाने में अस्पतालों की भूमिका उनके अहाते से शुरू होती है, जबकि इसका इलाज तो कहीं और से शुरू होता है। जाहिर है, उन्हें इसके लिए उन जगहों पर पहुंचना पड़ता। धारावी की मलिन बस्तियों से उन्होंने शुरुआत की। अपने पीएचडी छात्रों के साथ वह हफ्ते में एक दिन वहां जातीं और गर्भवती औरतों को साफ-सफाई व टीकाकरण के बारे में समझातीं। कुछ ही दिनों में अर्मिदा को यह लग गया कि प्रभावशाली पहल के लिए उन्हें और वक्त देना पड़ेगा।
कुछ शिशु विशेषज्ञों और अन्य डॉक्टरों के साथ मिलकर उन्होंने 1999 में स्नेहा नामक गैर-सरकारी संस्था की शुरुआत की। यह संस्था मुंबई की दर्जन भर नगरपालिकाओं के स्लमों में बच्चों और गर्भवती स्त्रियों की सेहत के लिए काम कर रही है। इसके लगभग 400 कर्मचारी न सिर्फ स्वास्थ्य सेवा में जुटे हैं, बल्कि घरेलू हिंसा से स्त्रियों के बचाव और कुपोषण से जंग में भी सक्रिय हैं।
अर्मिदा की जिंदगी को एक नया मकसद 2013 में मिला। उस साल उनकी इकलौती संतान रोमिला स्तन कैंसर के कारण दुनिया से विदा हो गई। बेटी की बीमारी का साहस के साथ मुकाबला करते उन्होंने पाया कि कैंसर पीड़ितों को मदद की काफी दरकार है। वह कहती हैैं, ‘सिर्फ आर्थिक मदद की बात नहीं है। कैंसर पीड़ितों और उनके परिजनों को भावनात्मक मदद की बहुत जरूरत है। उन्हें ढाढस दीजिए, संवेदना से सुनिए।’ बेटी की स्मृति में अर्मिदा ने 2017 में होली फैमिली हॉस्पिटल में रोमिला पैलीएटिव सेंटर की शुरुआत की। यह सेंटर 700 से अधिक कैंसर पीड़ितों और उनके परिजनों को रिहाइश मुहैया कराने के साथ-साथ उनकी भावनात्मक मदद भी करता है। 
एक वक्त था, अर्मिदा गांवों में गरीबों का इलाज करना चाहती थीं, तब उनके डॉक्टर पति ने कहा था, मुंबई में गरीबों की कमी नहीं। उन्हें भी तुम्हारी जरूरत है। आज उनकी संस्था स्नेहा से ढाई लाख से अधिक लोग लाभ उठा रहे हैं। 
प्रस्तुति :  चंद्रकांत सिंह

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:jina isi ka naam hai hindustan column on 5 january