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बिन हाथों के भरी उड़ान

जेसिका का जन्म अमेरिका के अरिजोना प्रांत के एक गांव में हुआ था। जन्म के बाद जब नर्स ने देखा, तो अवाक रह गई। इस बच्ची के दोनों हाथ नहीं थे। समझ में नहीं आया कि उनकी मां को क्या बताएं? कैसे कहें कि आपने एक दिव्यांग बेटी को जन्म दिया है?
मम्मी और पापा ने जब पहली बार अपनी बच्ची को देखा, तो उन्हें सदमा लगा, लेकिन उन्होंने तय कर लिया कि वे अपनी बेटी को कभी हीन भावना का शिकार नहीं होने देंगे। वे कभी नहीं चाहते थे कि लोग उनकी बेटी पर दया करें। बड़े प्यार से उनकी परवरिश की गई। मां उनका खास ख्याल रखती थीं। हाथ न होने की वजह से बेटी को तकलीफ न हो, इसलिए उनके कृत्रिम हाथ लगवाए गए, लेकिन जेसिका उन हाथों के साथ सहज नहीं थीं। वह धीरे-धीरे अपने सारे काम पांव से करने लगीं। फिर चाहे वह किताब उठाना हो या घर का कोई अन्य काम।
जेसिका कहती हैं, जन्म से ही हाथ नहीं थे, इसलिए मैंने इनके बिना जीना सीख लिया। प्रकृति आपको सब कुछ सिखा देती है। जब स्कूल जाना शुरू किया, तो बड़ी मुश्किल आई। क्लास में पढ़ने वाले बच्चे उन्हें अजीब नजरों से देखते थे। पर मम्मी-पापा ने हमेशा उनका हौसला बढ़ाया। इस दौरान उन्होंने अपने पैरों से बालों में कंघी करना और नहाना आदि सीख लिया। 14 साल की हुईं, तो उन्होंने कृत्रिम हाथ का इस्तेमाल करना पूरी तरह बंद कर दिया। वह हर काम पैरों से करने लगीं। जेसिका कहती हैं, लोग मुझे अजीब नजरों से घूरते थे, लेकिन मैंने कभी अपने अंदर हीन भावना नहीं आने दी।
स्कूल के दिनों से वह डांस में हिस्सा लेने लगीं। यही नहीं, पैरों के सहारे वह कराटे चैंपियन बनीं। उन्होंने घुड़सवारी और स्कूबा डाइविंग भी सीखी। दुनिया इस दिव्यांग लड़की का जज्बा देखकर दंग थी। उन्होंने मनोविज्ञान में स्नातक डिग्री हासिल की। जेसिका कहती हैं, मैंने कभी यह नहीं कहा कि यह काम मैं नहीं कर सकती, क्योंकि मेरे हाथ नहीं हैं। मुझे हमेशा लगता था कि मैं सब कुछ कर सकती हूं। मैं दुनिया में किसी से कम नहीं हूं।
समय के साथ जेसिका के अंदर सब कुछ सीखने का जूनून बढ़ता गया। वह हर वो काम करना चाहती थीं, जो दो हाथ वाले इंसान करते हैं। वह पैरों से कार चलाने लगीं। उन्होंने पैरों से टाइपिंग सीखी। यह सिर्फ सीखने भर के लिए नहीं था। जब वह पैरों की उंगलियों से टाइपिंग करती थीं, तो लोगों को यकीन नहीं होता था। उनकी टाइपिंग स्पीड प्रति मिनट 25 शब्द है। उन्होंने कई रिकॉर्ड अपने नाम किए। 
जेसिका अब 25 साल की हो चुकी थीं। एक दिन उन्होंने सोचा कि ऐसा कौन-सा काम है, जो मैं नहीं कर सकती और दो हाथ वाले इंसान कर सकते हैं। तब मन में आया कि वह हवाई जहाज नहीं उड़ा सकतीं। बिना हाथ के हवा में सैर करना खतरे से खाली नहीं था, लेकिन मन में ख्वाहिश थी कि एक दिन पैरों से हवाई जहाज उड़ाते हुए आसमान में सैर की जाए। तब उन्हें लगता था कि यह असंभव है।  
इस बीच फाइटर प्लेन के एक पायलट से उनकी मुलाकात हुई। वह जन-कल्याण के लिए काम करते थे। उन्होंने जेसिका से पूछा, क्या तुम यह प्लेन उड़ाना चाहोगी? पायलट ने उनसे दोबारा कहा, एक बार कोशिश करके देखो। इस बार जेसिका को यह बात जम गई। उन्होंने तय कर लिया जहाज उड़ाऊंगी।
जेसिका कहती हैं, मुझे उड़ने से डर लगता था। मैं इस डर पर काबू पाना चाहती थी। मैं आंखें बंद करके कल्पना करने लगी कि मैं एक सुपरवुमेन हूं और हवा में उड़ रही हूं। इस कल्पना ने मेरे मन से सारा डर बाहर निकाल दिया।
पायलट बनने को उन्होंने एक चुनौती के रूप में लिया। उन्हें एक ऐसे जहाज में ट्रेनिंग दी गई, जिसे कंट्रोल करने के लिए केवल दो हाथों की जरूरत थी, पैरों की नहीं। चूंकि उनके हाथ नहीं थे, इसलिए वह पैरों से विमान का नियंत्रण संभालने लगीं। तीन ट्रेनर की निगरानी में उनकी ट्रेनिंग शुरू हुई। उन्होंने पैरों से विमान उड़ाना सीखा। इस काम में उन्हें करीब तीन साल लगे। इस दौरान उन्होंने 89 घंटे उड़ान का अभ्यास किया। इसके बाद उन्हें लाइट वेट विमान उड़ाने का लाइसेंस मिल गया।
जेसिका दुनिया की पहली बिना हाथ वाली महिला हैं, जिन्हें हवाई जहाज उड़ाने का लाइसेंस मिला है। इस वजह से उनका नाम गिनीज बुक ऑफ रिकॉड्र्स में दर्ज किया गया है। जेसिका कहती हैं, जब मेरी ट्रेनिंग शुरू हुई, तो कुछ लोगों ने कहा कि मैं बेवजह खतरा मोल ले रही हूं। इससे मुझे नुकसान हो सकता है। पर ऐसे भी लोग थे, जो लगातार मेरा हौसला बढ़ा रहे थे।
कामयाबी और शोहरत पाने के बाद वह घर बसाना चाहती थीं। उनकी यह ख्वाहिश भी पूरी हुई। उनके दोस्त पैट्रिक चैंबरलेन ने 2012 में उनसे शादी करने का फैसला किया। अब मुश्किल यह थी कि वह सगाई की अंगूठी कैसे पहनेंगी? उनके तो हाथ ही नहीं थे। तब मंगेतर पैट्रिक ने कहा कि वह जेसिका के पांव की उंगली में अंगूठी पहनाएंगे। जाहिर है, उनकी सगाई की तस्वीरें बहुत वायरल हुई थीं।

(प्रस्तुति: मीना त्रिवेदी)

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