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मत छीनो मेरी आजादी

रहाफ मोहम्मद, सऊदी शरणार्थी

रहाफ सऊदी अरब की रहने वाली हैं। उनका जन्म एक संपन्न परिवार में हुआ। पिता लोकल एरिया में टाउन गवर्नर हैं। दस भाई-बहनों वाले इस परिवार में किसी चीज की कमी नहीं थी, पर रहाफ खुश नहीं थीं। परिवार की बाकी बेटियों की तरह उन्हें घर के भीतर बंदिशों में रहना कतई गवारा नहीं था। वह पढ़ना चाहती थीं। अपनी पहचान बनाना चाहती थीं। बचपन से उनके स्वर बागी रहे। तमाम मौकों पर परिवार की रूढ़िवादी परंपराओं का विरोध किया। उन्हें इसका भारी खामियाजा भी भुगतना पड़ा। परिवार के बड़े उनसे खासे नाराज थे। वह पढ़-लिखकर नौकरी करना चाहती थीं। महिलाओं के हक के लिए आवाज उठाना चाहती थीं। उन्हें हदों में रहने की हिदायत दी गई, पर उनके तेवर नहीं बदले। घर की चहारदीवारी केअंदर रहकर ही उन्होंने इंटरनेट के जरिए खुद को दुनिया की तमाम खबरों से बावस्ता रखा। वह जानती थीं कि सऊदी अरब और बाकी पड़ोसी मुल्कों में महिलाओं के क्या हालात हैं? उन्होंने ऐसी महिलाओं के बारे में जानकारी हासिल की, जो अपने हक के लिए संघर्ष कर रही थीं। समय के साथ उनके इरादे पक्के होते गए। उन्हें पता था कि कोई उनकी मदद नहीं करेगा, इसलिए खुद आगे बढ़कर हालात बदलने की ठान ली। 

बात पिछले साल की है। रहाफ 18 साल की होने वाली थीं। परिवारवाले उनके लिए  दूल्हा खोजने लगे। उन्हें लगा, शादी के बाद बेटी के तेवर ठंडे पड़ जाएंगे। पर इसका उल्टा असर हुआ। शादी की बात सुनते ही रहाफ भड़क गईं। साफ कह दिया कि मैं आजादी से जीना चाहती हूं। रहाफ कहती हैं, मुझ पर शादी के लिए दबाव बनाया गया। शारीरिक रूप से प्रताड़ित भी किया गया। मैंने तय कर लिया कि मैं वहां रहूंगी ही नहीं।   
यह वाकया दिसंबर 2018 का है। परिवार नए साल की छुट्टियां मनाने के लिए कुवैत में था। सब नए साल के जश्न में मशगूल थे, पर रहाफ के मन में भारी बेचैनी थी। वह जानती थीं कि सऊदी अरब वापस लौटने के बाद उनके पास शादी करने के सिवाय और कोई चारा नहीं बचेगा। इसलिए वहां से भागने का फैसला किया। हालांकि सबके सामने यही जाहिर किया कि वह बहुत खुश हैं। फिर एक दिन मौका निकालकर एयरपोर्ट पहुंचीं और थाईलैंड जाने वाले हवाई जहाज में बैठ गईं। इससे पहले कि किसी को भनक लगती, जहाज उड़ चुका था। बाद में उन्हें पता चला, तो बेटी के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज करा दी। 

रहाफ का पूरा सफर दहशत में बीता। उनकी योजना बैंकॉक पहुंचकर अगली उड़ान से ऑस्ट्रेलिया जाने की थी। इस बीच सऊदी अरब के विदेश अफसरों को खबर लग चुकी थी कि एक लड़की कुवैत से भागकर बैंकॉक पहुंचने वाली है। यह 5 जनवरी की बात है। जहाज से उतरने के बाद वह एयरपोर्ट स्थित होटल की ओर रवाना हुई ही थीं कि थाई आव्रजन पुलिस आधिकारियों ने उन्हें रोक लिया। उनसे कुछ सवाल पूछे गए और उनका पासपोर्ट जब्त कर लिया गया। इसके बाद होटल जाने दिया गया। 

रहाफ दहशत में थीं। समझ में नहीं आ रहा था किससे मदद मांगें। कुछ देर विचार करने के बाद उन्होंने ट्विटर पर दुनिया के तमाम देशों के नेताओं और मानवाधिकार संगठनों को संदेश भेजते हुए मदद मांगी। एक वीडियो भी पोस्ट किया, जिसमें कहा कि यदि उन्हें जबरन सऊदी अरब भेजा गया, तो उनकी हत्या कर दी जाएगी। देखते-देखते पूरी दुनिया में यह संदेश फैल गया। करीब पांच लाख लोगों ने उनके संदेश को री-ट्वीट किया। लोग कहने लगे कि इस लड़की की मदद की जानी चाहिए। रहाफ कहती हैं, थाई अधिकारी मुझे वापस सऊदी अरब भेजना चाहते थे, पर मुझे पता था कि वापस गई, तो वे मुझे जिंदा नहीं छोड़ेंगे। 

इस बीच थाई पुलिस अधिकारी दोबारा उनसे पूछताछ के लिए होटल रूम तक पहुंचे। पर रहाफ ने मानवाधिकार संगठन के लोगों की मौजूदगी के बिना कमरे से बाहर आने से इनकार कर दिया। दो दिन बीत गए। 7 जनवरी को उन्हें जबरन सऊदी अरब भेजने की तैयारी हो चुकी थी। इस बीच उनका संदेश संयुक्त राष्ट्र हाई कमीशन तक पहुंच चुका था। उसकी पहल पर मानवाधिकार संगठन के बड़े अधिकारी बैंकॉक पहुंचे। रहाफ ने अपने देश जाने से साफ इनकार कर दिया और कहा कि उन्हें किसी ऐसे देश में शरण दी जाए, जहां वह अपनी पढ़ाई पूरी करने के साथ आजादी से जी सकें। 

पूरी दुनिया में इस मामले की चर्चा होने लगी। कनाडा और ऑस्ट्रेलिया उन्हें शरण देने को राजी हो गए, पर रहाफ ने कनाडा जाने का फैसला किया। उधर उनके परिवार ने आधिकारिक तौर पर उनसे सभी रिश्ते खत्म करने का एलान कर दिया। 12 जनवरी को वह टोरंटो पहुंचीं। कनाडा की विदेश मंत्री क्रिस्टिया फ्रीलैंड ने उनका स्वागत करते हुए कहा, यह रहाफ है, कनाडा की नई बहादुर महिला। 
रहाफ कहती हैं, अब मैं अंग्रेजी सीखूंगी, ताकि आगे पढ़ाई कर सकूं। मैं चाहती हूं, हर लड़की को आजादी से जीने का हक मिले। मैं लड़कियों के हक के लिए आवाज उठाऊंगी।
प्रस्तुति: मीना त्रिवेदी 

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