DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

पढ़ते-पढ़ते बनी प्रेरक वक्ता

जान्हवी का अंदाज बचपन से निराला था। उनके पापा ब्रजमोहन पवार हरियाणा के पानीपत के एक गांव में स्कूल टीचर थे। आस-पास के इलाके में ठेठ हरियाणवी बोलने का चलन था। यहां तक कि स्कूल में टीचर भी हरियाणवी अंदाज में र्ही ंहदी बोलते थे, पर नन्ही जान्हवी ने तीन साल की उम्र में ही अंग्रेजी में गिटपिट करना सीख लिया। गांववालों के लिए यह बड़ी अजीब बात थी। 
यह वाकया वर्ष 2007 का है। तब जान्हवी तीन साल की भी नहीं हुई थीं। पापा नर्सरी कक्षा में उनके दाखिले की तैयारी कर रहे थे। उन दिनों वह उसे घर पर अंग्रेजी और्र ंहदी के अक्षर सिखा रहे थे। ब्रजमोहन बताते हैं, वह एक बार में ही अंग्रेजी शब्दों को याद कर लेती थी। तीन साल की उम्र में उसे सैकड़ों अंग्रेजी के शब्द याद हो गए। मैंने उसे अंग्रेजी सीखने के लिए प्रेरित किया। पर कभी नहीं सोचा था कि वह इतनी जल्दी फर्राटेदार अंग्रेजी बोलने लगेगी। 
नर्सरी क्लास में वह कक्षा के बाकी बच्चों से काफी आगे थीं। क्लास की किताबों में ऐसी कोई चीज नहीं, जो उन्हें न आती हो। टीचर बच्ची की प्रतिभा देखकर हैरान थे। इस बीच पापा ने स्कूल प्रबंधन से बात की। उन्होंने कहा कि जब बच्ची को पहले से सब कुछ आता है, तो पूरे साल उसी क्लास में पढ़ाने से क्या फायदा? टीचर ने उन्हें अगली कक्षा में भेजने की सिफारिश की। इस तरह तीन साल की उम्र में ही वह नर्सरी पास करके केजी में आ गईं। इस कक्षा में उम्र के लिहाज से वह सबसे छोटी थीं। यहां भी पढ़ाई के मामले में वह कक्षा में बाकी बच्चों से बहुत आगे थीं। क्लास में जो कुछ पढ़ाया जाता, वह झटपट याद कर लेतीं। जान्हवी कहती हैं, क्लास में हमेशा से मुझसे बड़ी उम्र के बच्चे होते थे। कई बार वे मेरी हंसी उड़ाते थे। कुछ बच्चों को मुझसे ईष्र्या भी होती थी, पर टीचर्स ने हमेशा मेरा हौसला बढ़ाया। 
जान्हवी जब कक्षा एक में थीं, तब उन्होंने शुरुआती एक महीने में ही पूरे साल का कोर्स तैयार कर लिया। अद्र्धवार्षिक परीक्षा के समय उनके लिए वार्षिक परीक्षा के प्रश्न-पत्र तैयार किए गए। उन्होंने सारे प्रश्न-पत्र हल करके सर्वश्रेष्ठ अंक हासिल किए। स्कूल प्रबंधन ने उनकी कॉपी देखी और तय किया गया कि उन्हें कक्षा दो में भेज दिया जाए। उसी साल उन्होंने सीधे कक्षा दो की वार्षिक परीक्षा दी और अच्छे अंक से पास होकर कक्षा तीन में पहुंच गईं। टीचर को हैरानी तब होती थी, जब एक क्लास जंप करने के बाद भी वह नई कक्षा में बाकी बच्चों से आगे निकल जाती थीं। ब्रजमोहन कहते हैं, जान्हवी बहुत एकाग्रचित है। जब उसकी उम्र के बच्चे खेल-कूद में समय बिताते थे, तब वह किताबों में खोई रहती थी। उसने 13 साल की उम्र में 12वीं कक्षा पास कर ली। 
इस बीच पूरे पानीपत में इस पढ़ाकू लड़की की चर्चा होने लगी। लोग उन्हें वंडरगर्ल कहने लगे। जान्हवी कहती हैं, पापा ने मेरे लिए काफी मेहनत की। सीमित कमाई के बावजूद उन्होंने मेरी पढ़ाई में कमी नहीं आने दी। उन्होंने मुझे प्रेरित किया। बेटी की तारीफ सुनकर पापा फूले नहीं समाते थे। ब्रजमोहन कहते हैं, हम ग्रामीण क्षेत्र से हैं। मुझे और मेरी पत्नी को अंग्रेजी बोलनी बिल्कुल नहीं आती है। यहां तक कि उसके स्कूल टीचर भी हरियाणवी स्टाइल र्में ंहदी बोलते थे। पर मैं चाहता था कि मेरी बेटी अंग्रेजी बोले। मैंने गूगल से अंग्रेजी भाषणों के कई वीडियो डाउनलोड करके उसे सुनाए। नौ साल की उम्र में वह आठ अलग-अलग लहजे में अंग्रेजी बोलने लगी। 
उन्हें कई विदेशी चैनलों पर एंर्कंरग करने का मौका दिया गया। जान्हवी ने अमेरिकी, ब्रिटिश और कनाडाई लहजे में अंग्रेजी बोलकर लोगों को अचंभित कर दिया। पानीपत के स्कूल से 12वीं पास करने के बाद पिछले साल वह दिल्ली आ गईं। 14 साल की उम्र में उन्होंने दिल्ली के कॉलेज में दाखिला लिया। इस बीच उन्हें कई प्रेरक हस्तियों के भाषण सुनने का मौका मिला। उन्होंने पापा से कहा कि मैं भी प्रेरक वक्ता बनना चाहती हूं। जान्हवी बताती हैं, पापा ने मुझे कई मशहूर हस्तियों की किताबें लाकर दीं। उन्हें पढ़कर मुझे लगा कि मैं प्रेरक भाषण दे सकती हूं। मुझे हरियाणा में आईएएस अफसरों की एक कॉन्फ्रेंस को संबोधित करने का मौका मिला। वहां सबने मेरे भाषण को बहुत पसंद किया। 
मौजूदा समय में वह दुनिया के 12 अलग-अलग लहजे में अंग्रेजी बोल सकती हैं। सबसे बड़ी खूबी यह है कि जितनी अच्छी अंग्रेजी बोलती हैं, उतनी ही ठेठ हरियाणवी भी। बोलने का अंदाज कुछ ऐसा है कि लगता ही नहीं कि वह सिर्फ 15 साल की हैं। आजकल जान्हवी देश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर प्रेरक भाषण दे रही हैं। उन्हें आठ राज्यों के शिक्षण संस्थानों में छात्रों को संबोधित करने के लिए बुलाया जा चुका है। इस बीच उन्होंने सिविल परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी है। जान्हवी कहती हैं, मेरे पास करियर के तमाम विकल्प हैं, पर मैं आईएएस अफसर बनकर देश की सेवा करना चाहती हूं। पापा भी यही चाहते हैं। मुझे यकीन है कि मैं उनका सपना पूरा कर पाऊंगी।
प्रस्तुति: मीना त्रिवेदी

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:jina isi ka naam hai hindustan column on 17 march