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उसने आंचल से परचम बनाना सीख लिया

loujain alhathloul  saudi human rights activist

पता नहीं, इस नौजवान लड़की ने असरार उल-हक मजाज का नाम सुना है या नहीं, मगर एक ताकतवर निजाम से टकराने के इसके जुनून में मजाज की मशहूर नज्म की नायिका नजर आती है- तिरे माथे पे ये आंचल बहुत ही खूब है लेकिन/ तू इस आंचल से इक परचम बना लेती तो अच्छा था। लुजैन अल-हथलुल नाम है इनका। उम्र के जिस मोड़ पर लड़के-लड़कियां अमूमन रूमानी एहसासों को जीते हैं, लुजैन ने एक अलग ही रास्ते का इंतिखाब किया।

इसी 31 जुलाई को लुजैन ने अपनी जिंदगी के 30 साल पूरे किए हैं। अरब सागर के तटीय शहर जेद्दा में जन्मी लुजैन का खानदान कासिम इलाके का रहने वाला है। यह सऊदी राजशाही के सबसे रूढ़िवादी क्षेत्रों में एक गिना जाता है। संयोग से लुजैन के बचपन का ज्यादातर वक्त यूरोप के खुले माहौल में बीता। ऐसे में, दो बिल्कुल मुख्तलिफ समाजों की इंसानी जिंदगी के फर्क को वह काफी छोटी उम्र से महसूस करती रहीं। इसने उन्हें गहरे प्रभावित किया। एक तरफ, सऊदी अरब की औरतों पर तरह-तरह की पाबंदियां आयद थीं। वे अपनी मर्जी से नौकरी नहीं कर सकती थीं, गाड़ी नहीं चला सकती थीं या किसी मर्द रिश्तेदार को साथ लिए बगैर मुल्क में या उसके बाहर नहीं निकल सकती थीं। दूसरी तरफ, फ्रांस-कनाडा की औरतें, जिन्हें हरेक तरह की आजादी हासिल थी और वे किसी एहसास-ए-कमतरी का शिकार न थीं। 

लुजैन जब यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया से फ्रेंच भाषा और साहित्य में ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रही थीं, तभी सऊदी औरतों के लिए कुछ करने का विचार उनमें जगा। साल 2012 की बात है। उन्होंने ‘कीक’ नामक एप को गौर से देखना शुरू किया। यह एप यूजर्स को 30 सेकंड का वीडियो अपलोड करने की छूट देता है। लुजैन ने यह देखना शुरू किया कि अन्य सऊदी नागरिक इस नेटवर्क पर कैसी-कैसी चीजें अपलोड कर रहे हैं और फिर उनके बारे में ट्विटर पर क्या-क्या प्रतिक्रियाएं हो रही हैं?

एक दिन उन्होंने किसी सऊदी महिला की टिप्पणी पढ़ी कि सऊदी औरतों से उनकी पहचान छीन ली जाती है। इस टिप्पणी ने लुजैन को सोच में डाल दिया। उन्होंने तय कर लिया कि वह औरतों के वजूद का एहसास अपने निजाम और इंतजामिया को कराकर दम लेंगी। लुजैन ने कीक पर बिना हिजाब वाले वीडियो अपलोड करने शुरू किए। इन वीडियो के जरिए वह अपने ख्याल साझा करने लगीं। देखते-देखते उनके वीडियो देखने वालों की तादाद 50 लाख तक पहुंच गई। इसके बाद लुजैन ‘वुमेन टु ड्राइव मूवमेंट’ के विचार के साथ आगे आईं। इस वीडियो के जरिए उन्होंने यह अनुरोध किया कि कार चलाना औरतों की अपनी पसंद का मसला है, जरूरत का नहीं। करीब तीन करोड़ लोगों ने इस वीडियो को देखा।

लेकिन उन पर तंज भी कसे जाने लगे कि खुद तो कनाडा में आराम से पड़ी हैं और सऊदी औरतों की जिंदगी जोखिम में डाल रही हैं। लुजैन पक्के इरादे के साथ 2013 के अक्तूबर में रियाद लौटीं। कहते हैं कि एयरपोर्ट से वालिद की कार खुद चलाकर वह घर तक पहुंचीं और बाद में उनके पिता को गृह मंत्रालय में सफाई पेश करनी पड़ी और वादा करना पड़ा कि उनकी बेटी अब कभी कार नहीं चलाएगी। इसके अगले ही साल स्टैंडिंग कॉमेडियन फहाद अल्बुतैरी से उनका निकाह हो गया। लगा कि अब लुजैन का बागी तेवर नरम पड़ जाएगा। पर ऐसा नहीं हुआ।

दिसंबर 2014 की वह पहली तारीख थी। लुजैन ने संयुक्त अरब अमीरात से गाड़ी चलाकर सऊदी अरब में घुसने की कोशिश की और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। 73 दिनों के बाद उन्हेें रिहा किया गया, मगर रिहाई के वक्त यह लिखवाया गया कि वह औरतों के गाड़ी चलाने के बारे में आगे कोई बात नहीं करेंगी। अक्लमंद लुजैन ने उस शपथ-पत्र में वीडियो से कोई ऐसी बात न करने की हामी भर दी, मगर ट्विटर पर इसके पक्ष में उनकी दलीलें जारी रहीं। बाद में वह औरतों पर मर्दों की गार्जियनशिप के कानून को खत्म कराने के अभियान से भी जुड़ गईं। जिन 14,000 औरतों-मर्दों ने इस बाबत प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को खत लिखा, उनमें लुजैन भी हैं। जाहिर है, वह निजाम की निगाहों में एक बागी बन चुकी थीं।

15 मई, 2018 को उन्हें और नौ अन्य लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। लुजैन को उनके घर से उठाया गया। तब उनके खिलाफ क्या आरोप था, यह किसी को पता न था। फिर शारीरिक, मानसिक, यौन प्रताड़ना का दौर चला। हुकूमत ने इतना दबाव डाला कि पति ने भी उन्हें तलाक दे दिया। पश्चिमी मीडिया ने जब इस मामले को खूब उछाला, तो अब एक साल बाद उनका मुकदमा शुरू हुआ है। इंसाफ किस सूरत में लुजैन के सामने आएगा, कह नहीं सकते, मगर अपने एक बड़े मकसद में वह कामयाब हो चुकी हैं। सऊदी सरकार को औरतों को कार चलाने का हक देना पड़ा। प्रतिष्ठित पत्रिका टाइम  ने लुजैन को इस साल की सौ प्रभावशाली वैश्विक शख्सियतों में शामिल किया है।
प्रस्तुति :  चंद्रकांत सिंह

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  • Web Title:Hindustan Jeena Isi Ka Naam Hai Column 11 August