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फुटपाथ पेंट करने से विश्व कप तक

गेब्रियल जीसस, फुटबॉल खिलाड़ी

घर के हालात ठीक नहीं थे। गेब्रियल के जन्म के तुरंत बाद पापा परिवार से अलग हो गए। बच्चों को पालने की जिम्मेदारी अकेले मां पर आ गई। वह ज्यादा पढ़ी-लिखी नहीं थीं, इसलिए उन्हें अच्छी नौकरी नहीं मिल पाई। वह दूसरों के घरों में साफ-सफाई का काम करने लगीं। 

वह ब्राजील के शहर साओ पाउलो के जार्डिम पेरी इलाके में रहते थे। यह एक गरीब बस्ती थी। यहां ज्यादातर परिवार ऐसे थे, जिन्हें दो जून भरपेट खाना भी नहीं नसीब था। मगर उनकी मां बच्चों की परवरिश को लेकर बहुत संजीदा थीं। गेब्रियल बताते हैं, मां ने कभी हमें भूखा नहीं रहने दिया। वह दिन-रात काम करती थीं, ताकि हम भाई-बहनों को कभी खाने-पीने की कमी न हो। गरीबी के बावजूद उन्होंने हमें पढ़ाया। जगजाहिर है कि ब्राजील के लोग फुटबॉल के दीवाने होते हैं। वहां हर घर में फुटबॉल प्रेमी बसते हैं। गेब्रियल पर भी फुटबॉल का बुखार चढ़ गया। तब वह नौ साल के थे। एक दिन दोस्त के संग पास के लोकल फुटबॉल क्लब पहुंच गए। वहां कोच जोस फ्रांसिस्को से मुलाकात हुई। उन्होंने कोच से पूछा, क्या मैं आपकी फुटबॉल टीम में खेल सकता हूं? कोच को उनका बेबाक अंदाज बड़ा प्यारा लगा। उन्होंने कहा, क्यों नहीं, अगली बार मैं तुम्हें जरूर मौका दूंगा।

फुटबॉल क्लब में खिलाड़ियों को फ्री लंच मिलता था। पड़ोस के बच्चों को यह बात पता थी। गेब्रियल बताते हैं, हमारे कोच बड़े दयालु थे। वह न केवल बच्चों को लंच पैकेट देते थे, बल्कि उन्हें अपनी गाड़ी में बैठाकर घर छोड़ आते थे। क्लब में हफ्ते में दो दिन ट्रेनिंग दी जाती थी। जिस दिन क्लब बंद होता, उस दिन ट्रेनी खिलाड़ी सड़कों पर फुटबॉल खेलते। उन्हें कई बार मोहल्ले की टीम में मौका मिला। गेब्रियल बताते हैं, मोहल्ला-टीम में जीत पर हमें इनाम के तौर पर सैंडविच और सोडा ड्रिंक मिलता था। उन दिनों हमारे लिए यह बड़ी बात थी।  

साल 2010 में उन्हें मेन साओ पाउलो सिटी में जिला टीम के साथ खेलने का मौका मिला। वहां उन्होंने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए कई गोल किए। विरोधी टीम के खिलाड़ियों को यह बात बहुत बुरी लगी। उन्हें एक नए लड़के से हारना कतई मंजूर नहीं था। खेल के बाद उन्होंने गेब्रियल को घेर लिया। गेब्रियल बताते हैं, एक शरारती खिलाड़ी ने मुझसे कहा कि मैं तुम्हारी टांग चीर दूंगा। उन्होंने मुझे खूब पीटा। मैं डर के मारे भागने लगा। मेरे साथियों ने बड़ी मुश्किल से मुझे बचाया। 

उनकी टीम कई टीमों को हराते हुए फाइनल में पहुंच गई। अगले दिन फाइनल मैच था। उस रात तेज तूफान आया। जोर की बारिश हुई और मैदान गीला हो गया। विरोधी टीम के खिलाड़ी संपन्न थे। उनके पास अच्छे जूते थे और शानदार किट भी। जबकि गेब्रियल की टीम के पास साधारण जूते थे। गीले मैदान पर भागते समय उनके खिलाड़ी संतुलन नहीं बना पाए और कई बार गोल बनाने से चूके। वे फाइनल हार गए। पर कोच की नजर लगातार गेब्रियल पर थी। उन्हें यकीन था कि अगर इस नए लड़के को ट्रेनिंग दी जाए, तो यह आने वाले दिनों में एक बेहतरीन फुटबॉलर बन सकता है।  

टूर्नामेंट के बाद साओ पाउलो क्लब ने उन्हें फ्री ट्रेनिंग का ऑफर दिया। क्लब ने कहा कि वह उन्हें फ्री ट्रेनिंग तो देगा, पर रहने-खाने का इंतजाम उन्हें खुद करना होगा। यह सुनकर गेब्रियल उदास हो गए। शहर में रहने का खर्च कैसे उठाएंगे? रोज घर से आते, तो पूरा दिन बस में ही गुजर जाता। जब मां को यह बात पता चली, तो उन्होंने कहा, मैं सब देख लूंगी। तुम सामान पैक करो और ट्रेनिंग की तैयारी करो।  

साल 2013 में वह पलमीरस फुटबॉल क्लब से जुड़ गए। अब फुटबॉल ही उनकी जिंदगी थी। राज्य स्तर के तमाम टूर्नामेंट में उनका प्रदर्शन सर्वश्रेष्ठ रहा। मां बहुत खुश थीं, पर उन्हें बेटे से दूर रहना बहुत खलता था। साल 2014 में साओ पाउलो में ओलपिंक खेल हुए। पूरी दुनिया के खिलाड़ी वहां आने वाले थे। स्वागत की जोरदार तैयारियां चल रही थीं। शहर को बड़े करीने से सजाया जा रहा था। सरकार और आम जनता दिन-रात शहर को खूबसूरत बनाने में जुटे थे। सैकड़ों मजदूरों और कलाकारों को सजावट के काम में लगाया गया। शहर में कामगारों की मांग थी और गेब्रियल को अपने खर्चे के लिए काम की तलाश। उनके पास बस किराये के पैसे भी नहीं होते थे। बार-बार मां से पैसे मांगना उन्हें अच्छा नहीं लगता था। वह भी फुटपाथ को पेंट करने के काम में लग गए।

संघर्ष के बाद कामयाबी का दौर शुरू  हुआ। साल 2015 में उन्हें  सर्वश्रेष्ठ नए खिलाड़ी का खिताब मिला। 2016 में सीजन के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बने। इसी साल उन्होंने समर ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीता। 2017 मे मेनचेस्टर सिटी की तरफ से खेलते हुए प्रीमियर लीग जीती। आजकल वह रूस में चल रहे फीफा वल्र्ड कप में ब्राजील की तरफ से खेल रहे हैं। इन दिनों उनकी 2014 की वह तस्वीर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में छाई हुई है, जब वह नंगे पांव सड़क किनारे फुटपाथ को पेंट कर रहे थे। प्रस्तुति: मीना त्रिवेदी

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  • Web Title:football player Gabriel Jesus article in Hindustan on 24 june