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फुटबॉल ने दी मुझे नई जिंदगी

डेले अली, प्रसिद्ध फुटबॉलर

डेले अपनी मां की तीसरी संतान थे। पहली शादी से मां की दो बेटियां थीं। माता-पिता नाइजीरियाई मूल के थे। साल 1996 में डेले के जन्म के एक हफ्ते बाद ही पापा ब्रिटेन छोड़कर अमेरिका चले गए। मम्मी-पापा के रिश्ते काफी समय से खराब चल रहे थे। बेटे के जन्म के बाद उनके बीच फिर झगड़ा हुआ और उन्होंने अलग होने का फैसला कर लिया। कुछ दिनों बाद पापा ने दूसरी शादी कर ली। इधर मां के पास कमाई का कोई जरिया नहीं था। घर में आर्थिक तंगी हो गई। मां बहुत ज्यादा पढ़ी-लिखी नहीं थीं। वह सफाई का काम करने लगीं। लेकिन उनकी कमाई परिवार के खर्च के लिए पर्याप्त नहीं थी। इसलिए डेले का बचपन काफी दुश्वारियों में बीता। 

जीवन की मुश्किलों ने मां को चिड़चिड़ा बना दिया था। उन्हें शराब की लत लग गई। नशे में बच्चों के प्रति उनका रवैया बहुत आक्रामक हो जाता। हालात बिगड़ते गए। जिंदगी यूं ही बीतने लगी। अब डेले सात साल के हो चुके थे। मां की एक और व्यक्ति से दोस्ती हो गई। दोनों साथ रहने लगे। उस व्यक्ति से उन्हें एक और संतान पैदा हुई। अब घर में चार भाई-बहन थे। कुछ दिनों बाद उससे भी मां का रिश्ता टूट गया। इसके बाद मां और चिड़चिड़ी हो गईं। 

उन दिनों उनका परिवार लंदन से करीब 70 किमी दूर मिल्टन केंस कस्बे में रहता था। वह गरीबों की बस्ती थी। वहां रहने वाले किशोरों में नशे की लत एक बड़ी समस्या थी। पड़ोस में आए दिन झगड़े होते रहते थे। कुछ किशोर छोटे-मोटे अपराध में सक्रिय थे। लेकिन डेले का स्वभाव बाकी बच्चों से बिल्कुल जुदा था। घर के माहौल की वजह से वह उदास रहने लगे। उन्हें परिवार के संग वक्त बिताना अच्छा नहीं लगता था। स्कूल से लौटने के बाद घर में रहने की बजाय वह पार्क में खेलने निकल जाते।
दस साल की उम्र से ही उन्हें फुटबॉल का शौक लग गया। डेले बताते हैं, हमारे पड़ोस में एक पार्क था। मैं वहां खेला करता था। शुरुआत में मैं वहां इसलिए जाता था कि ज्यादा से ज्यादा समय घर से दूर रह सकूं, पर बाद में फुटबॉल मेरा जुनून बन गया। मैं यू-ट्यूब पर बड़े खिलाड़ियों को देखकर सीखने लगा। ग्यारह साल की उम्र में उन्हें सिटी ब्यॉज फुटबॉल क्लब में शामिल होने का मौका मिला। एक दिन अभ्यास के दौरान टीम लीडर माइक डोव की उन पर नजर पड़ी। उन्हें लगा कि यह लड़का तो कमाल का खेलता है। डोव कहते हैं, डेले को न हारने का डर था, न जीतने का इंतजार। बस धुन थी अच्छा खेलने की। यह धुन ही उसकी ताकत थी। मैंने उसकी इस ताकत को निखारने का प्रयास किया। 

इस बीच स्कूल में हैरी नाम के लड़के से उनकी दोस्ती हो गई। उसे भी फुटबॉल का शौक था। दोनों की खूब पटती थी। डेले को लगता था कि दोस्त उनके मन की बात समझता है। वह  उनके घर जाने लगे। हैरी के मम्मी-पापा बडे़ अच्छे स्वभाव के थे। उनके घर जाकर डेले को लगता, काश, मेरा भी ऐसा परिवार होता! 

घर में झगड़े और हंगामे की वजह से डेले आए दिन ट्रेनिंग के लिए लेट हो जाते थे। हैरी भी जानते थे कि उनका दोस्त किन हालात से गुजर रहा है? वह अक्सर उन्हें अपने घर ले जाते, ताकि वह तनाव से बाहर आ सके। अब डेले हफ्ते के तीन दिन दोस्त के घर में बिताने लगे। कुछ दिनों बाद तो महीने में बस एक बार अपने घर जाते थे। बाकी दिन हैरी के घर पर ही रहने लगे। वहां उन्हें बहुत अच्छा लगता था। 

हैरी के माता-पिता उनका बहुत ख्याल रखते थे। 13 साल की उम्र में उन्होंने अपना घर छोड़ दिया। जब डेले ने मां से कहा कि वह दोस्त के संग रहना चाहते हैं, तो वह उदास हो गईं। पर उन्होंने बेटे के इस फैसले का विरोध नहीं किया। मां डेनिस कहती हैं, मैं नहीं चाहती थी कि मेरा बेटा मुझे छोड़कर जाए। पर मैं जानती थी कि मुझसे दूर रहकर ही वह अच्छी जिंदगी जी पाएगा। इसलिए मैंने उसे जाने दिया। हैरी का घर उनके घर से करीब छह मील दूर था। वह नॉर्थ हैंप्टनशायर में रहने लगे। यहां आने के बाद उन्होंने अपना पूरा ध्यान फुटबॉल पर लगा दिया। 2012 में वह पहली बार साउथ फुटबॉल लीग में खेले। तब वह 16 साल के थे।  2013 आते-आते उनकी गिनती बेहरतीन फुटबॉलरों में होने लगी। 2014 में उन्हें अंतरराष्ट्रीय लीग में खेलने का मौका मिला। 2016 में प्लेयर ऑफ द मैच का खिताब मिला। हैरी के माता-पिता ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। वह उनका हर मैच देखने जाते और लौटकर घर पर उनकी जीत का जश्न मनाते। डेले उन्हें अपने माता-पिता की तरह प्यार करने लगे।
डेले कहते हैं, मेरे दोस्त और उसके परिवार ने मेरी बहुत मदद की। उन्हीं लोगों के प्यार की वजह से मैं इस मुकाम पर पहुंचा हूं। इस साल फीफा वल्र्ड कप में वह इंग्लैंड की तरफ से खेले और पहली बार उनकी टीम क्वार्टर फाइनल तक पहुंची। डेले कहते हैं, मुश्किल वक्त में मैंने फुटबॉल को अपनी ताकत बनाया। हर इंसान को कोई न कोई ऐसा मौका जरूर मिलता है। हमें ऐसे मौके को गंवाना नहीं चाहिए। प्रस्तुति: मीना त्रिवेदी

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  • Web Title:famous footballer Dele Alli article in Hindustan on 19 august