ईरान को नहीं मना पाया अमेरिका
अविश्वास के माहौल में हुई बातचीत का यही हश्र होता है। अमेरिका-ईरान वार्ता पर बेशक दुनिया की निगाह बनी हुई थी, लेकिन इन दोनों देशों में जिस तरह के गहरे मतभेद हैं, उनको देखते हुए महज एक बैठक में सहमति बनने की संभावना भी नहीं थी। इस्लामाबाद में यही हुआ है…
अरविंद गुप्ता, पूर्व राजनयिक एवं डायरेक्टर, वीआईएफ
अविश्वास के माहौल में हुई बातचीत का यही हश्र होता है। अमेरिका-ईरान वार्ता पर बेशक दुनिया की निगाह बनी हुई थी, लेकिन इन दोनों देशों में जिस तरह के गहरे मतभेद हैं, उनको देखते हुए महज एक बैठक में सहमति बनने की संभावना भी नहीं थी। इस्लामाबाद में यही हुआ है। नतीजतन, वार्ता बेनतीजा रही।
प्रश्न अब कई हैं। क्या अमेरिका फिर से हमला बोलेगा या कूटनीतिज्ञों को मौका दिया जाएगा? क्या दोनों पक्षों ने इस युद्ध से सबक सीख लिया या बेमतलब हिंसा का सिलसिला फिर से शुरू हो जाएगा? सवाल यह भी है कि क्या अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सलाह पर गौर करेंगे या अमेरिकी राष्ट्रपति के फैसले में नेतन्याहू बेमानी साबित हो जाएंगे? पाकिस्तान क्या आने वाले दिनों में अपने लिए ‘फोटो ऑप्स’ के मौके अधिक पाएगा या नेपथ्य में चला जाएगा?
जाहिर है, इन तमाम सवालों के जवाब अगले कुछ दिनों में हमें मिलेंगे, पर कुछ तस्वीर बिल्कुल साफ दिख रही है। बेशक, वार्ता के अगले दौर को लेकर फिलहाल स्पष्टता नहीं है, पर तेहरान ने इस कवायद को ‘विफल’ बता दिया है, जबकि अमेरिका ने ईरान को ‘बेस्ट ऑफर’ (बेहतरीन प्रस्ताव) देने की बात कही है। इस्लामाबाद से उड़ान भरने से पहले उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस ने पत्रकारों से यही कहा कि अमेरिकी प्रस्ताव को मानना या न मानना अब तेहरान पर निर्भर है, जिसका अर्थ है कि बातचीत के दरवाजे अब भी खुले हैं। खबर तो यह भी है कि दोनों देशों की टीमें अब भी इस्लामाबाद में टिकी हुई हैं, जिससे लगता है कि दोनों पक्ष वार्ता जारी रखने के हिमायती हैं।
खबरों की मानें, तो इस बातचीत में अमेरिका ईरान से यह वायदा मांग रहा था कि वह अपना परमाणु कार्यक्रम फिर से शुरू नहीं करेगा, जबकि तेहरान ने कई दूसरे मुद्दे भी उठाए। परमाणु कार्यक्रम के अलावा, तेहरान होर्मुज पर अधिकार, युद्ध का मुआवजा, भविष्य में हर तरह के हमले से सुरक्षा और प्रतिबंधों का अंत चाहता है। जाहिर है, ईरान की तरफ से एक व्यापक मसौदा पेश किया गया, जबकि अमेरिका के लिए मुख्य मुद्दा परमाणु ही था। हालांकि, आधिकारिक बयान आने से पहले यह कहना कठिन है कि बैठक में कौन-कौन से मुद्दे उठे हैं, मगर चूंकि युद्ध-विराम पर सहमति है और वार्ता के लिए दोनों देश बैठे, इसलिए उम्मीद यही है कि आपसी सहमति के सूत्र जरूर निकलेंगे।
यही कारण है कि हाल-फिलहाल या कम-से-कम युद्ध-विराम तक संघर्ष शुरू होने की आशंका नहीं है। हां, भविष्य में क्या होगा, यह कहना आसान नहीं है, क्योंकि राष्ट्रपति ट्रंप अप्रत्याशित कदम उठाते रहे हैं। पश्चिम एशिया में शांति की राह कैसे और कहां से बनती है, यह तो भविष्य में पता लगेगा, लेकिन जो कूटनीतिक कदम अभी उठाए गए हैं, उन पर फिलहाल भरोसा किया जाता रहेगा।
वाशिंगटन की भूल बस यह है कि वह दबाव बनाकर तेहरान से अपनी शर्तें मनवाना चाहता है। इस युद्ध में भले ही ईरान को भारी क्षति पहुंची है, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि वह हार गया है या टूट गया है। उसके पास होर्मुज जलमार्ग का ऐसा ‘ट्रंप कार्ड’ (तुरुप का पत्ता) है, जिसका तोड़ खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी नहीं निकाल पाए हैं। यहां तक कि इस जलडमरूमध्य को जबरन खुलवाने की उनकी कोशिश भी पूरी तरह धराशायी हो गई। फिर, खाड़ी के देशों में तेल और गैस से जुड़े बुनियादी ढांचों को ईरान ने इस कदर नुकसान पहुंचाया है कि उसकी ताकत का लोहा पूरा क्षेत्र मानने लगा है। वह इस युद्ध में एक बड़ी क्षेत्रीय ताकत बनकर उभरा है, जिससे उसके आत्मविश्वास में काफी बढ़ोतरी हुई है। यही उसके लिए जीत है। इस युद्ध-विराम के दरम्यान वह अपने सुरक्षा ढांचे को फिर से खड़ा कर सकता है। इसलिए भी, वार्ता की मेज पर वह खुद को हारा हुआ खिलाड़ी नहीं समझ रहा।
उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप भी खुद को इस जंग का विजेता मान रहे हैं। उन्होंने ईरान की नौसेना और परमाणु ढांचे को खत्म करने का बार-बार दावा किया है। यहां तक कि इस्लामाबाद वार्ता के संदर्भ में भी उन्होंने यही कहा कि समझौता होने या न होने से उनको कोई फर्क नहीं पड़ेगा, क्योंकि अमेरिका इस युद्ध को जीत चुका है। मगर इजरायल की चिंताओं को दरगुजर करना उनके लिए कठिन हो सकता है।
कहा जा रहा है कि इजरायल के लिए सबसे बड़ा मसला ईरान को ‘परमाणु हथियार बनाने से रोकना’ है। किंतु इसे समझने के लिए कुछ घटनाक्रमों पर गौर कीजिए। पहला, ईरान के सुप्रीम लीडर ने पूर्व में यह स्पष्ट कर दिया है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएंगे, लेकिन यूरेनियम संवर्द्धन से अपने हाथ पीछे नहीं खीचेंगे। दूसरा, अमेरिका पहले ही यह दावा कर चुका है कि उसने ईरान के परमाणु ढांचे नष्ट कर दिया है। तीसरा, जब तेहरान से समझौता बस होने को था, तभी इजरायल की शह पर फरवरी में अमेरिका ने ईरान पर हमला बोल दिया था, और चौथा, उप-राष्ट्रपति वेंस अब कह रहे हैं कि भविष्य में भी परमाणु हथियार न बनाने को लेकर ईरान अपनी प्रतिबद्धता दिखाए, तभी वार्ता सफल हो सकेगी। इन तमाम बातों का निहितार्थ यही है कि परमाणु मुद्दा महज एक ‘मुखौटा’ है। वास्तव में, इजरायल नहीं चाहता कि ईरान के साथ किसी तरह का समझौता हो।
ईरान इस पैंतरेबाजी को बखूबी समझ रहा है। वह यह भी मानता है कि यदि जंग फिर से शुरू हुई, तो अमेरिका के पास इतनी सैन्य ताकत है कि वह उसे और नुकसान पहुंचा सकता है। मगर इससे क्या ईरान झुक जाएगा? इसकी संभावना नहीं के बराबर है। तेहरान फिलहाल किसी तरह के दबाव में नहीं है।
इस सूरतेहाल में होर्मुज और खाड़ी के उन ऊर्जा ढांचों का महत्व बढ़ जाता है, जो इस युद्ध की भेंट चढ़ गए हैं। इन्फ्रास्ट्रक्चर को खड़ा करने में वक्त लगता है, इसलिए इन ऊर्जा केंद्रों से तेल-गैस के उत्पादन में अभी समय लगेगा, लेकिन होर्मुज खुलने से न सिर्फ तनाव कम हो सकता है, बल्कि तेल-गैस की कीमतें भी कम हो सकती हैं। वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए राहत की बात यही होगी। रही बात मध्यस्थता की, तो फिलहाल पाकिस्तान इसमें शामिल जरूर है, लेकिन भविष्य में उसकी भूमिका काफी हद तक अमेरिका और ईरान के रुख से ही तय होगी।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)
लेखक के बारे में
Hindustanहिन्दुस्तान भारत का प्रतिष्ठित समाचार पत्र है। करीब एक सदी से यह अखबार हिंदी भाषी पाठकों की पसंद बना हुआ है।
देश-दुनिया की Hindi News को पढ़ने के लिए यह अखबार लगातार पाठकों की पसंद
बना हुआ है। इसके अतिरिक्त समकालीन मुद्दों पर त्वरित टिप्पणी, विद्वानों के विचार और साहित्यिक सामग्री को भी लोग पसंद
करते रहे हैं। यहां आप ग्लोबल से लोकल तक के सभी समाचार एक ही स्थान पर पा सकते हैं। हिन्दुस्तान अखबार आपको उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, झारखंड, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों की खबरें प्रदान करता है। दक्षिण भारत के
राज्यों की खबरें भी आप यहां पाते हैं।
इसके अतिरिक्त मनोरंजन, बिजनेस, राशिफल, करियर, ऑटो, गैजेट्स और प्रशासन से जुड़ी खबरें भी यहां आप पढ़ सकते हैं। इस
पेज पर आप उन खबरों को पढ़ रहे हैं, जिनकी रिपोर्टिंग अखबार के रिपोर्टरों ने की है।
लेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


