अपने ही शरीर से गाफिल
अगर आज बारिश होती है, तो आपके शरीर में जरूर बदलाव होंगे। ज्यादातर शहरी लोग इसका अनुभव नहीं कर पाते, पर कई ग्रामीण लोगों को अनायास ही इसकी जानकारी हो जाती है...

जो कुछ इस धरती के साथ होता है, वही आपके साथ भी होता है, क्योंकि अपने भौतिक शरीर में आप इस धरती से अधिक कुछ नहीं हैं। आपका शरीर वही है, जो भोजन आप खाते हैं। आप जो भोजन खाते हैं, वह धरती ही तो है। आप इस धरती की छोटी सी लहराती फसल हैं। इस धरती पर जो होता है, वही आपके साथ भी होता है, बस एकदम सूक्ष्म रूप में।
मैं कुछ वर्षों तक एक फार्म में रह रहा था। वहां पास के गांव में एक व्यक्ति था, जो ठीक से सुन नहीं पाता था। चूंकि वह बमुश्किल ही सुन पाता था, इसलिए लोगों की बातों का जवाब नहीं दे पाता था। ऐसे में, गांव वाले उसे मूर्ख समझते, उससे अलग-थलग रहते और उसका मजाक उड़ाते थे। मैंने उसे अपने फार्म पर नौकरी दे दी। वह एक अच्छा साथी था, क्योंकि मैं बातें करना पसंद नहीं करता और वह सुन नहीं पाता था, इसलिए बात भी नहीं करता था। इसलिए, कभी कोई समस्या ही नहीं हुई!
तब बैलों से खेत जोते जाते थे। एक दिन सुबह चार बजे मैंने उसे हल-बैल तैयार करते देखा। मैंने ऊंची आवाज में उससे पूछा, ‘क्या कर रहे हो?’ उसने कहा, ‘मैं जुताई के लिए तैयार हो रहा हूं।’ मैंने पूछा, ‘जुताई किसकी करोगे, बारिश तो हो नहीं रही?’ उसने कहा, ‘आज बारिश होने वाली है।’ मैंने ऊपर की तरफ देखा। आसमान साफ था। मैंने पूछा, ‘कहां है बारिश?’ उसने कहा, ‘स्वामी, आज बारिश होगी।’ उस दिन बारिश हुई।
मैं कई दिनों तक सोचता रहा कि जो कुछ वह व्यक्ति महसूस कर सका, वह मैं क्यों न कर सका? मैं अपने हाथों को अलग-अलग दिशा में घुमाकर नमी व तापमान का अंदाज लेने लगा, आसमान को पढ़ने की कोशिश करने लगा। मैंने मौसम संबंधी तमाम किताबें पढ़ीं, लेकिन मेरी समझ में कुछ भी नहीं आया। फिर मैंने अपने ही शरीर पर गौर किया। इसके बाद मैंने उस सबसे बड़ी भूल का पता लगाया, जो हममें से अधिकतर लोग करते हैं। हम धरती, जल, वायु और अग्नि जैसे तत्वों को जीवन की प्रक्रिया का जरूरी अंग मानने के बजाय वस्तु के रूप में देखते हैं। इन्हीं तत्वों से तो हमारा शरीर बना है।
लगभग अठारह महीने तक कठोर प्रयास के बाद आखिरकार मैं समझ गया। अब अगर मैं कहता हूं कि बारिश होने वाली है, तो पंचानबे फीसदी बार बारिश होती है। यह कोई जादू नहीं है, बल्कि अपनी ही प्रणाली का, धरती का, उस हवा का, जिसे आप सांस में भरते हैं और उन सबका, जो आपके आस-पास है, गहराई से किया गया अवलोकन है। अगर आज बारिश होनी है, तो आपके शरीर में जरूर बदलाव होंगे। शहरों में रहने वाले ज्यादातर लोग इसका अनुभव नहीं कर पाते, लेकिन कई ग्रामीण लोगों को अनायास ही इसकी जानकारी हो जाती है।
सद्गुरु जग्गी वासुदेव

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