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पूर्व प्रधानमंत्री का अफसोसनाक हश्र

पूर्व प्रधानमंत्री का अफसोसनाक हश्र

संक्षेप:

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान से मिलने के लिए अदियाला जेल के बाहर धरने पर बैठी उनकी बहनों और उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के सदस्यों पर सर्द रात में ठंडे पानी की बौछार करने की खबरें छनकर आ रही हैं…

Dec 11, 2025 11:29 pm ISTHindustan लाइव हिन्दुस्तान
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पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान से मिलने के लिए अदियाला जेल के बाहर धरने पर बैठी उनकी बहनों और उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के सदस्यों पर सर्द रात में ठंडे पानी की बौछार करने की खबरें छनकर आ रही हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में पार्टी ने बयान जारी कर कहा है कि, ‘जेल में बंद पूर्व पीएम के साथ मुलाकात की अनुमति के अदालती आदेश के बावजूद, सरकार के इशारे पर अधिकारियों ने जेल के बाहर इमरान खान की बहनों और शांति से बैठे पार्टी कार्यकर्ताओं को तितर-बितर करने के लिए बर्फीले पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया है।’ ज्ञात हो कि इमरान खान के खिलाफ ‘चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज’ का पद संभालने के बाद से जनरल आसिम मुनीर के जुल्म की इंतिहा हो गई है। मुनीर इमरान खान से जुड़े सभी नामो-निशान मिटाने पर तुले हुए हैं, क्योंकि प्रधानमंत्री होने के कारण इमरान के पास पाकिस्तान की बहुत सारी अहम रणनीतिक खुफिया जानकारियां हैं, जो देर-सबेर मुनीर और वर्तमान प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के लिए खतरा बन सकती हैं।

इसीलिए इमरान पर जुल्मो-सितम ढाने में पाकिस्तानी सेना जीजान से जुट गई है। यहां तक कि उनके बुनियादी मानवाधिकारों का उल्लंघन करने पर आमादा है। इमरान खान की बड़ी बहन अलीमा के नेतृत्व में मंगलवार को अदियाला जेल के बाहर धरना दिया जा रहा था। इसकी वजह थी कि अदालती आदेश के बावजूद उन्हें एक बार फिर इमरान खान से मिलने नहीं दिया गया। प्रदर्शन में बहनों के अलावा पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के महासचिव सलमान अकरम राजा और खैबर-पख्तूनख्वा के प्रांतीय अध्यक्ष जुनैद अकबर खान सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता भी शामिल हुए थे। गौरतलब है कि पिछले हफ्ते इमरान की दूसरी बहन उज्मा खान को जेल में बंद भाई से मिलने की अनुमति दी गई थी। उज्मा ने बाद में कहा था कि उनके भाई शारीरिक रूप से ठीक लग रहे थे, पर उन्हें ‘मानसिक यातना’ का सामना करना पड़ रहा है।

ठंड के मौसम में शांतिपूर्ण धरना दे रहे नागरिकों पर बफीर्ले पानी की बौछार करना न केवल उनके नागरिक अधिकारों का बेशर्म उल्लंघन है, बल्कि सरकार के अत्याचारों का विरोध करने के लिए जमा हुए लोगों के राजनीतिक अधिकारों पर भी सीधा हमला है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और लोकतंत्र के समर्थकों के लिए भी यह एक चुनौती है कि वे पाकिस्तान में लोकतांत्रिक अधिकारों का उपयोग कर रहे निरीह नागरिकों के दमन पर चुप नहीं बैठें और त्वरित कार्रवाई करें।

मुकेश प्रसाद ठाकुर, अधिवक्ता

इमरान की बहनें नासमझी न दिखाएं

इमरान खान की गिरफ्तारी को लेकर एक बार फिर पाकिस्तान की सियासत गर्माई हुई है। खबर है, उनकी बहन अलीमा खान को उनसे मिलने नहीं दिया जा रहा और जेल के भीतर इमरान खान के साथ ज्यादती की जा रही है। दुनिया का कोई शांतिकामी नागरिक, जम्हूरी कौम या सभ्य इंसान इस बात की हिमायत नहीं करेगा कि किसी भी शख्स के साथ जोर-जबर्दस्ती की जाए, मगर इमरान के मामले में ऐसा लगता है कि पश्चिमी मीडिया सनसनी बेच रहा है। अभी चंद रोज पहले इमरान की एक अन्य बहन उज्मा को उनसे मिलवाया गया था और मुलाकात के बाद उन्होंने मीडिया से कहा था कि भाई बहुत गुस्से में थे। कह रहे थे कि ये लोग हमें ‘मेंटल टॉर्चर’ कर रहे हैं। पूरे दिन कमरे में बंद रखते हैं, थोड़ी देर के लिए बाहर जाने देते हैं, मगर किसी से बातचीत की इजाजत नहीं है।

दरअसल, इमरान खान ने जो बोया, वही वह काट रहे हैं। उनके निजाम ने अपने सियासी मुखालिफों के साथ वही सुलूक किया, जो उनके साथ हो रहा है। उनके प्रधानमंत्री काल में भी नवाज शरीफ के खानदान के खिलाफ कई मामले शुरू किए गए और उन्हें देश से बाहर ही रहने के लिए बाध्य किया गया। फिर, यह जानते हुए कि फौज से अदावत करके कोई हुक्मरां पाकिस्तान के भीतर चैन से नहीं रह सकता, उन्होंने उसी फौज के खिलाफ मोर्चा खोल दिया, जिसने उनको प्रधानमंत्री बनवाया था। निस्संदेह, पाकिस्तान की सारी गड़बड़ियों की जड़ में उसकी फौज है, मगर वहां के सियासतदां भी दूध के धुले नहीं हैं। इमरान को अगर लंबे दौर की सियासत करनी थी, तो उनको फौज को भरोसे में रखते हुए आहिस्ता-आहिस्ता सांविधानिक संस्थाओं को मजबूत करना चाहिए था। इसमें कोई दोराय नहीं कि अवाम उनके कार्यों से प्रभावित हो रही थी। अगर चुनावी धांधली नहीं होती, तो शहबाज शरीफ की जगह वह या उनकी पार्टी का नुमाइंदा आज वहां का वजीर-ए-आजम होता, मगर वह हड़बड़ी में थे और सियासत में सबसे जरूरी चीज है धैर्य।

इमरान को अब अदालत से ही राहत की उम्मीद करनी चाहिए। वैसे भी, उन्हें ज्यादातर मामलों में जमानत मिल ही चुकी है। अपनी बहनों व पार्टी के नेताओं-कार्यकर्ताओं के जरिये हंगामा कराकर वह अपने लिए नई मुसीबतें ही मोल लेंगे। उनकी बहनों को भी भाई की खैरियत जानने के लिए अदालत की शरण लेनी चाहिए। वे सीधे मुनीर के खिलाफ मोर्चा खोलकर इमरान की परेशानियां बढ़ा रही हैं, क्योंकि मुनीर इस वक्त सबसे ताकतवर पाकिस्तानी हैं, जिन्हें अमेरिका, चीन और पश्चिम एशिया के देश शहबाज शरीफ से ज्यादा अहमियत दे रहे हैं।

देविका सिंह, टिप्पणीकार