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बजरंग बली का भक्त हूं मैं

बजरंग पूनिया, गोल्ड मेडलिस्ट पहलवान

मैं भगवान को बहुत मानता हूं। ऐसा भी नहीं है कि सिर्फ बाउट के वक्त ईश्वर को याद करता हूं। मैं हमेशा ऊपर वाले का ध्यान करता हूं। मुझे लगता है कि अगर मैं अपनी बाउट के समय ही भगवान को याद करूंगा, तो वह भी सोचेंगे कि बड़ा मतलबी इंसान है, सिर्फ मुश्किलों में याद करता है, इसलिए भगवान का स्मरण हर समय जरूरी है। मैं रोज सुबह-शाम भगवान की पूजा करता हूं। बजरंग बली का भक्त हूं। गले में रूद्राक्ष पहनता हूं। बाउट के दौरान तो रूद्राक्ष-माला नहीं पहनी जा सकती, लेकिन जब बाउट के बाद मैट से बाहर आता हूं, तो रूद्राक्ष की माला गले में होती है। रूद्राक्ष पहनकर मैं काफी शांति महसूस करता हूं। पूजा-पाठ, ट्रेनिंग व आराम के अलावा कभी वक्त मिल जाए, तो बॉस्केटबॉल खेलता हूं। लेकिन प्राथमिकता ट्रेनिंग के बाद पर्याप्त आराम करने की होती है। 

जीत-हार का फैसला किस्मत से भी जुड़ा होता है। 2015 वल्र्ड चैंपियनशिप की बाउट मुझे कभी नहीं भूलती। मैं अच्छा भला 6-4 से जीत रहा था और आखिर के बमुश्किल 15-20 सेकंड रहे होंगे, जब मैं 6-6 से हार गया। वह हार मुझे बहुत खली, वरना आज वल्र्ड चैंपियनशिप में मेरे तीन मेडल होते। यह रिकॉर्ड बनाने वाला मैं देश का इकलौता पहलवान होता। आज मेरे लिए यह समझना आसान है कि मैंने जो गलती की, उसका फायदा सामने वाले पहलवान ने उठाया और मैं जीता हुआ खेल हार गया। इस बार एशियन गेम्स में जाने से पहले मैंने योगी भाई से वायदा किया था कि मैं गोल्ड मेडल जीतकर आऊंगा। 2014 में उन्होंने गोल्ड मेडल जीता था और मैंने सिल्वर। मुझे याद है कि योगी भाई ने बाद में गोल्ड मेडल मेरे हाथ में पकड़ाया था और खुद सिल्वर मेडल ले लिया था। उस दिन योगी भाई ने मुझसे कहा था कि 2018 में यह गोल्ड मेडल तुम्हारे गले में होना चाहिए। योगी भाई का मेरे साथ जो रिश्ता है, वह एक गुरु और बड़े भाई का है। वह मुझे बिल्कुल अपने परिवार के सदस्य की तरह रखते हैं। पहलवानी से अलग मेरी निजी जिंदगी में भी सपोर्ट करते हैं। जाने-अनजाने कोई गलती अगर मुझसे हो जाती है, तो वह तुरंत मुझे बताते हैं। कभी-कभार डांटते भी हैं। यूं तो मैं उन्हें शिकायत का कोई मौका नहीं देता, लेकिन जब कभी भी पहलवानी में गलती होती है, तो वह मुझे डांट लगा देते हैं। योगी भाई सबसे ज्यादा नाराज तब होते हैं, अगर मुझसे कोई गलती दोबारा हो जाए। वह हमेशा कहते हैं कि खेल में गलती सबसे होती है, पर एक बार के बाद वही गलती दोहरानी नहीं चाहिए। मैं हमेशा उनकी डांट को गंभीरता से लेता हूं, क्योंकि मैं जानता हूं कि गुरु का और बड़े भाई का अधिकार होता है कि अगर कोई गलती कर रहा है, तो वे उसे डांटें। कई बार तो ऐसा होता है कि मेरी ट्रेनिंग के दौरान सुशील भाई भी आ जाते हैं और अगर मैं कुछ गलती कर रहा हूं, तो मुझे समझाते हैं। वह भी बहुत बड़े पहलवान हैं। ओलंपिक में दो-दो बार उन्होंने मेडल जीता है। मैं उनकी सलाह भी पूरी गंभीरता से लेता हूं। 

साल 2015 में अर्जुन अवॉर्ड का मिलना मेरे लिए बड़ी खुशी की बात थी। मेरे कोच साहब ने मुझे बताया था कि एसोसिएशन ने मेरा नाम अर्जुन अवॉर्ड के लिए भेजा है। मुझे इसलिए बहुत खुशी हुई, क्योंकि अर्जुन अवॉर्ड खेल की दुनिया का एक अहम सम्मान है। इस सम्मान के बाद ऐसी ‘फीलिंग’ आई कि अगर हम देश का नाम रोशन करते हैं, तो देशवासी भी हमें बहुत सारा प्यार और मान देते हैं। इससे हमें आगे और अच्छा करने की प्रेरणा मिली। जिस दिन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी जी ने मुझे अर्जुन अवॉर्ड दिया, उस दिन अंदर से ऐसा लगा कि देश के प्रति जिम्मेदारी और बढ़ गई है। आज मैं जब भी इस प्यार और सम्मान के बारे में सोचता हूं, तो गर्व होता है। इसीलिए अब जब मैं नए पहलवानों से मिलता हूं, तो उन्हें सही ‘गाइडेंस’ देता हूं। मैं हमेशा से यह मानता हूं कि गलती हर किसी से होती है। लेकिन उस गलती को स्वीकार करना और फिर उसे दूर करने की कोशिश करना बहुत जरूरी है। 

मैं जब कभी अखाड़े में जूनियर पहलवानों से मिलता हूं और वे मुझसे किसी ‘टेक्नीक’ के बारे में पूछते हैं, तो मैं उन्हें आराम से पूरी बात समझाता हूं। अगर कुश्ती की कोई खास ‘टेक्नीक’ मुझे नहीं समझ आती, तो मैं आज भी उसे पूछने में संकोच नहीं करता। मैं बच्चों से मिलता हूं, तो उन्हें यही सलाह देता हूं कि मेहनत सबसे ऊपर है। अगर देश के लिए मेडल जीतना है, तो बहुत मेहनत करनी पड़ेगी। अपने गुरुओं और माता-पिता का सम्मान करना होगा।   

(जारी...)

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  • Web Title:meri kahani hindustan column on 7 october