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जिंंदगी की बची-खुची लड़ाइयां

मैरीकोम, सुप्रसिद्ध महिला बॉक्सर

इन सारी सफलताओं के अलावा मेरी जिंदगी का एक और पहलू है। ‘पर्सनल फ्रंट’ पर कदम-कदम पर लोगों ने मुझे बहुत ‘चैलेंज’ किए। जब मेरी शादी हुई, तो लोगों ने कहा कि इसका बॉक्सिंग करियर अब खत्म हो गया। मैंने शादी के बाद वल्र्ड चैंपियन बनकर उन लोगों को जवाब दिया। उसके बाद जब मेरा बच्चा हुआ, तो लोगों ने फिर से कहना शुरू कर दिया कि अब मैरीकोम का करियर खत्म होने वाला है। मैं उसके बाद र्भी ंरग में उतरी और मैंने वल्र्ड चैंपियनशिप जीती। मुझे लगा कि अब लोगों को जवाब मिल गया होगा, पर उनकी जुबान मैं बंद नहीं कर सकती हूं। मणिपुर के लोग भी ऐसी ही बातें किया करते थे। यहां तक कि मेरे पापा को भी लगता था कि अब बहुत हो गया। इसके उलट, मेरे पति के घरवाले मेरा बहुत हौसला बढ़ाते थे। बहुत सपोर्ट करते थे। मेरे ‘फादर-इन-लॉ’ को लोग बहुत कुछ कहते थे कि देखो, तुम्हारी बहू अब तक खेल रही है। अब वह बहुत कुछ हासिल कर चुकी है। अब अगर हार गई, तो साख खत्म हो जाएगी। लोग बहुत उल्टा-सीधा बोला करते थे। लेकिन उन्हें इन बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता था। वह खुलकर मुझे सपोर्ट करते थे। अब तो वह इस दुनिया में नहीं रहे, लेकिन उन्होंने मुझे हमेशा ‘मोटिवेट’ किया।
मैं आज भी ये सब बातें सुनती हूं और बस इतना सोचती हूं कि मैं कभी किसी की बुरी बातें सुनकर अपना फैसला नहीं बदलूंगी। मैंने डिसाइड कर लिया था कि जो मेरी जिंदगी के लिए अच्छा है, और जो मुझे अच्छा लगता है, मैं वही करूंगी। खुद से ही इन सारे ‘फ्रंट’ पर अड़ी रहती थी। शादी के बाद तो खैर मेरे पति ने मेरा बहुत साथ दिया। परिवार का उसने बहुत ध्यान रखा। र्मैं ंरग में अपने जुनून के साथ उतरती रही। अभी भी मेरे ‘पैरेंट्स’ कई बार यह समझाते हैं कि अब बहुत हो गया, अब कहीं अगर्र ंरग में कुछ गड़बड़ हुई, तो बड़ी बदनामी होगी। मैं उनसे खुलकर कहती हूं कि अगर कुछ हो भी गया, तो आपको क्या दिक्कत है? मुझे अगर अपना करियर और आगे लेकर जाना है और मैं उसके लिए मेहनत कर रही हूं, तो इससे आपको परेशान नहीं होना चाहिए। अभी भी मेरी मम्मी-पापा से अक्सर इन बातों को लेकर नोंक-झोंक होती है। मैं उन्हें हमेशा समझाती हूं कि अब मुझे कुछ ‘प्रूफ’ नहीं करना है। मैंने एक बार खुद से कुछ ‘कमिट’ कर लिया, तो मैं फिर अपनी भी नहीं सुनती हूं। मुझमें बॉक्सिंग  को लेकर आज भी वह ‘पैशन’ है कि मैं मेहनत करने को तैयार हूं। यही मेरा पैशन है और यही मेरा प्रोफेशन भी। मैं अब भी देश के लिए कुछ करना चाहती हूं। 
मैं उन्हें समझाती हूं कि लड़कियों को भी अपनी जिंदगी अपने ढंग से जीने का मौका मिलना चाहिए। उन्हें भी जो अच्छा लगता है, वह करने देना चाहिए। मेरी कामयाबी के बाद यह असर तो हुआ ही है। खासतौर से, देश के लोगों में लड़कियों को लेकर सोच बहुत बदली है। अब लोगों को समझ में आ रहा है कि लड़कियां भी घर से बाहर निकलकर बहुत कमाल कर सकती हैं। इस बदलाव में अगर मेरा थोड़ा भी रोल है, तो मैं क्यों न गर्व महसूस करूं। मैं अब भी कहीं अगर ‘मोटिवेशनल स्पीच’ देने जाती हूं, तो यही बोलती हूं कि अगर मैं कर सकती हूं, तो आप लोग क्यों नहीं कर सकते हैं? मैं जिंदगी में बहुत सारा फाइट करके, चैलेंज का सामना करके आगे आई हूं। आप लोग भी आगे आ सकते हैं। मैं कोशिश करती हूं कि जिस तरह की चुनौतियों को मैंने अपने जीवन में मात दी, वह किस्सा दूसरों को भी ‘मोटिवेट’ करे। 
अभी मैंने नए बच्चों के लिए एकेडमी भी शुरू की है। मैं चाहती हूं कि बच्चों को बॉक्सिंग सीखने में किसी तरह की तकलीफ न हो। मेरे अपने बच्चे अभी बॉक्सिंग नहीं सीखते हैं। उनकी दिलचस्पी उनके पापा की तरह फुटबॉल में ज्यादा है। वे तीनों फुटबॉल ही खेलते हैं। अभी बच्चे हैं, क्या पता बड़े होकर उनका दिमाग बदल जाए और वे भी बॉक्सिंग करें, तो मैं उन्हें पूरा ‘सपोर्ट’ करूंगी। जैसे मैंने फुटबॉल से शुरू किया और फिर बॉक्सिंग में आ गई। लेकिन बाकी बच्चे अगर सीखना चाहते हैं, तो वे पीछे न रहें। साल 2016 में मुझे राज्यसभा में भी नॉमिनेट किया गया। यह भी अपने आप में अलग ‘एक्सपीरिएंस’ है। पक्ष-विपक्ष की सभी पार्टियों के लोग मुझसे मिलने आते हैं। वे कहते हैं कि उन्हें मुझ पर गर्व है। मेरी बहुत तारीफ करते हैं। मुझे बहुत अच्छा लगता है। सच कहूं, तो यह मैंने अपने सपने में भी नहीं सोचा था कि मैं संसद सदस्य बनूंगी। देश ने मेरे योगदान को पहचाना, इस बात की मुझे बहुत खुशी है। मुझे राजनीति का कोई तजुर्बा नहीं है। मैं अपनी तरफ से कोशिश करती हूं कि अच्छे कामों का समर्थन किया जाए। उन लोगों को ‘सपोर्ट’  किया जाए, जो अच्छा काम कर रहे हैं। मेरे लिए यह जिम्मेदारी किसी पार्टी से ऊपर उठकर है। 

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  • Web Title:meri kahani hindustan column on 7 april