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बुरा दौर और अच्छे समय के रिकॉर्ड

दलेर मेहंदी प्रसिद्ध पंजाबी गायक

2006 में एक फिल्म आई थी मिर्जया।  उसके टाइटिल सांग ने भी कहानी बदली। बल्कि फिल्म इंडस्ट्री के म्यूजिक ट्रेंड को बदला। इसके अलावा रंग दे बसंती का मेरा गाया गाना खूब हिट हुआ। भाग मिल्खा भाग  का गाना तो गुरुबाणी की तर्ज पर था, जिसे लोगों ने बहुत पसंद किया। इसके अलावा, हाल में बाहुबली का गाना ले लीजिए। तमिल, तेलुगू और हिंदी को मिला दें, तो मुझे लगता है कि उसके चार-पांच सौ मिलियन ‘व्यूज’ होंगे। उस फिल्म ने तो कामयाबी के कई रिकॉड्र्स कायम किए ही, वह गाना भी खूब सराहा गया। दंगल  आप लोगों के सामने है। जिसका टाइटिल ट्रैक मैंने गाया था। खुशी इस बात की है कि इतने साल के बाद भी हमें अपने अतीत को याद करके यह नहीं कहना पड़ता कि हम लोग ऐसे थे, बल्कि हम लगातार आगे बढ़ते जा रहे हैं। अलग-अलग म्यूजिक डायरेक्टर के साथ काम किया। सभी में बड़ा मजा आया। अभी मैंने फिल्म गोल्ड का गाना गाया। मुझे म्यूजिक की वजह से डॉक्टरेट की उपाधि मिली। 
जीवन में एक ऐसा वक्त भी आया, जब मुझ पर गलत इल्जाम लगाए गए। ऐसा कहा गया कि मैं लोगों को गलत तरीके से विदेश लेकर गया। आज भी कोई चाहे, तो अमेरिकी एंबेसी या कनाडा की एंबेसी चला जाए और जाकर मेरे ग्रुप की लिस्ट निकाल ले, तो बात साफ हो जाएगी। मेरे ग्रुप में कुल 12 लोग हैं। मेरे ब्रदर इन लॉ, फिर हम चार भाई और मेरे ग्रुप के बाकी कलाकार। हर टूर में आपको 12 मेंबर ही मिलेंगे। इसीलिए मुझे कभी किसी तरह का कोई डर नहीं था। वह इल्जाम पुलिस की तरफ से लगाया गया था। एंबेसी की तरफ से कोई शिकायत नहीं थी। मैंने कभी इसे सीरियसली लिया ही नहीं। 
आजकल जब समय मिलता है, तो क्रिकेट देखना अच्छा लगता है। फुटबॉल के मैच देखता हूं। मुझे रेसलिंग बहुत अच्छी लगती है। वह भी यूएसए वाली। उनकी ‘फिटनेस’ और ‘फ्लैक्सिबिलिटी’ देखने लायक होती है। देश के लिए जब किसी को खेलते देखता हूं, तो मुझे अलग सी फीलिंग आती है। साल 1994 में कजाकिस्तान के अलमाटी में मैंने अपने देश के लिए एक प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था। वह एक सिंगिंग कम्पटीशन  था। उस कम्पटीशन में 117 देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था। वहां चीन पहले नंबर पर रहा था और मेरे गाने से भारत दूसरे नंबर पर आया था। तब मैंने वहां पर पहली बार रूसी लोगों को ऑटोग्राफ दिया था। उन्होंने उसी वक्त मेरा नाम रख दिया था- बल्ले बल्ले मैन, जबकि तब तक मेरी एल्बम बल्ले-बल्ले आई भी नहीं थी। आज भी देश की नुमाइंदगी करने वाला वह पल बिल्कुल अच्छी तरह याद है और साथ ही साथ अपना पहला ऑटोग्राफ भी।  
आज मैं सिर्फ एक गायक नहीं, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझता हूं। मेरा सपना है कि हम ऑर्गेनिक खाना खाएं। स्वस्थ रहें। पॉल्यूशन फ्री रहें। मैंने पिछले कुछ सालों में आठ लाख पेड़ दिल्ली में लगवाए हैं। अलग-अलग स्कूल के करीब साठ हजार बच्चों से मिल चुका हूं। दिल्ली में शायद ही कोई ऐसा स्कूल बचा हा, जहां मेरे हाथ के लगाए चार-पांच पेड़ न हों। भुज में जब भूकंप आया, तो मैंने वहां सोलह घर बनवाए। उन्हें एक साल का राशन दिया। इससे पहले जब कारगिल हुआ था, तब मैंने अपनी सेविंग से निकालकर 25 लाख रुपये जवानों को दिए। तब लोगों ने कहा कि एक चैरिटी कार्यक्रम कर देते हैं। मैंने कहा कि अगर लोगों को इंटरटेन करके पैसा लेना है, तो लानत है मेरे ऊपर। मैंने अपनी सेविंग से पैसे निकाले।     
मेरे छोटे भाई मीका को भी लोगों का बहुत प्यार मिला है। उसको मैंने नौ साल तक लगातार स्टेज पर लाइव ट्रेनिंग दी हुई है। पहले वे साथ में खड़े होते थे। फिर उनके हाथ में गिटार पकड़ाया। फिर मैंने उन्हें इंट्रोड्यूस करना शुरू किया, जिससे उनके मन का संकोच खत्म हुआ। मीका मुझसे उम्र में लगभग 10 साल छोटा है। आज वह कमाल कर रहा है। उसने भी एक से बढ़कर एक हिट गाने फिल्म इंडस्ट्री को दिए। उसके अलावा मेरा बेटा गुरदीप मेहंदी है। वह बहुत कमाल का गा रहा है। अभी अनिल कपूर की बेटी की शादी में उसने परफॉर्म किया था। सभी ने बहुत तारीफ की। वहां पर शाहरुख खान, अर्जुन कपूर, रणबीर सिंह, सुनील शेट्टी जैसे कलाकारों ने मेरे बेटे को बहुत पसंद किया। उसको हमने क्लासिकल म्यूजिक के साथ-साथ गुरुवाणी भी सिखाई है। उसने वेस्टर्न क्लासिकल म्यूजिक भी सीखा। हालांकि मैं भी अपने पिता की तरह बेटे की तारीफ मुंह पर नहीं करता, जिससे उसकी तरक्की यहीं न रुक जाए।

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  • Web Title:meri kahani hindustan column on 3 march