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माहौल के हिसाब से कभी नहीं गाया

दलेर मेहंदी प्रसिद्ध पंजाबी गायक

हैलो, मैं अमिताभ बच्चन बोल रहा हूं। उस रोज जब अमित जी ने फोन पर यह कहा, तो लगा कि मुझे चक्कर आ जाएगा। मैं गिर जाऊंगा। मैंने उनसे फोन पर कह भी दिया कि मुझे चक्कर आ रहे हैं। दिल का दौरा पड़ सकता है... तो बच्चन साहब जोर से हंसने लगे। फिर उन्होंने कहा कि एक खास गाना करना है। मुझे बहुत अच्छा लगा। बहुत खुशी हुई। मैंने उनके साथ गाना किया- ना-ना-ना-ना रे... जो उन्होंने 1997 में रिलीज हुई फिल्म मृत्युदाता  में इस्तेमाल किया। इस फिल्म के लाखों कैसेट्स बिके। उस रोज मैंने बचपन का समय भी याद किया, जब मैं बच्चन साहब के लिए दीवाना था। भगवान ने यह कमाल जरूर किया कि मेरे साथ, जो पूरे एशिया के सुपरस्टार हैं, उन्होंने डांस किया। मैंने बिना बाल कटवाए पगड़ी बांधकर डांस किया। गुरुनानक ने सुपरस्टार अमिताभ बच्चन को मेरे साथ डांस करने के लिए मजबूर कर दिया। मुझे वह दिन हमेशा याद रहता है, जब बच्चन साहब ने मुझे खुद फोन किया और कहा कि मैं अमिताभ बच्चन बोल रहा हूं। बात करने का उनका अंदाज भी जबर्दस्त था। उन्होंने कहा, दलेर साहब, मैं आपके साथ काम करना चाहता हूं। क्या आप मेरे साथ काम करेंगे? भगवान ने कितना बड़ा दिन दिखाया मुझे। उन्होंने बड़ी इज्जत दी है। 
इस गाने से जुड़ी एक और कहानी है। हम लोग एक बिजनेसमैन के घर शादी में परफॉर्म करने गए थे। वहां पर विनोद खन्ना साहब और बच्चन साहब पूरे परिवार के साथ आए थे। वे हम लोगों की परफॉर्मेंस देख रहे थे। मेरा छोटा भाई मीका उस दिन गा रहा था। मैं इसी बात से बहुत खुश था कि बच्चन साहब मीका को देख रहे हैं। मुझे उसी वक्त ऐसा लगा कि मीका की तो निकल पड़ी, यह बहुत आगे जाएगा। यह साल 1995 के अंत की बात है। मुझे अंदाजा नहीं था कि बच्चन साहब की निगाह मेरे ऊपर भी है। हम लोगों ने उस दिन पूरे दो घंटे की परफॉर्मेंस दी थी। उन्होंने हमसे उस वक्त कुछ कहा नहीं, लेकिन पूरा प्रोग्राम देखा, जिसके बाद यह गाना हुआ। इस गाने के बाद बहुत सारे कलाकारों ने कहना शुरू कर दिया कि दलेर की एल्बम इसलिए हिट हो जाती है, क्योंकि उसमें पीछे लड़कियां नाचती हैं। दलेर का उसमें क्या है? मुझ तक भी ऐसी बातें पहुंचीं। इसके बाद मैंने जान-बूझकर एक ऐसा एल्बम रिलीज किया, जिसमें मेरे साथ कोई लड़की नहीं थी। मैं अकेले दिख रहा था। वह गाना था- तुनक-तुनक।  वह एल्बम भी सुपरहिट रहा।
मेरे एल्बम के हिट होने के बाद अचानक पंजाबी एल्बम की बाढ़ सी आ गई। हालांकि मुझे कभी किसी तरह का डर नहीं था कि मेरी जगह खतरे में पड़ सकती है। हम सीखे हुए लोग हैं। हम हवाबाजी करने वाले लोग नहीं हैं। मैंने कभी भी माहौल को देखते हुए गाना नहीं गाया। मेरे दिमाग में कभी नहीं आया कि इस समय यह चल रहा है, तो ऐसा गाना गा दूं। मन में हमेशा यह विश्वास रहता था कि जमाना हमसे है, हम जमाने से नहीं। यही वजह थी कि मेरे गाने विदेशों में भी बहुत मशहूर हुए। मुझे याद है कि कई साल पहले एक दिन सुनिधि चौहान ने मुझे फोन किया। उन्होंने मुझे एक वीडियो का लिंक भेजा। जब मैंने वह लिंक खोला, तो देखा कि उसमें कुछ विदेशी मेरे गाने तुनक-तुनक  पर जमकर डांस कर रहे हैं। मुझे अच्छा लगा कि जो मेहनत मैंने अपनी गायकी में की, वह दुनिया भर में पसंद की जा रही है। मैं बचपन में गुलाम अली, मेहदी हसन, बेगम अख्तर को सुना करता था। कुछ बड़ा हुआ, तो रूना लैला को सुना। ये सब बहुत बड़े कलाकार थे, और हैं। इनकी गायकी में वह बात थी, जो कानों में बैठ जाए। इसीलिए मैंने जब भी कोई नया गाना गाया, यह सोचकर नहीं गाया कि इस वक्त क्या चल रहा है, बल्कि जो गाया, वह चला।   
मेरे करियर का एक बड़ा गाना मकबूल  फिल्म में आया। उसके बोल थे- तू मेरे रूबरू है।  फिल्म संगीत में भी कुछ  समय बाद लोगों को अंदाजा हो जाता है कि किस कलाकार की क्या बैकग्राउंड है?  मैंने जब इस गाने में पहला आलाप लिया, तो वह लोगों को बहुत पसंद आया। उसको मैंने पहले पूरा क्लासिकल आलाप लेकर गाया। अपनी हर एल्बम में मैं एक गाना ऐसा जरूर रखता हूं, जो क्लासिकल टच लिए हुए हो। तू मेरे रूबरू  के लिए भी गुलजार साहब ने विशाल भारद्वाज को बोला था कि यह गाना दलेर मेहंदी से गवाओ। मैंने पहले भी कहा कि मुझे दिग्गज कलाकारों ने हमेशा बहुत प्यार किया। जगजीत सिंह साहब, भूपिंदर जी, बप्पी लाहिड़ी साहब सभी ने हमेशा दिल खोलकर मेरी तारीफ की। नुसरत साहब ने एक बार मुझसे कहा था कि मेरी बेटी आपकी बहुत बड़ी फैन है। मैं आपसे मिलना चाहता हूं।                (जारी...)

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  • Web Title:meri kahani hindustan column on 24 february