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कभी सोचा नहीं था फिल्म के बारे में

MC Mary Kom (Photo: BFI)

ओलंपिक्स के सेमीफाइनल में मेरा मुकाबला स्थानीय बॉक्सर निकोला एडम्स से था। हम दोनों लगभग बराबर अनुभव वाले बॉक्सर थे। वह दिन मेरे लिए अच्छा नहीं था। मैं हार गई। गोल्ड मेडल जीतने का सपना टूटने पर बहुत दुख हुआ। लेकिन इस बात की खुशी भी थी कि मैंने ब्रांज मेडल जीता था। मैं बॉक्सिंग एरिना से बाहर आई, तो मीडिया मेरा इंतजार कर रहा था। सबसे पहले मैंने माफी मांगी। हर कोई चौंक गया। मीडिया वालों ने मुझसे पूछा कि मैं माफी क्यों मांग रही हूं? मैंने कहा कि मैं अपने देश को गोल्ड मेडल नहीं दिला पाई, इसके लिए माफी मांग रही हूं। अब भी ऐसा लगता है कि 2012 ओलंपिक्स में मेरी वेट कैटेगरी होती, तो मैं गोल्ड मेडल जीतती। लेकिन वहां मेरी वेट कैटेगरी नहीं थी। उस रोज मैंने कितने लोगों को इंटरव्यू दिया, मुझे गिनती तक याद नहीं। बॉक्सिंग एरिना के पास ही एक छोटा एयरपोर्ट भी था। हर पांच-दस मिनट पर वहां से कोई न कोई जहाज उड़कर आ-जा रहा था। मुझे लग रहा था कि काश, ऐसा होता कि मैं उसी जहाज से उड़कर जल्दी से अपने घर पहुंच जाती और अपने बच्चों से मिल लेती। जिस दिन ओलंपिक्स में मैंने पहला बाउट जीता था, उस दिन मेरे बेटे का जन्मदिन था। मैं सबको बहुत ‘मिस’ कर रही थी। लेकिन क्या करूं, मेरी जिंदगी ही है- सेक्रिफाइस, सेक्रिफाइस, सेक्रिफाइस। लेकिन इस सेक्रिफाइस ने मुझे बहुत कुछ दिया। लोगों का प्यार दिया। सम्मान दिया। लंदन ओलंपिक्स से वापस भारत लौटने पर मेरा बहुत स्वागत हुआ। उस मेडल ने मेरी जिंदगी बदल दी। अगले साल सरकार ने मुझे पद्म भूषण भी दिया।

इसी दौरान मैरीकॉम  फिल्म रिलीज हुई। मेरी उपलब्धियों और कोशिशों की जो लोग पहले प्रशंसा नहीं करते थे, वे भी करने लगे। मुझे लगा कि चलो, कम से कम मेरी मेहनत का अच्छा रिजल्ट मिला। मैं अब भी देश के लोगों की सोच बदलना चाहती हूं। बहुत सी लड़कियों को शादी के बाद अपने प्रोफेशन को छोड़ना पड़ता है। मैं सोचती हूं कि वे क्यों छोड़े। जब तक उसमें पैशन है, तब तक काम करने देना चाहिए। मैं पूरे विश्वास से कहती हूं कि अगर शादी के बाद भी लड़कियों को अपने मां-बाप और पति की फैमिली से सपोर्ट मिले, तो वे अच्छा कर सकती हैं।

फिल्म की शूटिंग के दौरान मैंने और प्रियंका ने काफी मस्ती की। मैंने कभी जिंदगी में नहीं सोचा था कि प्रियंका चोपड़ा मेरा रोल करेंगी। हम लोग खूब गप्प मारते थे। अब तो उनका हॉलीवुड में भी काफी नाम हो गया है। मेरे पास शब्द नहीं है यह बताने के लिए कि उस फिल्म का अनुभव कितना शानदार था। मैं बहुत समय तक यकीन ही नहीं कर पाई कि मेरी जिंदगी पर फिल्म बन रही है। जब मैं पहली बार प्रियंका से मिली थी, तो मुझे भीतर से बहुत अच्छा लगा कि वह मेरा रोल करेंगी। उससे पहले भी मैंने उनकी फिल्म देखी थी। मेरा रोल करना उनके लिए आसान नहीं था। नॉर्थ इंडिया की एक लड़की नॉर्थ- ईस्ट की लड़की का रोल करने जा रही थी। आंख, नाक सब कुछ बिल्कुल अलग। उस वक्त इस बात को लेकर थोड़ी कंट्रोवर्सी भी हुई थी कि मेरा रोल अच्छे से कौन करेगा, लेकिन यह फैसला करना डायरेक्टर और प्रोड्यूसर का काम था।

मणिपुर की एक एक्ट्रेस ने मुझे भी अप्रोच किया कि वह मेरा रोल करना चाहती हैं। मैंने उन्हें बता दिया कि यह मेरे हाथ में नहीं है। अगर रोल लेना है, तो डायरेक्टर/ प्रोड्यूसर से बात करो। जो भी मेरा रोल करे, वह अच्छे से करे- मैं सिर्फ इतना चाहती थी। प्रियंका ने मेरा रोल बहुत अच्छे से किया। वह स्पोट्र्स वूमेन नहीं हैं, इसलिए मेरी फाइट के कुछ सीन उतनी अच्छी तरह नहीं हो पाए। बावजूद इसके उन्होंने जो कड़ी मेहनत की, वह शानदार थी। जब फिल्म की शूटिंग चल रही थी, तो मैं जा नहीं पाई। उस वक्त मेरी डेलीवरी होने वाली थी। मैं ऐसी स्थिति में नहीं थी कि शूटिंग देखने जाती। मुझे इस बात का बड़ा अफसोस हुआ। मैं ‘विश’ करती थी कि प्रियंका मेरा अच्छा रोल करेंगी। हम दोनों अब भी ‘टच’ में हैं। अभी प्रियंका ने अपनी शादी के बाद मुझे रिसेप्शन में भी बुलाया था। उस वक्त मैं अपने इवेंट्स में बहुत ‘बिजी’ थी, इसलिए मैं जा नहीं पाई। हम लोग बाद में भी मिलेंगे, तब भी पहले जैसी ही दोस्ती रहेगी। जब मैं पहली बार फिल्म देखने गई, तो कई जगहों पर मैं अपने आंसू नहीं रोक पाई, खासतौर पर जब मेरे बच्चे के ‘हार्ट-प्रॉब्लम’ का इमोशनल सीन आया। हालांकि फिल्म में फैक्ट्स के लिहाज से जरूर कुछ बातें अलग थीं, लेकिन यह स्वाभाविक है। मैं वह बात समझती हूं। मेरे बच्चे की सेहत की असली कहानी कुछ और है।  (जारी...)

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  • Web Title:Hindustan My Story Column March 24