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13 अप्रैल, 2021|10:20|IST

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अपनी टाई नहीं बदलने का हठ

कई लोग होते हैं, ख्वाब जिन्हें खुशी देकर सुला देते हैं, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, ख्वाब जिन्हें सोने नहीं देते। युवा राल्फ लॉरेन ने भी अमीर होने और आलीशान जिंदगी जीने का ख्वाब संजो रखा था। डिजाइनर कपड़ों की दुकानों में काम करते जिंदगी तेजी से भाग रही थी। कभी क्लर्क, कभी सेल्समैन, लेकिन बड़े सपने छोटी नौकरियों से कहां साकार होते हैं? एक दिन फैसला कर लिया कि अपने ही डिजाइनर कपड़ों से शुरुआत करनी पड़ेगी। लॉरेन ने सबसे पहले एक टाई डिजाइन किया। परंपरागत कपड़े से अलग, सामान्य से कुछ ज्यादा चौड़ी टाई बनकर तैयार हुई। कुछ छोटे स्थानीय स्टोर टाई बेचने लगे, लेकिन संतोष नहीं था। बड़ी हसरत थी कि मैनहट्टन के सबसे नामी स्टोर ब्लूमिंगडेल में भी अपनी टाई बिकनी चाहिए। आखिरकार एक दिन उनकी टाई की चर्चा ब्लूमिंगडेल तक पहुंच ही गई। वहां से 28 वर्षीय युवा डिजाइनर के लिए बुलावा आ गया। शहर के सबसे नामी स्टोर के एक मैनेजर ने टाई को परखा और फिर कहा, ‘आपका काम पसंद आ रहा है, लेकिन आपको इसमें दो बदलाव करने पड़ेंगे।’ 
लॉरेन ने मन में सोचा कि जो काम पसंद आ रहा है, उसमें दो बदलाव क्या हो सकते हैं? मैनेजर ने कहा, ‘अव्वल तो आप टाई की चौड़ाई कुछ कम कीजिए।’ यह कहते हुए मैनेजर टाई की चौड़ाई उंगलियों से नापने लगा। 
लॉरेन ने पूछा, ‘और दूसरा बदलाव?’
मैनेजर ने टाई को पलटा और पीछे लिखे ब्रांड के नाम को उंगलियों से मिटाने की कोशिश करते हुए कहा, ‘यहां आपको हमारे ब्रांड का नाम देना होगा।’
लॉरेन सोच में पड़ गए। एक तो मेरी टाई की एक बड़ी खासियत खत्म हो जाएगी और मेरा नाम भी हट जाएगा। हां, बेशक यह शहर का सबसे बड़ा स्टोर है, यहां टाई की बिक्री से खूब मुनाफा भी होगा, मेरा एक सपना साकार होगा, लेकिन मेरे ब्रांड का क्या होगा? यदि ब्रांड के नाम से सामान नहीं बिकना है, तो फिर खुद को क्या, कितना और कब तक फायदा होगा? अपना कारोबार कैसे बढ़ेगा? मैं तो ब्लूमिंगडेल को अपना उत्पाद बेचने के लिए मरा जा रहा था, लेकिन यहां तो बिकने का ऐसा प्रस्ताव है कि ख्वाब पर पानी फिर जाएगा। सिर उठाकर इधर-उधर मुआयना करने के बाद लॉरेन ने कहा, ‘मुझे सामान बेचना तो है, मैं आया भी इसीलिए था, लेकिन आपके बदलाव मंजूर नहीं कर पा रहा हूं। बात जम नहीं रही, तो फिर रहने दीजिए। दूसरी जगह जितनी भी बिक जाए, बेच लूंगा। आभार!’ 
लॉरेन भारी मन लिए स्टोर से बाहर निकल आए। दिमाग भले दृढ़ हो, लेकिन मन बेचैन था और चलते हुए पैर कांप रहे थे। प्रस्ताव ठुकराकर कहीं कोई बड़ी गलती तो नहीं हो गई! क्या मैं अपना नसीब किसी और को सौंप दूं? अपने नसीब पर तो मेरा खुद का अख्तियार होना चाहिए। नहीं, मैं अपना नसीब खुद लिखूंगा। जिंदा हूं अपने ख्वाब के लिए और ख्वाब को ही जिऊंगा। अपना ख्वाब कतई नहीं छोड़ूंगा। मेरा डिजाइन मुझे पसंद है, मैं किसी दूसरे के डिजाइन को मान लूं, तो फिर मेरा क्या रहा? नहीं, कुछ भी हो जाए, अपना डिजाइन नहीं छोड़ूंगा। मुझे मौका मिला है, मैं अपने डिजाइन को बाजार में उतार चुका हूं, अपने डिजाइन पर मुझे भरोसा करना ही होगा। मैं अपने आपको कैसे बदल दूं? मेरे काम में मेरा वजूद है। अपना काम बदल दूं, तो अपने वजूद का क्या होगा? किसी दूसरे के साथ काम करना होता, तो करता रहता, बाजार में अपना ब्रांड उतारकर मैंने जोखिम लिया है, अब मैं अपना ब्रांड छोड़ नहीं भाग सकता। मुझे सबसे पहले खुद पर भरोसा करना होगा, अपने काम में जो भी बदलाव करना है, मैं खुद करूंगा, यह मौका दूसरे को कतई नहीं दूंगा। मेहनत करूंगा, तो मौके बहुत आएंगे, लेकिन जो मौके मेरा या मेरे ब्रांड की इज्जत नहीं करेंगे, उन्हें तो जाने देने में ही भलाई है। अपने उत्पाद में बदलाव को कतई नहीं रोकना है, पर बदलाव जो भी करना है, अपने दिलो-दिमाग से करना है।
सब कुछ भूलकर लॉरेन ने अपने उत्पाद की गुणवत्ता और बिक्री पर फोकस किया। उत्पाद की चर्चा बढ़ने लगी। छह महीने बाद ब्लूमिंगडेल से फिर बुलावा आया, ‘आ जाइए, डील फाइनल कर लेते हैं, आपकी मांगें मंजूर हैं।’एक बार जब ब्लूमिंगडेल स्टोर में जगह मिल गई, तो लॉरेन का कारोबार चमक उठा। तरह-तरह के कपड़ों-उत्पादों का सिलसिला चला। राल्फ लॉरेन को जल्दी ही जिंदगी में वह सब हासिल हो गया, जिसका ख्वाब वह बचपन से देखते आ रहे थे। एक वक्त आया, जब वह दुनिया के सबसे अमीर डिजाइनर हो गए। पूरी दुनिया में उनका कारोबार फैल गया। लॉरेन आज भी कहते हैं, ‘मुझे खुद पर यकीन था। तब अगर मैं उस टाई को बदल देता, तो मैं आज यहां नहीं होता।’  
प्रस्तुति : ज्ञानेश उपाध्याय

 

 

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  • Web Title:hindustan meri kahani column 30 august 2020