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21 अप्रैल, 2021|11:17|IST

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बीस साल बाद मां से मुलाकात

जरूर कोई खास बात है, जो फोन पर मुमकिन नहीं। तभी तो पिता ने सीधे मिलने बुलाया है। एक पब में मिलना है। कैरी ग्रांट खुशी से फूले नहीं समा रहे। अपनी शानदार फैंसी कार में ढेर सारे उपहार लिए चल पडे़। कैरी हॉलीवुड के जाने-पहचाने अभिनेता हैं, सुदर्शन व्यक्तित्व के मालिक, लेकिन मन में अंदर कहीं बड़ा शून्य है, उसे कौन देखता है? परदे पर जो खुशनुमा नायक दिखता है, उसकी जिंदगी में भी एक पिता हैं, जो साथ नहीं रहते या साथ रहना नहीं चाहते। खैर, पब में पिता ने बेटे को पहचान लिया, लेकिन बेटे को दो-तीन पल लग गए। पिता बहुत जर्जर हो चले थे। पहले ही पब पहुंचकर अपने प्रिय व्यसन अर्थात पीने में लगे थे। पिता देखकर खुश हुए, लेकिन बेटे की ज्यादा सफलता उन्हें हमेशा बेचैन कर देती थी, शायद बेटे के प्रति ईमानदारी का अभाव था, जिसका उस दिन खुलासा होना था। तय कर लिया था कि बेटे को वह सच बता देना है, जिसे अब तक छिपाए रखा है। 
नशे, कमजोरी, बीमारी से लाल हुई अपनी निगाहों को पिता ने उठाया और बेटे से कहा, ‘तुम्हें मां के बारे में एक बात बतानी है... वह मरी नहीं है’। कैरी को सुने पर यकीन न हुआ। सब कुछ ठहर सा गया। शायद पिता नशे में भावुक हो रहे हैं, कल्पना कर रहे हैं। कैरी ने पूछा, ‘आप क्या बोल रहे हैं, क्या मतलब है आपका?’ पिता ने फिर दोहरा दिया, ‘वह मरी नहीं है’।
यह ऐसी सूचना थी, जो पिघलकर मानो दिलो-दिमाग में उतरती महसूस हुई। यह लम्हा उम्मीद से परे था। बचपन में पहले बताया गया कि मां समुद्र किनारे टहलने गई हैं, आ जाएंगी। फिर बताया गया कि लंबी छुट्टियों पर गई हैं, कुछ दिनों में लौट आएंगी। और कुछ महीने बाद धीरे से सुना दिया गया कि वह दुनिया में नहीं हैं। तभी से दस-ग्यारह साल के कैरी के दिल में यह बात घर कर गई कि मां ने मुझे छोड़ दिया, मुझे ठुकरा दिया। यह दुख लिए ही जिंदगी के बीस  साल बीत गए, जिंदगी गरीबी से उठकर कामयाबी की बुलंदियों पर लहराने लगी, लेकिन दिल में तो यही बात गूंजती रही कि जा अभागे, तेरी मां तुझे छोड़ गई।  
अब बीस साल बाद पिता बता रहे हैं, ‘वह मरी नहीं हैं’। पिता ने मानो अपना सारा बोझ उतारकर कैरी के सिर पर लाद दिया। बेशक, मां के बारे में सिर्फ पिता ही जानते थे, क्योंकि वही एक मनोरोग चिकित्सा गृह में मां को हमेशा के लिए छोड़ आए थे। मां अपने बड़े बेटे के वियोग में अवसाद और क्षणिक मानसिक विचलन से ग्रस्त थीं, पर पिता ने साथ रखने और सही देखभाल की जहमत नहीं उठाई, क्योंकि उन्हें दूसरी शादी की जल्दी थी। बिन मां बचपन ऐसे बीता कि कैरी की सोच बेतरतीब हो गई। जिंदगी में किसी महिला पर कभी पूरा यकीन न हुआ। यकीन के अभाव में रिश्ते बनते तो थे, लेकिन कुछ ही दिनों में छोड़ जाते थे अकेला, जैसे मां छोड़ गई थीं। 
अब बीस साल बाद पिता बता रहे हैं, मां ने नहीं छोड़ा, तो कैरी भागे-भागे गए उस मनोरोग चिकित्सा गृह में, जहां मां रहती थीं। कहते हैं, कुछ लोग होते हैं, जिनसे वक्त ताउम्र इम्तिहान लेता रहता है। सामने एक बूढ़ी, पूरे सफेद बाल वाली अपने गम समेटे बैठी थीं... मां... मां। लेकिन कोई असर न हुआ। बेटे ने भी बताया और दूसरे लोगों ने भी कि बेटा आया है, पर मां ने यह कहकर मुंह फेर लिया, ‘मुझे कुछ याद नहीं, अरसा हो गया’। बदकिस्मती इसी को कहते हैं, मां मिलीं, लेकिन फिर ठुकरा दिया। कैरी के दिल में कहीं फिर कुछ दरक गया। पिता तो कुछ ही दिनों बाद गुजर गए, लेकिन मां को यकीन दिलाने और उस सेवा गृह से आजाद कराने में वक्त लग गया।
स्वाभाविक अभिनय के लिए प्रसिद्ध कैरी ग्रांट (1904-1986) अक्सर बताते थे कि वह एक बार मां से मिलने दौड़कर पहुंचे, गोद में समा जाने का मन था। कमरा खाली था, लेकिन मां ने कैरी को रोक दिया, अपनी कोहनी आगे कर दी। उम्र ने उनका आकार छोटा कर दिया था, लेकिन वह मजबूत थीं, भड़क उठीं, तुम कौन हो? तुम क्या चाहते हो? तुम मेरे बेटे आर्ची जैसे नहीं हो, तुम कोई मेरे बेटे नहीं हो, तुम्हारी आवाज भी मेरे आर्ची जैसी नहीं है। 
कैरी के लिए तब यह समझाना बहुत मुश्किल था कि अभाव के दिन अब नहीं रहे, अब वह एक फिल्म स्टार हैं। मां शायद नाराज थीं कि किसी ने उन्हें खोजा नहीं। कैरी को भी यह पछतावा हमेशा सालता रहा कि मां को पहले ही खोज लेना था। वक्त बहुत निकल चुका था, एक सफलतम सिने अभिनेता की मां सामान्य जिंदगी में तो लौटीं, और बीस साल जीवित भी रहीं, लेकिन उनकी गोद में न ममता की छांव लौटी और न कैरी का बचपन।  
प्रस्तुति : ज्ञानेश उपाध्याय

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  • Web Title:hindustan meri kahani column 20 december 2020