DA Image
15 जुलाई, 2020|4:51|IST

अगली स्टोरी

जब मिक्की माउस की राह तैयार हुई

एक बहुत प्यारी चाची थीं। हंसने को हमेशा तैयार। जरा भी गुंजाइश बनती और उनकी हंसी उमड़ पड़ती। हंसी भी ऐसी कि आसपास अनायास खुशी की रौनक फैल जाती थी। आंटी का नाम था मार्गरेट, लेकिन घर भर के बच्चे उन्हें मैगी आंटी कहते थे। आंटी कहीं और रहती थीं, कुछ-कुछ दिनों पर अंकल के साथ आती थीं। उनके आने का इंतजार सबको रहता था। सब चाहते थे कि मैगी आंटी आएं और हंसी के हसीन पल नसीब हों। वह आठ साल का बच्चा भी आंटी को बहुत पसंद करता था। आंटी जब आतीं, कुछ न कुछ उपहार भी लातीं, तो बच्चों की खुशी कई गुना बढ़ जाती। एक बार आंटी आईं, तो अपने साथ चित्रकारी वाले कागज और पेंसिल लाईं। उस आठ साल के बच्चे को उपहार में कागज, पेंसिल देते हुए आंटी ने कहा, ‘सुना है, दीवारों पर तुम टार से चित्र बना देते हो? देखो, न दीवार चित्रकारी के लिए है और न टार चित्र उकेरने के लिए। ये लो कागज, पेंसिल। जितना मन चाहे, बनाओ और मुझे भी दिखाओ’। 
उस बच्चे का मन एक अलग ही प्रकार की गहरी खुशी से भर गया। लगा कि जिंदगी का सबसे बेहतरीन तोहफा मिल गया है। बच्चा समझ गया, घर की दीवार व टार की चर्चा आंटी तक पहुंच गई और अब कागज पर मनचाहा चित्र बनाना है। कागज कितना सुंदर है, सुगंधित है और पेंसिल भी बेजोड़। वह बच्चा उसी क्षण अपनी खुशी उकेरने लगा। वह अक्सर अपनी आंटी को ही चित्र में उतारता या आंटी यूं ही उतर आतीं और फिर चित्र के साथ आंटी के दरबार में हाजिर हो जाता। एक डर यह भी कि आंटी डांटेंगी, लेकिन आंटी तो चित्र देखकर खुशी से उछल पड़ीं, वाह-वाह करने लगीं। बच्चा भाव विभोर हो गया कि उसका चित्र किसी को ऐसी खुशी भी दे सकता है। अमेरिकी समाज के संघर्ष और उद्यमशीलता के बीच पल रहा वह बच्चा इतना समझदार तो हो ही गया था कि प्यार व प्रोत्साहन समझ सके। अव्वल तो इस उम्र में किसी बच्चे को कागज बर्बाद करने के लिए कौन देता है और अगर कागज दे भी दे, तो उस पर बने बालसुलभ चित्रों पर शाबाशी कौन देता है? लेकिन मैगी आंटी की बात ही जुदा थी। वह न सिर्फ शाबाशी देतीं, चित्रों को संजोकर साथ ले जातीं। फिर  जब आतीं, तो कुछ ज्यादा ही कागज और रंग-बिरंगी शानदार पेंसिल लेकर आतीं। आंटी ने चित्रकार भतीजे को ऐसे बढ़ाया कि चित्र का चस्का बढ़कर जुनून में तब्दील हो गया। एक दिन पड़ोस के डॉक्टर अंकल शेरवुड ने चित्र बनाते देख लिया और कहा, ‘चित्र बनाते हो? मेरे घोड़े रूपर्ट का चित्र बनाकर दिखाओ’। बच्चे ने रूपर्ट का बढ़िया चित्र बनाकर दिखा दिया। अंकल ने खुश होकर कहा, ‘अब यह चित्र मुझे बेच दो’। बच्चा बहुत उत्साहित हुआ कि उसके चित्र बिक सकते हैं। वह कुछ बेचने लायक बना सकता है। वह और गंभीरता से चित्र उकेरने लगा। बढ़ते समय के साथ उपहार, चित्र और बच्चा, तीनों बडे़ होते गए।
और एक दिन वह भी आया, जब उस बच्चे अर्थात अब नौजवान वॉल्ट डिज्नी को एक विज्ञापन निर्माता कंपनी में प्रतिमाह 50 डॉलर की नौकरी मिल गई। चित्र बनाने व डिजाइन करने का मनमाफिक काम था। नौकरी मिलते ही डिज्नी भागते हुए अपनी मैगी चाची के पास पहुंचे। खुशखबरी पर चाची का हक सबसे ज्यादा था। चाची को बताना और शुभकामनाएं लेना जरूरी था कि देखो चाची, मुझे चित्रकारी की दुनिया में मिल गई पहली नौकरी। लेकिन कुदरत ने निराश कर दिया। चाची से मुलाकात हुई, पर बुजुर्ग व बीमार चाची ऐसी स्थिति में नहीं थीं कि कोई बात सुन-समझ सकें। चाची को निहारते हुए डिज्नी याद करते रहे कि कैसे वह उपहार लेकर आई थीं और कैसे चित्र देखकर चहक उठती थीं। काश! चाची को पता चलता, तो वह खुशी से फूली न समातीं। बिस्तर पर बेबस पड़ीं चाची का शायद इशारा था, ‘मुझे क्या बताने आए हो, मैंने अपना काम तो कर दिया, तुम अपना करो। जाओ दुनिया को बताओ, दिखाओ कि तुमने क्या सीखा है?’ 
अब यह मानव जाति के समृद्ध कला इतिहास में दर्ज है कि वॉल्ट डिज्नी और उनकी कंपनी दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की करने लगी। मैगी चाची के उपहार के दम पर ही डिज्नी (1901-1966) ने दुनिया को बेमिसाल उपहारों से नवाज दिया। सबसे पहले ओसवाल्ड द लकी रैबिट  जैसा कार्टून चरित्र मशहूर हुआ और फिर मिक्की माउस, मिनी माउस, पिनोकीयो, डंबो, बैंबी, सिंड्रेला, मैरी पॉपिंस  जैसे अमर किरदारों की लाइन लग गई। उनके चरित्र चित्र से फिल्मों तक छा गए। डिज्नी 59 बार ऑस्कर अवॉर्ड के लिए नामांकित हुए और 22 बार विजयी रहे। कार्टून और एनिमेशन उद्योग की बुनियाद रखने वाले वॉल्ट डिज्नी अपनी एक ऐसी दुनिया बसा गए हैं, जहां हंसी और खुशी थमने का नाम नहीं लेती। 
प्रस्तुति : ज्ञानेश उपाध्याय

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:hindustan meri kahani column 12 july 2020