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मैं पॉलिटिक्स कर ही नहीं सकता

धनराज पिल्लै, प्रसिद्ध हॉकी खिलाड़ी

एशियन गेम्स 2002 का किस्सा बड़ा मजेदार है। पाकिस्तान के खिलाफ मैच था। शुरुआती मिनट में ही मैंने गोल किया। दीपक ठाकुर के क्रॉस पर मैंने कनेक्ट किया था। जब हम लोग जीते, तो मैंने दर्शकों में जाकर बड़ा सा तिरंगा लिया। उसी साल कोलोन में हुई चैंपियंस ट्रॉफी में ‘थर्ड’ व ‘फोर्थ’ पोजीशन का मैच था, जिसमें हम उनसे हार गए थे। वे मेरे सामने पाकिस्तान का झंडा लहरा-लहराकर बोले- पिल्लै भाई हम जीत गए, पिल्लै भाई हम जीत गए। मैं सिर नीचा किए बैठ गया था और बोला, हां-हां बिल्कुल, आप लोग जीत गए। फिर जब एशियन गेम्स में हमने पाकिस्तान को हराया, तो मैं दर्शकों से एक झंडा लेकर उनकी बेंच के पास गया और तिरंगा लहराकर बताया कि देखो, हिन्दुस्तान की टीम फाइनल में पहुंच गई। उस टीम के भी खिलाड़ी मेरी बहुत इज्जत करते थे। उन्होंने कहा- बधाई हो पिल्लै भाई। पाकिस्तान के खिलाफ जब भी मैं खेला हूं, मैं ‘इमोशनली’ खेला हूं, कोई गेम स्ट्रैटजी-प्लान  बनाकर नहीं खेला। आपके पास जितनी क्षमता है, जितनी काबिलियत है, जितना खेल है, वह पूरा का पूरा 70 मिनट में दिखाना है। बाद में आपको अफसोस नहीं होना चाहिए कि मैं पाकिस्तान के खिलाफ खेल सकता था और नहीं खेला।

सिडनी ओलंपिक्स के लिए जब मैं जा रहा था, तो मैंने मां से कहा था कि इस बार मैं गोल्ड या सिल्वर मेडल लेकर आऊंगा। हम लोग बहुत करीब पहुंचे, लेकिन हम मेडल नहीं जीत पाए। उसके बाद मैं खुद से पूछता था कि धनराज पिल्लै, इतने ओलंपिक खेल लिए, पर क्या हासिल किया? सिर्फ एक मिनट और 47 सेकंड में हम अपने देश का नाम ऊंचा नहीं कर पाए। यह दुर्भाग्य है कि 2004 में मेरे साथ बहुत राजनीति हुई। मुझे कप्तानी नहीं दी गई। तीन महीने में गोरा कोच आ गया। 2003 के आखिर में मैं टीम को एशिया कप जिताकर लाया था। उसके बाद सुल्तान अजलान शाह कप। लेकिन राजनीति ने मुझे टीम से बाहर बिठाना चालू कर दिया। 16 साल का जो मेरा संघर्ष, मेरी मेहनत थी, पानी में मिल गई। मैं इस देश का इकलौता खिलाड़ी हूं, जिसने चार ओलंपिक, चार वल्र्ड कप, चार चैंपियंस ट्रॉफी, चार एशियन गेम्स खेले हैं। 400-450 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं। मुझे हमेशा लगता है कि धनराज पिल्लै ने इतना कुछ हासिल किया, मगर ओलंपिक में कुछ नहीं कर पाए। एथेंस में तो मैच खत्म होने के बाद मैं गोल पोस्ट के पास जाकर बैठ गया था। साथी खिलाड़ी मुझे लेने के लिए आए। मैं रोते-रोते मैदान से बाहर आया। वह सीन आज भी याद आता है, तो आंखें भर जाती हैं। 

बीच में ऐसी चर्चा भी आई कि मैंने आम आदमी पार्टी ज्वॉइन कर ली है। ‘आप’ में एक महिला नेता थीं, हम तब प्रीमियर हॉकी लीग खेल रहे थे। मैं सहारा इंडिया में था। ‘आप’ उस बार बहुत अच्छा काम कर रही थी। वहां पर पार्टी के दो नेता रुके हुए थे। उन्होंने मुझसे कहा कि क्या आप पॉलिटिक्स ज्वॉइन करना चाहेंगे? मैंने कहा कि पॉलिटिक्स मेरा खेल नहीं है। मैं बहुत चिड़चिड़ा इंसान हूंं और अपने अधिकारों के लिए लड़ता हूं, इसलिए यह काम नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि फिर भी आप सोच लीजिए। अगली सुबह उन लोगों ने मुझे अपने कमरे में बुलाया और अरविंद केजरीवाल जी को फोन लगाया। उनसे मैंने सिर्फ इतना कहा कि बहुत अच्छा काम कर रहे हैं आप लोग, नई पीढ़ी आपके ऊपर बहुत भरोसा करती है। जब भी आपको हम जैसे खिलाड़ियों की जरूरत होगी अच्छे काम में, हम जरूर वहां आकर खड़े होंगे। उन्होंने कहा- धनराज जी, आप जब भी दिल्ली आएं, थोड़ा वक्त निकालकर जरूर मिलें। बस इतनी ही बात हुई। उधर उन्होंने मुंबई में बैनर लगा दिया- ‘धनराज पिल्लै इज ज्वॉइनिंग आम आदमी पार्टी’। फोटो में मेरे हाथ से हॉकी स्टिक हटा दिया और झाड़ू लगा दिया। जब मुझे पता चला, तो मैंने उस महिला नेता को फोन करके बोला कि आप लोग जो यह कर रही हैं, वह बहुत गलत है। तुरंत ऐसे पोस्टर आपको हटा देना चाहिए। तब तक वह पूरे मीडिया में ‘सर्कुलेट’ हो गया था। आप गूगल सर्च करेंगे, तो मेरा फोटो आपको झाड़ू के साथ दिखाई देगा। मैंने कभी नहीं बोला था कि मैं आम आदमी पार्टी ज्वॉइन करूंगा। मुझे तो एशियन गेम्स जीतकर आने के बाद बाला साहेब ठाकरे ने ऑफर किया था कि पॉलिटिक्स में आ जाओ। उन्होंने 1999 में ही ऑफर किया था। मैंने कहा कि नहीं सर, अभी मुझे बहुत खेलना है। उन्होंने कहा- बस मुझे इतना ही सुनना था। आप खेलो। जब भी आपको मेरी जरूरत पड़ेगी, मेरे पास आना। मैं पॉलिटिक्स कर ही नहीं सकता।

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  • Web Title:Dhanraj Pillai article in Hindustan on 18 march