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class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

उन्होंने मेरा नाम अंगना रख दिया

अलका याग्निक, प्रसिद्ध गायिका

बॉम्बे (मुंबई) में हमारे  लिए ‘स्ट्रगल’ यही था कि घंटों इंतजार करना पड़ता था। कोई कहता था कि अभी टाइम नहीं है, कोई कहता कि अगले महीने मिलेंगे। आर्थिक तौर पर कोई संघर्ष कभी नहीं था, क्योंकि मेरे पिता अपनी नौकरी में अच्छी तरह ‘सेटल’ थे। उस लिहाज से हमलोग हमेशा आराम से रहे। खाना, घर या गाड़ी जैसी समस्याएं कभी नहीं थीं। मम्मी-पापा का पूरा सपोर्ट था। बल्कि बाद में सांताक्रूज में पापा ने एक छोटा सा घर भी खरीद लिया था। हम लोग जब कलकत्ता (कोलकाता) से आते, तो उसमें रुकते थे। असली संघर्ष यही था कि अपनी आवाज और प्रतिभा को लोगों तक कैसे पहुंचाया जाए? यह इतना आसान नहीं था। लता दीदी और आशा दीदी राज कर रही थीं। नए गायकों को कोई छूना ही नहीं चाहता था। बहुत मुश्किल से किसी को एकाध गाना मिल भी गया, तो वह टिकता नहीं था, क्योंकि लताजी और आशाजी गाती भी जबर्दस्त थीं। किसी संगीतकार तक अपनी आवाज पहुंचाना और फिर ‘ब्रेक’ मिलना बहुत संघर्ष का काम था। बावजूद इसके पापा-मम्मी लगातार लगे रहे। 

मैं जब 14-15 साल की हो गई थी, तब मैंने पहली बार फिल्मों के लिए गाना गाया। वह तब हुआ, जब एक बार मैं अमितजी (अमिताभ बच्चन) के रिहर्सल पर कल्याणजी-आनंदजी के म्यूजिक रूम में गई थी। मैं इसीलिए गई थी, क्योंकि मैंने उन दोनों से कहा था कि मुझे अमितजी से मिलना है। मैं उनकी बहुत बड़ी फैन हूं। उन्होंने कहा कि ऐसा करो, उनका रिहर्सल शुरू हो रहा है, तो तुम स्टूडियो आ जाना, वहीं पर उनसे मिल भी लेना। पहली मुलाकात में मैं सिर्फ उनको देख रही थी। बिल्कुल चुप थी। इस तरह से पहली मुलाकात तो हो गई, लेकिन मैंने यह नहीं सोचा था कि उनके साथ जुड़ जाऊंगी। वही गाना मुझे गाने को मिलेगा, जो वह गा रहे हैं। वह बहुत ही रोमांचक लम्हा था। जानते हैं, वह गाना कौन था? वह लावारिस  का था, मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है? 

यह गाना अमितजी की आवाज में रिकॉर्ड होने वाला था। मैंने कहा था कि रिकॉर्डिंग कैसे होती है, यह जानने के लिए मैं रिकॉर्डिंग देखना चाहती हूं। तो जब अमितजी यह गाना रिकॉर्ड कर रहे थे, तब मैं अपने मम्मी-पापा के साथ स्टूडियो गई। मैंने इस गाने को अमितजी को गाते और रिकॉर्ड कराते देखा। इसके बाद कल्याणजी भाई ने बोला कि आज हम आपका वॉयस टेस्ट भी लेंगे। हमें यह देखना है कि आपकी आवाज माइक पर कैसी लगती है? अभी जब अमितजी गा लेंगे, तो आप थोड़ा सा गाकर सुनाना। ऑडिशन जैसा कुछ करेंगे। मैंने बोला- ठीक है। मैं बड़ी सीधी और मासूम थी, तो मैं कुछ समझी नहीं। मैंने सोचा कि अगर ये कहेंगे गाने के लिए, तो मैं गा दूंगी।

अमितजी का वर्जन रिकॉर्ड हुआ। तब तक मैं बैठी-बैठी उस गाने को सुन रही थी। कल्याणजी-आनंदजी ने रिकॉर्डिंग के बाद मुझसे बोला कि अब इसी गाने को बतौर ऑडिशन आप माइक पर गाइए। उन्होंने मुझे गाइड किया कि देखो, यह गाना ऐसा गाओ, जैसे किसी बहुत ‘मेच्योर’ हीरोइन पर फिल्माया जाना हो। आवाज को जितना ‘मेच्योर’ बना सकती हो, उतना ‘मेच्योर’ बनाकर गाओ। मैंने जितना हो सका, किया। दो टेक उन्होंने लिए। उन दिनों लाइव रिकॉर्डिंग होती थी, तो गाना एक ‘फ्लो’ में रिकॉर्ड होता था। मैंने गाना गा दिया। जब मैं बाहर आई, तो कल्याणजी-आनंदजी ने मुझसे कहा- देखा, तुमने आज प्लेबैक सिंगिंग कर ली। तुमने राखीजी के लिए गाना गा दिया। मुझे लगा कि वे मजाक कर रहे हैं, क्योंकि वे दोनों मेरी खिंचाई बहुत करते थे। मुझे छेड़ते रहते थे। उन दोनों का सेंस ऑफ ह्यूमर तो पूरी इंडस्ट्री में मशहूर है। मेरे पैरेंट्स को भी यही लगा कि कल्याणजी-आनंदजी मजाक कर रहे होंगे। अलका को थोड़ा छेड़ रहे हैं। 

फिर काफी समय बाद जब फिल्म रिलीज होने से पहले प्रिव्यू शो रखा जाता है, सिर्फ फिल्म की यूनिट के लिए, तो उसमें मुझे भी बुलाया गया। वह प्रकाश मेहरा की फिल्म थी। प्रिव्यू में सब लोग आए थे। कल्याणजी-आनंदजी। अमितजी। सब लोग उस शो में थे। वहीं पर मैंने फिल्म देखी- लावारिस।  फिल्म में जब राखीजी का सीन आया और जब वह गाना गाती हैं, तब मुझे समझ में आया कि वाकई मैंने प्लेबैक सिंगिंग की है। मैंने वाकई गाया है। मेरे पैरेंट्स भी बहुत खुश हुए। उसके बाद तो वह गाना बड़ा मशहूर हुआ। रेडियो पर अक्सर बजता था। कल्याणजी-आनंदजी उसके बाद मुझे प्यार से अलका याग्निक की जगह अंगना याग्निक बुलाते थे। (जारी...)

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  • Web Title:Alka Yagnik article in Hindustan on 04 november