Hindi Newsओपिनियन ब्लॉगhindustan nazariya column Passengers should avoid carelessness 8 november 2025
यात्रियों को लापरवाही से बचना चाहिए

यात्रियों को लापरवाही से बचना चाहिए

संक्षेप:

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में ट्रेन और मालगाड़ी के टकराने के चंद दिनों बाद ही उत्तर प्रदेश में मिर्जापुर के चुनार रेलवे स्टेशन पर एक बड़ा रेल हादसा हो गया। यहां पर गंगा स्नान के दिन कई महिलाएं कालका-हावड़ा एक्सप्रेस ट्रेन की चपेट में आकर अपनी जान गंवा बैठीं…

Nov 07, 2025 11:11 pm ISTHindustan लाइव हिन्दुस्तान
share Share
Follow Us on

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में ट्रेन और मालगाड़ी के टकराने के चंद दिनों बाद ही उत्तर प्रदेश में मिर्जापुर के चुनार रेलवे स्टेशन पर एक बड़ा रेल हादसा हो गया। यहां पर गंगा स्नान के दिन कई महिलाएं कालका-हावड़ा एक्सप्रेस ट्रेन की चपेट में आकर अपनी जान गंवा बैठीं। ये सभी महिलाएं कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर गंगा स्नान के लिए यात्रा कर रही थीं। बताया जा रहा है कि ये महिला यात्री गलत दिशा में उतरने के कारण ट्रेन की चपेट में आ गईं और एक साथ काल के गाल में समा गईं।

यहां अगर हादसे की प्रकृति पर गौर करेें, तो स्पष्ट होता है कि महिला यात्रियों ने ट्रेन से उतरते समय दिशा का ध्यान नहीं रखा और वे ट्रैक पर आ गईं। ट्रेन के आते ही वे उसकी चपेट में आ गईं, जिससे मौके पर ही उन सबकी मौत हो गई। इस घटना के बाद पुलिस और रेल प्रशासन के लोग मौके पर पहुंचे और राहत कार्य शुरू किया। पुलिस और रेल प्रशासन द्वारा इस हादसे की जांच की जा रही है। स्थानीय प्रशासन ने यात्रियों से रेलवे ट्रैक पर चलने से बचने की अपील की है।

हालांकि, इस तरह के हादसों की बारंबरता देश के लिए अच्छी बात नहीं है। लेकिन कोई भी इस पर सतर्कता बरतने की बात नहीं करता। न यात्री सतर्क होकर यात्रा करना चाहते हैं और न ही रेल या पुलिस प्रशासन इसके लिए गंभीर प्रयास करते हैं। नतीजा है कि ऐसे हादसे होते हैं और कुछ दिन हाय-तौबा में बीतने, जांच कमेटी बनने और नए- नए तरह के कुछ निर्देश जारी होने के बाद फिर वही ढाक के तीन पात। इस हादसे पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गहरा शोक व्यक्त किया है और मुआवजे का एलान कर दिया है। पर यह समस्या का कोई समाधान नहीं है। यह तो राज्य सरकार का दायित्व है।

इस तरह के रेल हादसों को रोकने के लिए हर स्तर पर प्रयास करने पड़ेंगे। साथ ही, यात्रियों का भी यह कर्तव्य है कि वे सतर्क और अनुशासित होकर यात्रा करें और यात्रा के दौरान अधैर्य न दिखाएं। अधिकांश हादसे हकबकाहट के कारण ही होते हैं, जिससे यात्री अक्सर स्टेशनों पर अफरा-तफरी का माहौल बना देते हैं और खुद ही उसकी चपेट में आ जाते हैं। जरूरी है कि रेल प्रशासन आवश्यक नियम तो बनाए ही, अपनी व्यवस्था चाक-चौबंद करके उन नियमों को लागू भी कराए। यात्री भी पूरी जानकारी लेकर, सोच-समझकर यात्रा करें। वे हरेक बात की जानकारी वैध तरीके से प्राप्त करके पूरी सजगता के साथ आगे बढ़ें, तभी इस तरह के हादसे को न्यूनतम स्तर पर लाया जा सकेगा। - ओम बाबू, टिप्पणीकार

ऐसे हादसों के लिए रेलवे ही जिम्मेदार

देश में कभी दो ट्रेनों के टकराने, कभी स्टेशन पर भगदड़ मचने, तो कभी किसी ट्रेन से कटकर लोगों के मारे जाने की खबरें आम हो गई हैं। हर दो-चार दिन पर कहीं न कहीं रेल हादसे होते रहते ही हैं। लेकिन समझने की बात है कि इन हादसों के लिए कौन जिम्मेदार है? गौर से देखें, तो रेलवे की लापरवाही ही इन हादसों के लिए जिम्मेदार है।

मिर्जापुर रेल हादसे के बाद का एक वीडियो सोशल मीडिया में खूब वायरल हो रहा है। इसमें हादसे के बाद अधिकारी हंसते हुए बातें कर रहे हैं। इसकी जांच होनी चाहिए और अगर यह वीडियो सच है, तो इस अधिकारी को जेल की सजा होनी चाहिए। इस तरह की मनोवृत्ति अधिकारियों में आम तौर पर पाई जाती है। तत्काल कार्रवाई और सजा होने पर ही ऐसे अधिकारियों की अकड़ खत्म होगी, लोगों की जान गई, पर ये अधिकारी हंस रहे हैं। ऐसे में, लगता है कि इनकी सोच में ही ऐसे हादसे बस गए हैं और इतने लोगों की जान गई, उनको कोई मतलब ही नहीं। इस हादसे के बारे में सुनकर लोगों की आंखों में आंसू आ गए। परिवार के लोगों को कितना बड़ा सदमा लगा होगा। मुझे बहुत दुख हुआ है इस मंजर को देखकर। दुनिया के अन्य देशों, विशेषकर यूरोप और अमेरिका में देखें, तो इस तरह के हादसे नहीं होते। होते भी होंगे, तो कभी दस-बीस साल में एक बार। लेकिन इसके बाद पूरा देश मुस्तैद होकर उसे सुधारता है और आगे ऐसी घटना न घटे, इसे सुनिश्चित करने के लिए हर जरूरी कदम उठाता है।

लेकिन, अपने देश में देखें, तो आलम ही कुछ और है। कहीं रेलवे के फाटक टूटे हुए मिलेंगे, तो कहीं पटरियों पर तरह-तरह की गड़बड़ियां दिखेंगी। ऐसा लगता है, जैसे इन कमियों को देखने वाला कोई नहीं है। जबकि इस तरह के कार्य के लिए रेलवे की ओर से बड़ी राशि खर्च की जाती है। ऐसे में, जरूरी है कि हादसों के लिए अधिकारियों की जिम्मेदारी गंभीरता से तय की जानी जाए और इसे पूरी सख्ती से लागू किया जाए। क्योंकि इस तरह की लापरवाही से देश में न केवल हादसे होते हैं, बल्कि देश का आर्थिक नुकसान भी होता है। रेल प्रशासन को संवेदनहीनता और अगंभीरता को बिल्कुल समाप्त करने पर जोर देना चाहिए। लेकिन लाख टके का सवाल यह है कि यह करेगा कौन? नियम-कायदे लागू कराने वाले भी तो अधिकारी ही हैं। निश्चित रूप से सभी अधिकारी एक जैसे नहीं होते। बड़ी संख्या में प्रशासनिक लोग गंभीर भी होंगे, मगर उन्हें मौका नहीं मिलता। संवेदनशील अधिकारियों को यदि आगे लाया जाए और जिम्मेदारी दी जाए, तो वे बेहतर प्रदर्शन करेंगे। ऐसे में, हादसों को बिल्कुल रोका जा सकेगा।

रिद्धी विनायक, छात्रा