अमरनाथ की चिंता
अमरनाथ यात्रा तो जारी रहेगी, पर इसकी आस्था के केंद्र बाबा बफार्नी के दर्शन नहीं हो पाएंगे। बर्फ से बनने वाला प्राकृतिक शिवलिंग आधिकारिक रूप से यात्रा शुरू होने के चार दिन बाद ही पिघल गया है। मई महीने में यह सात फीट से….

अमरनाथ यात्रा तो जारी रहेगी, पर इसकी आस्था के केंद्र बाबा बफार्नी के दर्शन नहीं हो पाएंगे। बर्फ से बनने वाला प्राकृतिक शिवलिंग आधिकारिक रूप से यात्रा शुरू होने के चार दिन बाद ही पिघल गया है। मई महीने में यह सात फीट से ज्यादा ऊंचा था, पर यात्रा शुरू से होने से पहले ही 29 जून को इसकी ऊंचाई घटकर पांच फीट रह गई थी। विगत 7 जुलाई को यह 90 प्रतिशत से ज्यादा पिघल गया। लगातार तीसरे साल समय से बहुत पहले ही बाबा ने भक्तों को दर्शन से वंचित कर दिया है। अमरनाथ यात्रा और उस पावन गुफा का भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व है। यह गुफा हिमालय में 3,888 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, जहां केवल पैदल, खच्चर या पालकी से पहुंचा जा सकता है। यह प्राकृतिक संयोग ही है कि हर वसंत ऋतु में गुफा की छत से टपकता जल जमते-जमते शिवलिंग की आकृति धारण करता है और यह भगवान शिव के प्रति श्रद्धा का एक अनुपम केंद्र बन जाता है। अफसोस, हिम-शिवलिंग दर्शन के दिन साल-दर-साल घटते चले जा रहे हैं।
बीते वर्ष की बात करें, तो करीब 25 लाख लोग यात्रा पर गए थे, मगर उनमें से पांच प्रतिशत आस्थावान ही हिम-शिवलिंग के दर्शन कर पाए थे। इस वर्ष तो दर्शन करने वालों की संख्या और भी कम रही है। यात्रा जारी रहेगी, क्योंकि अमरनाथ गुफा का अपना महत्व है, किंतु वहां से ज्यादातर भक्त कुछ निराशा लिए लौटेंगे। आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? पहली नजर में तो यह पर्यावरण में हो रहे परिवर्तनों का दुष्परिणाम है। स्थानीय स्तर पर अमरनाथ गुफा या उस पूरे क्षेत्र के प्राकृतिक संरक्षण के लिए शायद कुछ भी नहीं किया गया है। भक्त जिस हिम-शिवलिंग की पूजा करते हैं, उसे प्रकृति ही निर्मित करती है। अगर प्रकृति का संरक्षण नहीं होगा, तो ऐसे विरल शिवलिंग के दर्शन भी नहीं होंगे। क्या उस क्षेत्र में प्रकृति के संरक्षण के पर्याप्त प्रबंध किए गए हैं? क्या पहले की गई अच्छी सिफारिशों को लागू किया गया है? विशेषज्ञ बताते हैं कि अमरनाथ श्राइन बोर्ड यहां पर्यावरण कानूनों की पालना पर्याप्त मुस्तैदी से नहीं करता है। पिछली सदी के अंतिम वर्षों तक अमरनाथ गुफा के निकट एक किलोमीटर के रास्ते में हर जगह हिम-दर्शन होते थे और हिम-शिवलिंग की ऊंचाई हफ्तों तक आठ-दस फीट तक बनी रहती थी। अब यात्रा के समय उस पूरे क्षेत्र में हिम-दर्शन दुर्लभ होता जा रहा है। प्रकृति पथराती जा रही है।
अब क्या यात्रा के समय को बदलना होगा? क्या यात्रा की शुरुआत जुलाई से नहीं, जून से ही करनी पड़ेगी, ताकि लोग यहां दर्शन लाभ ले सकें? हालांकि, आने वाले समय में यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रकृति के चमत्कार के दर्शन के लिए वही लोग जाएं, जो प्रकृति के संरक्षण का महत्व समझते हैं, जो कचरा या गंदगी नहीं फैलाते, जो यहां तपस्या भाव से पहुंचते हैं। तीर्थयात्रियों की संख्या सीमित करना, प्लास्टिक पर प्रतिबंध और प्राकृतिक मार्गों को उनके मूल रूप में बहाल करना जरूरी हो गया है। भक्तों की भीड़ अपने साथ तापमान भी लाती है, अत: पूरी यात्रा को पुन: नियोजित करने की जरूरत है। तीर्थयात्रियों की संख्या को नियंत्रित करने या घटाने की जरूरत है। नेचर रिव्यूज़ अर्थ ऐंड एनवायर्नमेंट में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, सन् 1950 के बाद से हिमालय में ऊंचाई वाले क्षेत्रों का तापमान वैश्विक औसत से 50 प्रतिशत अधिक तेजी से बढ़ा है। यदि हम हरसंभव उपायों से हिमालय को सहेजेंगे, तभी शिवलिंग के एक पावन स्वरूप के दर्शन कर पाएंगे। हिमालय सेवा हमारी संस्कृति में शिव सेवा से कम नहीं है।
लेखक के बारे में
Hindustanहिन्दुस्तान भारत का प्रतिष्ठित समाचार पत्र है। करीब एक सदी से यह अखबार हिंदी भाषी पाठकों की पसंद बना हुआ है।
देश-दुनिया की Hindi News को पढ़ने के लिए यह अखबार लगातार पाठकों की पसंद
बना हुआ है। इसके अतिरिक्त समकालीन मुद्दों पर त्वरित टिप्पणी, विद्वानों के विचार और साहित्यिक सामग्री को भी लोग पसंद
करते रहे हैं। यहां आप ग्लोबल से लोकल तक के सभी समाचार एक ही स्थान पर पा सकते हैं। हिन्दुस्तान अखबार आपको उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, झारखंड, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों की खबरें प्रदान करता है। दक्षिण भारत के
राज्यों की खबरें भी आप यहां पाते हैं।
इसके अतिरिक्त मनोरंजन, बिजनेस, राशिफल, करियर, ऑटो, गैजेट्स और प्रशासन से जुड़ी खबरें भी यहां आप पढ़ सकते हैं। इस
पेज पर आप उन खबरों को पढ़ रहे हैं, जिनकी रिपोर्टिंग अखबार के रिपोर्टरों ने की है।
लेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


