
फिर भागे आरोपी
गोवा क्लब आगजनी हादसा जितना चिंताजनक है, उससे ज्यादा गंभीर बात है, प्रमुख आरोपियों का चुपचाप देश से निकल भागना। हादसे के साथ ही, उसके आरोपियों के भागने की चर्चा भी लोगों के बीच खूब हो रही है और होनी भी चाहिए…
गोवा क्लब आगजनी हादसा जितना चिंताजनक है, उससे ज्यादा गंभीर बात है, प्रमुख आरोपियों का चुपचाप देश से निकल भागना। हादसे के साथ ही, उसके आरोपियों के भागने की चर्चा भी लोगों के बीच खूब हो रही है और होनी भी चाहिए। यह कोई पहली बार नहीं है कि आरोपी इस तरह से देश से निकल भागे हैं। संगीतकार नदीम से लेकर विजय माल्या, ललित मोदी और नीरव मोदी तक एक लंबी सूची है ऐसे आरोपियों की, जिन्हें हम वापस देश लाकर कानून के कठघरे में खड़ा नहीं कर पाए हैं। इस सूची में अब दो नए नाम शामिल हो गए हैं- सौरभ और गौरव लूथरा। अब यह आम धारणा बन रही है कि इस हादसे में जिन 25 लोगों की मौत हुई है, उन्हें न्याय मिलने में काफी वक्त लग जाएगा। क्या इन आरोपियों को वापस लाना आसान है? सुरक्षा एजेंसियां अपने ढंग से प्रयास करेंगी, लेकिन बड़ा सवाल यही है कि इन्हें भागने क्यों दिया गया? हादसा रात में हुआ और सुबह होने से पहले ही दोनों आरोपी दिल्ली से विमान में बैठ भाग निकले। निस्संदेह, यह गोवा पुलिस की नाकामी है। उसने तेजी दिखाई होती, तो ये दोनों भाग नहीं पाते।
यह अफसोस की बात है कि देश में पुलिस या सुरक्षा एजेंसियों के काम करने का ढर्रा नहीं बदल रहा है। हादसे के बाद क्लब के मालिकों ने यह अनुमान लगा लिया या उनके कानूनी सलाहकारों ने उन्हें समय रहते बता दिया, भागने का पूरा समय मिल गया, लेकिन गोवा पुलिस यह कल्पना भी नहीं कर पाई कि नाइट क्लब आगजनी के आरोपी यूं देश से फरार हो जाएंगे। इस डिजिटल दौर में परिवहन इतना सुगम हो गया है कि इसका पूरा लाभ अपराधी उठा रहे हैं, जबकि हमारी पुलिस अभी भी अपने पुराने ढर्रे को छोड़ने को तैयार नहीं है। गोवा के अधिकारी अब सक्रिय हुए हैं और वागाटोर बीच स्थित आगजनी स्थल को ध्वस्त करने का काम शुरू हो गया है। सवाल उठता है कि अब इस अधजले क्लब को ध्वस्त करने से क्या न्याय हो जाएगा? क्या उन 25 लोगों को इंसाफ मिल जाएगा, जो निरपराध ही काल के गाल में समा गए? अगर यह क्लब अवैध था, अगर इसे अवैध ढंग से चलाया जा रहा था, अगर इसमें सुरक्षा मानकों की अवहेलना हो रही थी, तब गोवा का प्रशासन क्या कर रहा था? हादसे से पहले गहरी नींद में रहने और हादसे के बाद जागने की इस शर्मनाक परंपरा से हम कब निजात पाएंगे? गोवा की अपनी प्रतिष्ठा है, लोग वहां खुशी मनाने जाते हैं, पर अगर वहां का प्रशासन लोगों की सुरक्षा नहीं कर सकता, तो क्या उसकी निंदा नहीं होनी चाहिए? अब भरपायी कैसे होगी? गोवा प्रशासन को तत्काल युद्ध स्तर पर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वहां के बाकी तमाम क्लब-रेस्तरां सुरक्षा मानकों के अनुरूप ही सेवाएं दें।
दूसरी ओर, अब यह राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए प्राथमिकता होनी चाहिए कि आरोपियों को थाईलैंड से वापस कैसे लाया जाएगा? चूंकि हमारी एजेंसियां इस मामले में ढीली पड़ जाती हैं, इसलिए ऐसे लोग मौका मिलते ही देश से भाग निकलते हैं? अगर एजेंसियां विदेश में भी भगोड़ों पर शिकंजा कस सकें, तो इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता। यह सशक्त होते भारत का समय है, तो यह विश्व स्तर पर दिखना भी चाहिए। जहां भारत से कोई अपराधी भागने न पाए, वहीं भारत में कोई आरोपी कहीं विदेश में छिपने भी न पाए, यह सुनिश्चित करना होगा। जिन देशों में ये अपराधी भागकर शरण लेते हैं, उन देशों के साथ प्रत्यर्पण संधि करने की जरूरत है। यह भारत की छवि से भी जुड़ी बात है और इसका स्थायी समाधान भारतीय कूटनीति को भी करना चाहिए।

लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




