पेपर लीक का सच
नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने ज्यादा समय लिए बगैर आरोप पत्र दाखिल कर दिया है। सीबीआई ने साफ कर दिया कि यह लीक अचानक नहीं हुई, इसके लिए आरोपियों ने बहुत सोच-समझकर…

नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने ज्यादा समय लिए बगैर आरोप पत्र दाखिल कर दिया है। सीबीआई ने साफ कर दिया कि यह लीक अचानक नहीं हुई, इसके लिए आरोपियों ने बहुत सोच-समझकर साजिश रची थी। गहरी साजिश के तहत परीक्षा लेने वाली एजेंसी एनटीए में सेंधमारी की गई थी और तीन विशेषज्ञों को साजिश में शामिल कर लिया गया था। अब तो नाम ही सामने आ गए हैं कि रसायन विज्ञान के लिए पीवी कुलकर्णी, भौतिक विज्ञान के लिए मनीषा संजय हवलदार और वनस्पति विज्ञान व प्राणी विज्ञान के लिए मनीषा गुरुनाथ मंधारे को साजिशकर्ताओं ने अपने साथ मिला लिया था। दिल्ली की एक अदालत में दाखिल किए गए करीब 20,000 पन्नों के आरोपपत्र में आरोपियों का पूरा कच्चा-चिट्ठा खोल दिया गया है। अब विशेष रूप से गठित फास्ट ट्रैक अदालत से यह उम्मीद की जाएगी कि वह आरोपपत्र पर पूरी गति से काम करे। यथोचित सुनवाई हो और दोषियों को ऐसे दंडित किया जाए कि मिसाल बन जाए।
पेपर लीक के मामले पूरे देश में सामने आए हैं और जिनसे देश की शिक्षा पर दाग लगे हैं। इतना बड़ा आंदोलन हुआ है और देश के शिक्षा मंत्री को भी इस्तीफा देना पड़ा है। नीट-यूजी परीक्षा से खिलवाड़ करने वालों ने केवल छात्रों को ही नहीं, बल्कि देश को भी धोखा दिया है। कोई संदेह नहीं कि परीक्षा से जुड़े लोगों पर कड़ी निगरानी की जरूरत है, उनके प्रति किसी भी स्तर पर नरमी बरतना ठीक नहीं है। इस पेपर लीक मामले में जांच से पता चला है कि आरोपी विशेषज्ञों को अनुवाद/पुनः अनुवाद प्रक्रिया के दौरान रफ वर्क के लिए गोपनीय अनुभाग के अंदर ही सादे कागज उपलब्ध कराए गए थे। प्रमुख आरोपी पीवी कुलकर्णी ने इन कागजों का इस्तेमाल छोटी-छोटी पर्चियों पर रसायन विज्ञान के 135 प्रश्नों और उनके उत्तरों को संक्षेप में लिखने के लिए किया। इतना ही नहीं, गोपनीय अनुभाग से यह आरोपी अपने लिखे हुए कागज के साथ आसानी से बाहर भी आ गया। इससे पता चलता है, एनटीए से जुड़े विशेषज्ञों पर कड़ाई की पूरी व्यवस्था नहीं थी। अगर संभव हो, तो अब परीक्षा होने तक ऐसे विशेषज्ञों को गोपनीय अनुभाग से बाहर नहीं आने देना चाहिए। उनके रहने, काम करने की पूरी व्यवस्था अलग से सुनिश्चित होनी चाहिए। किसी भी स्थिति में नीट-यूजी परीक्षा में 20 लाख से ज्यादा छात्र बैठते हैं, इतनी बड़ी परीक्षा की एक कीमत एनटीए और उसके विशेषज्ञों को देश के लिए जरूर चुकानी चाहिए। अब एनटीए में वही लोग नियुक्त होने चाहिए, जो गोपनीयता से किसी भी तरह का समझौता न करें। गौरतलब है कि आरोपपत्र में बताया गया है, एनटीए के गोपनीय अनुभाग में प्रवेश और निकास के दौरान विशेषज्ञों की कोई तलाशी नहीं ली गई।
सीबीआई ने यह भी बताया है कि वह पिछले साल नवंबर में आठ छात्रों द्वारा बनाए गए फीफा वर्ल्ड कप 2026 नाम के एक वाट्सएप ग्रुप की मदद से आरोपियों तक पहुंची है। पेपर लीक में पुणे की ब्यूटीशियन की भूमिका हो या एक दंत चिकित्सा क्लिनिक की, धोखाधड़ी की कोई भी कड़ी बचनी नहीं चाहिए। एक-एक आरोपी को पकड़ने और उनके साथ यथोचित तरीके से निपटने की जरूरत है। जिस तेजी से सीबीआई ने इस जांच को अंजाम दिया है, उसी तेजी से आगे भी कार्रवाई करने की जरूरत है। देश में जो भी पेपर लीक के मामले हाल के महीनों में सामने आए हैं, उनकी भी सीबीआई को जांच करनी चाहिए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो जाए।
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