परीक्षा में फिर सेंध
परीक्षाओं को लेकर आ रही शिकायतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब शिकायत के स्वर ओडिशा में तेज हैं और झारखंड में भी। ऐसा लग रहा है, मानो कोई राज्य ऐसी शिकायतों से अछूता नहीं रहेगा। प्रश्नपत्र पहले भी लीक…

परीक्षाओं को लेकर आ रही शिकायतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब शिकायत के स्वर ओडिशा में तेज हैं और झारखंड में भी। ऐसा लग रहा है, मानो कोई राज्य ऐसी शिकायतों से अछूता नहीं रहेगा। प्रश्नपत्र पहले भी लीक होते थे, परीक्षाओं में भी गड़बड़ी की शिकायतें आती थीं, पर देश में यह नया बदलाव है, जब छात्र अपनी बात रखने या आंदोलन छेड़ने में पीछे नहीं रह रहे। यह भी दिलचस्प है कि ऐसे आंदोलन-प्रदर्शन में हरेक राज्य में विपक्षी दलों को सड़क पर आने का मौका मिल रहा है। बहरहाल, पहले बात ओडिशा की। ओडिशा मेडिकल स्नातकोत्तर परीक्षा के प्रश्नपत्र की तस्वीरें कथित तौर पर परीक्षा के दौरान वाट्एसप पर प्रसारित होने के बाद आंतरिक जांच शुरू की गई है। अधिकारियों का कहना है कि यह पेपर लीक नहीं है, बल्कि परीक्षा शुरू होने के बाद प्रश्नपत्र ऑनलाइन शेयर किया गया है। ऐसा लगता है, प्रश्नपत्र बांटे जाने के तुरंत बाद परीक्षा हॉल से प्रश्नपत्र बाहर आ गया। यह जांच का विषय होना चाहिए कि ऐसा क्यों हुआ? क्या किसी प्रश्नपत्र की गोपनीयता परीक्षा खत्म होने तक सुनिश्चित नहीं रहनी चाहिए? क्या परीक्षा शुरू होते ही प्रश्नपत्र का बाहर आ जाना अपराध नहीं है? इन प्रश्नों के उत्तर स्पष्ट होने चाहिए।
यह ध्यान देने की बात है कि प्रश्नपत्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी परीक्षा नियंत्रक व शिक्षाकर्मियों पर सबसे ज्यादा है। यदि परीक्षा से जुड़े लोग यह ठान लें कि प्रश्नपत्र चोरी को रोकना है, तो परीक्षाओं की मर्यादा बचेगी। कोई संदेह नहीं कि प्रश्नपत्र चोरी से शिक्षकों का ही सर्वाधिक अपमान होता है, यह नाकामी शिक्षकों के ही माथे आती है, अत: शिक्षकों में सजगता बढ़नी चाहिए। कड़े कानून अपनी जगह हैं, उनके इस्तेमाल की नौबत आने से पहले ही शिक्षकों को सतर्क हो जाना चाहिए। कड़े कानून लागू होने देने में शिक्षकों और शिक्षाकर्मियों की बड़ी भूमिका रहेगी। क्या वेतन-भत्ते के लिए सजग रहने वाले शिक्षक संगठन इस मोर्चे पर सक्रिय हैं? क्या शिक्षा बिरादरी यह मानकर चल रही है कि परीक्षा में गड़बड़ी करना कोई अपराध नहीं है या अगर अपराध है, तो सजा नहीं होने वाली है? वास्तव में, ‘मैं कुछ भी गलत करूंगा और मेरा कुछ नहीं बिगड़ेगा’ जैसी आपराधिक मनमानी का अंत होना चाहिए। बहुत गंभीर बात है कि प्रश्नपत्र लीक के मुद्दे पर देश के शिक्षा मंत्री का इस्तीफा हुआ है। इस इस्तीफे के मायने शिक्षकों और शिक्षाकर्मियों की समझ में आने चाहिए। अफसोस, अगर गंभीरता समझ में आती और जिम्मेदार लोगों को अपने कर्तव्य का एहसास होता, तो नीट पेपर लीक के बाद देश में एक भी पेपर लीक न हुआ होता।
अब झारखंड की समस्या देखिए। प्रदेश के युवा और छात्र संगठन जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) परीक्षा परिणामों में कथित गड़बड़ी की सीबीआई जांच की मांग हो रही है। छात्रों ने मार्च निकाला है। छात्रों की मांगों पर गौर कीजिए- 14वीं जेपीएससी रद्द करो, जेपीएससी में सीबीआई जांच की सिफारिश करो और जेपीएससी, जेएसएससी के कामकाज में सुधार करो। त्रासदी देखिए, यहां तक आरोप लग रहे हैं कि जेपीएससी की सीटें 25 लाख से एक करोड़ रुपये तक में बिकती हैं। हजारों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। खैर, अनेक आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है। जो दोषी हैं, उन्हें खोज-खोजकर सलाखों के पीछे पहुंचाना चाहिए। निस्संदेह, यह समय सियासत से ज्यादा परीक्षा सुधार का है।
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