DA Image
13 अगस्त, 2020|2:50|IST

अगली स्टोरी

नए राष्ट्रपति

राम नाथ कोविंद भारतीय गणराज्य के 14वें राष्ट्रपति चुन लिए गए हैं। जल्द ही वर्तमान राष्ट्रपति प्रणब cसे विदा हो जाएंगे और राम नाथ कोविंद उसके नए निवासी होंगे। उनके राष्ट्रपति पद की शपथ लेते ही गणराज्य की सभी कार्यपालक शक्तियां उनमें निहित हो जाएंगी। देश में कार्यपालिका संबंधी सभी काम उन्हीं के नाम से किए जाएंगे। शुरू से ही इस बात में कोई संदेह नहीं था कि राम नाथ कोविंद इस पद के लिए आसानी से चुन लिए जाएंगे। लगभग उसी दिन से, जब एनडीए ने पहली बार उनका नाम प्रस्तावित किया था। बावजूद इसके विपक्षी दलों ने देश के इस सर्वोच्च पद के लिए मीरा कुमार का नाम पेश किया था। राजनीतिक प्रतिष्ठा को देखते हुए मीरा कुमार का नाम भी बहुत बड़ा था, लेकिन जिस तरह से कई अन्य दलों ने एनडीए उम्मीदवार को अपना समर्थन दिया, उससे राम नाथ कोविंद की जीत सुनिश्चित हो गई थी। जीत का अंतर भी बताता है कि विपक्षी उम्मीदवार के लिए संभावनाएं कितनी कम थीं। मतगणना के पहले ही राउंड से वह आगे चल रहे थे और अंत तक उन्होंने अपनी यह बढ़त बनाए रखी। इस चुनाव में जहां मीरा कुमार को 3,67,314 वोट मिले, वहीं राम नाथ कोविंद ने 7,02,044 वोट हासिल कर अपनी जीत दर्ज कराई।

लेकिन राम नाथ कोविंद के लिए यह जीत जितनी आसान थी, आगे की चुनौतियां निश्चित तौर पर उतनी आसान नहीं होंगी। सबसे बड़ी चुनौती तो यही है कि उन्हें राजनीति के मंजे हुए विद्वान नेता प्रणब मुखर्जी की जगह लेनी है। पांच साल के पूरे कार्यकाल में ऐसा मौकाशायद नहीं ही आया, जब प्रणब मुखर्जी के किसी फैसले पर किसी को उंगली उठाने का मौका मिला हो, जबकि वह एक ऐसे दौर में राष्ट्रपति रहे, जब देश में एक बहुत बड़ा सत्ता परिवर्तन हुआ। इस पूरे दौर में उन्होंने न सिर्फ एक आदर्श राष्ट्रपति की छवि पेश की, बल्कि जहां जरूरत पड़ी, सरकार को चेताने का काम भी किया। लेकिन राम नाथ कोविंद का पूरा राजनीतिक करियर जिस तरह से निर्विवाद रहा है, उसे देखते हुए इसमें कोई संदेह नहीं कि वह इन चुनौतियों पर खरे उतरेंगे। जिस सौम्यता और विद्वता को हमने प्रणब मुखर्जी में देखा है, उसकी झलक राम नाथ कोविंद में भी दिखाई देती है। पहले राज्यसभा सदस्य के रूप में और फिर राज्यपाल के रूप में उन्होंने इसे बार-बार साबित किया। जब उन्हें बिहार का राज्यपाल बनाया गया था, तो कई तरह के विवाद खड़े किए गए थे। यह कहा गया था कि राज्यपाल की नियुक्ति मुख्यमंत्री के साथ विमर्श के बाद होनी चाहिए, अन्यथा बेवजह टकराव की आशंका बन जाती है। जल्द ही उन्होंने अपनी भूमिका और अपने व्यवहार से सारी आशंकाओं को गलत साबित कर दिया। इतना ही नहीं, जब राष्ट्रपति पद के लिए उनके नाम का प्रस्ताव आया, तो उन्हें सबसे पहले समर्थन देने वालों में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का नाम था।

राष्ट्रपति पद के लिए जब राम नाथ कोविंद का नाम आया, तो उन्हें दलित गौरव का प्रतीक कहा गया था। हालांकि राष्ट्रपति चुनाव के मामले में यह मुद्दा ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं था, क्योंकि चुनाव लड़ रहे दोनों ही नेता दलित वर्ग के प्रतिष्ठित प्रतिनिधि थे। और अब जब वह राष्ट्रपति चुन लिए गए हैं, तो राम नाथ कोविंद पूरे देश के मुखिया हैं, उन्हें सिर्फ दलित वर्ग के नेता के रूप में सीमित करके नहीं देखा जा सकता। लेकिन फिर भी उनके राष्ट्रपति बनने से एक फर्क तो पड़ेगा ही, देश का दलित वर्ग इसमें अपने सशक्तीकरण की झलक देखेगा। उसका इस देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर विश्वास पुख्ता होगा। ग्रामीण इलाके के एक साधारण दलित परिवार का व्यक्ति देश के सर्वोच्च पद पर पहुंच जाए, यह लोकतंत्र में ही संभव है।

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:NDA candidate Ram Nath kovind Elect fourteenth President of India