DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

पहली जीत

कुलभूषण जाधव मामले में भारत ने पहली लड़ाई जीत ली है। बेशक, अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में भारत ने जो अपील की है, उसका यह अंतरिम फैसला है। लेकिन इस फैसले ने पाकिस्तान के हाथ एक हद तक तो बांध ही दिए हैं। कम से कम अब जब तक अंतरराष्ट्रीय अदालत का इस मामले पर फैसला नहीं आ जाता, पाकिस्तान कुलभूषण जाधव को मृत्युदंड नहीं दे सकता। पाकिस्तान का कहना था कि वैसे भी जाधव को अगस्त से पहले मृत्युदंड नहीं दिया जाएगा, लेकिन अदालत का कहना था कि इससे यह स्पष्ट नहीं है कि अगर अगस्त के बाद भी मामले की सुनवाई पूरी नहीं होती, तो उस स्थिति में क्या होगा? साथ ही अदालत ने पाकिस्तान के उस तर्क को भी नकार दिया है कि जाधव को राजनयिक संपर्क का अधिकार नहीं दिया जा सकता। भारत इसके लिए वियना कन्वेंशन का तर्क दे रहा था, तो वहीं पाकिस्तान का कहना था कि जासूसी और आतंकवाद के मामले में यह अधिकार नहीं दिया जा सकता। एक तरह से देखें, तो अदालत में भारत के सारे शुरुआती तर्क स्वीकार कर लिए गए और पाकिस्तान के सारे तर्क नकार दिए गए। लेकिन इसके साथ ही यह भी सच है कि अदालत ने स्पष्ट किया है कि अभी वह मामले में क्या सही है और क्या गलत, इस पर कोई राय नहीं दे रही, बस एक अंतरिम फैसला भर दे रही है। मामले को अंतरराष्ट्रीय अदालत में ले जाने के पीछे भारत का मूल मकसद था पाकिस्तान पर विश्व समुदाय का दबाव बनाना। 

वैसे भी, कुलभूषण जाधव के मामले में अंतरराष्ट्रीय अदालत का फैसला बहुत छोटे दायरे में ही होना था। वहां भारत को यह दिखाना था कि इस मामले में पाकिस्तान न तो अंतरराष्ट्रीय परंपराओं का पालन कर रहा है, और न ही अपने एक बंदी को वह अधिकार ही दे रहा है, जो उसे मिलने चाहिए। जाधव के खिलाफ पाकिस्तान ने जो आरोप लगाए हैं, वे सही हैं या नहीं, इसका फैसला अंतरराष्ट्रीय अदालत में नहीं होना है। हेग में चल रही अदालती लड़ाई दरअसल विश्व बिरादरी को पाकिस्तान की असलियत दिखाने की लड़ाई थी, जिसकी पहली पायदान पर भारत ने कामयाबी हासिल कर ली है। आगे की लड़ाई बहुत कुछ इस पर निर्भर करेगी कि भारत किस हद तक इस मामले में अंतरराष्ट्रीय जनमत तैयार कर पाता है, और किस हद तक पाकिस्तान पर संस्थागत दबाव बना पाता है। 

मुमकिन है कि दबाव बढ़ने के बाद पाकिस्तान भारतीय राजनयिकों को कुलभूषण जाधव से मिलने की इजाजत दे दे। लेकिन यह संभावना अब भी नहीं है कि इस मामले की किसी निष्पक्ष अदालत में सुनवाई हो सकेगी। यहां तक कि इसकी संभावना भी नहीं है कि सुनवाई किसी नागरिक अदालत में होगी। इस मामले में अगर अपील होती भी है, तो सुनवाई सैनिक अदालत में ही होगी, जहां क्या फैसला होगा, यह लगभग पहले से ही तय है। यह जरूर हो सकता है कि अभी तुरंत जाधव को मृत्युदंड न दिया जाए और इसके लिए किसी उपयुक्त समय का इंतजार किया जाए। जैसा कि सरबजीत के मामले में पाकिस्तान ने किया था। जबकि उस मामले में तो पाकिस्तान के भीतर भी कुछ ऐसे लोग थे, जो सरबजीत को मृत्युदंड न दिए जाने की अपील कर रहे थे। जाधव के मामले में तो अभी ऐसे लोग भी सामने नहीं आए हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि जाधव मामले में हेग की अदालत का अंतरिम फैसला पाकिस्तान को भी सोचने पर मजबूर करेगा। अभी तो वह जिस राह पर चल रहा है, उससे उसकी अंतरराष्ट्रीय साख तो खराब होगी ही, दोनों देशों के संबंध भी इतने ज्यादा खराब हो जाएंगे कि उन्हें संभालना फिर किसी के लिए आसान नहीं होगा।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Kulbhushan Jadhav, India, International Court of Justice