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भारतीयों की चिंता

यह मर्माहत कर देने वाली खबर है कि कुवैती शहर मंगफ में एक आवासीय इमारत में आग लगने से कम से कम 40 भारतीयों की जान चली गई। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि आग उसी इमारत में लगी, जहां दर्जनों कर्मचारी रहा...

भारतीयों की चिंता
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Monika Minalहिन्दुस्तानThu, 13 Jun 2024 10:32 PM
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यह मर्माहत कर देने वाली खबर है कि कुवैती शहर मंगफ में एक आवासीय इमारत में आग लगने से कम से कम 40 भारतीयों की जान चली गई। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि आग उसी इमारत में लगी, जहां दर्जनों कर्मचारी रहा करते थे, उन्हें बचने का मौका तक नहीं मिला। निचली मंजिल पर लगी आग ऊपर फैलती चली गई। अधिकांश हताहत दक्षिण भारतीय राज्य केरल और तमिलनाडु से हैं। करीब 50 भारतीय घायल भी हुए हैं। घायलों में नेपाली कामगार भी शामिल हैं। इसमें तो कोई दोराय नहीं कि ये कर्मचारी या मजदूर बहुत अमानवीय माहौल में रह रहे थे। इमारत में करीब 196 कर्मचारी रह रहे थे। जाहिर है, इमारत में काफी भीड़भाड़ थी और इसी वजह से कर्मचारी आग से घिर गए। कुवैती उप-प्रधानमंत्री शेख फहद यूसुफ अल-सबा ने इमारत के मालिकों पर लालच का आरोप लगाया और कहा कि भवन मानकों के उल्लंघन के चलते यह त्रासदी हुई। वैसे, सिर्फ वजह बताने से काम नहीं चलेगा, हमें यह देखना होगा कि क्या कुवैती सरकार दोषियों के खिलाफ कड़े कदम उठाएगी? 
ध्यान रहे, तमाम अरब देशों में भारतीय बड़ी संख्या में रहते हैं। छोटे से मुल्क कुवैत की अगर बात करें, तो वहां आबादी का दो-तिहाई हिस्सा विदेशी श्रमिकों से बना है। वहां पर भारतीय श्रमिकों की संख्या अच्छी-खासी है। इतने बड़े हादसे के बाद प्रशासन जागता लग रहा है। प्रशासन सफाई दे रहा है कि ऐसे आवासों में भीड़भाड़ को लेकर अक्सर चेतावनियां जारी की जाती थीं, पर भवन मालिकों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। इस त्रासदी पर मानवाधिकार समूहों ने भी चिंता जताई है। अब चिंता से आगे बढ़कर काम करने की जरूरत है। तमाम अरब देशों में मजदूरों की स्थिति बहुत अमानवीय है। इन सभी देशों में मजदूरों की सुरक्षा चाक-चौबंद करने पर ध्यान देना होगा। भारत सरकार को अपनी ओर से भरपूर दबाव डालना होगा, ताकि अरब देशों में हमारे कामगारों के प्रति संजीदगी बढ़े। देश के लाखों मजदूरों को रोजगार के लिए विदेश जाना पड़ता है, तो विदेश गए मजदूरों के प्रति सरकार की जिम्मेदारी कम नहीं हो जाती है। सबकी नजरें भारत सरकार पर है कि वह आगामी दिनों में अपने लोगों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाती है? 
अरब देशों ही नहीं, यूक्रेन, रूस जैसे अनेक देशों में भारतीयों की सुरक्षा को ताक पर रखा जा रहा है। मिसाल के लिए, युवा काम की तलाश में रूस जाते हैं और उन्हें रूस में सैनिक बना दिया जाता है। रूसी सेना की ओर से लड़ते हुए भारतीय हमें बहुत चिंता में डाल रहे हैं। सरकार को आपत्ति जताने से आगे जाकर अपने लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। यहां यह जान लेना चाहिए कि विदेश में भारतीयों की मौत चिंता की एक बहुत बड़ी वजह बनती जा रही है। सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगे गए एक जवाब के मुताबिक, अकेले साल 2020 में विदेश में कुल 11,439 भारतीयों की मौत हुई। अगर छात्रों की बात करें, तो साल 2018 के बाद से विदेश में 403 भारतीय छात्रों की विभिन्न वजहों से मौत हुई है। इनमें से सर्वाधिक 91 छात्र कनाडा में मारे गए हैं। सोचने वाली बात है, भारतीय छात्रों की मौत के मामले में कनाडा, ब्रिटेन, रूस, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी जैसे देशों का दामन साफ नहीं है। अत: भारत सरकार को तगड़ी मोर्चाबंदी करनी पड़ेगी और विदेश जाने वालों को भी अपनी सुरक्षा के प्रति सजग होना पड़ेगा।
 

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