Hindustan Hindi editorial- Indian companies created 113423 jobs in US: CII study - अमेरिकी जमीन पर DA Image
20 फरवरी, 2020|10:14|IST

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अमेरिकी जमीन पर

यह एक अच्छी खबर है, जो हमें सोचने के लिए भी मजबूर करती है। उद्योग संगठन कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री ने अमेरिका में व्यवसाय कर रही भारतीय कंपनियों का जो सर्वेक्षण किया है, उसके नतीजे हमें इन कंपनियों पर गर्व करने का कारण तो देते ही हैं, साथ ही चौंकाते भी हैं। सबसे बड़ी बात इस सर्वे से यह सामने आई है कि अमेरिका में निवेश करने वाली भारतीय कंपनियां वहां की सबसे तेजी से तरक्की करने वाली कंपनियों में शुमार हैं। और ये कंपनियां भारतीय अर्थव्यवस्था के साथ ही अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूती ही नहीं दे रहीं, बल्कि बडे़ पैमाने पर लोगों को रोजगार भी दे रही हैं। सर्वे के अनुसार, इन कंपनियों की वजह से वहां एक लाख से भी ज्यादा लोगों को रोजगार मिला हुआ है। इनमें से 87 फीसदी भारतीय कंपनियां आने वाले पांच साल में और ज्यादा लोगों को रोजगार देने की तैयारी कर रही हैं। यह स्थिति उस अमेरिका में है, जहां रोजगार इन दिनों काफी संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है और यह धारणा बना दी गई है कि आउटसोर्सिंग के कारण भारत जैसे देश अमेरिकी लोगों के रोजगार छीन रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति के पिछले चुनाव में भी यह बड़ा मुद्दा था। भारतीय कंपनियों का अमेरिका में निवेश लगभग 18 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है और ये अमेरिका के 50 राज्यों में सक्रिय हैं। ऐसा भी नहीं है कि ये कंपनियां वहां सिर्फ कमाई ही कर रही हैं, इन कंपनियों ने पिछले एक साल में लगभग 15 करोड़ डॉलर की रकम कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सबिलिटी यानी सामाजिक कार्यों पर खर्च की है। साथ ही 59 करोड़ डॉलर की रकम शोध व विकास कामों में लगाई है।  

ये तथ्य और आंकडे़ सचमुच खुश करने वाले हैं, लेकिन हमें इस खुशी से आगे जाकर भी इन सारी चीजों को देखना होगा। ये सारे तथ्य उस समय सामने आए हैं, जब भारत बड़े पैमाने पर रोजगार की समस्या से जूझ रहा है। कारण कई हो सकते हैं, लेकिन सच यही है कि पिछले कुछ समय से देश में बेरोजगारी की दर बढ़ रही है और रोजगार सृजन घट रहा है। बावजूद इसके कि देश की विकास दर अच्छी बनी हुई है और इस समय हम दुनिया की सबसे तेज तरक्की कर रही अर्थव्यवस्था बन चुके हैं, लेकिन फिर भी हम बड़ी संख्या में नौजवानों को रोजगार नहीं दे पा रहे हैं। रोजगारहीन विकास की जो आशंकाएं काफी समय से व्यक्त की जा रही थीं, वे हमारे दरवाजे पर आकर बैठ गई हैं। कंपनियां तो वही हैं, मगर भारत में वे रोजगार के अवसर नहीं पैदा कर पा रहीं, जबकि अमेरिका में वे बड़े पैमाने पर रोजगार दे रही हैं। हालांकि, भारत की विकास दर अमेरिका से तो ज्यादा ही है। अमेरिका से आई अच्छी खबरों के बीच इसके कारणों की पड़ताल भी इस समय जरूरी है।

यह कुछ वैसी ही बात है, जैसा कि अक्सर कहा जाता है कि भारतीय वैज्ञानिक जब तक भारत में रहते हैं, छिट-पुट शोध में ही अपनी पूरी जिंदगी बिता देते हैं। लेकिन वही वैज्ञानिक जब पश्चिमी देशों में पहुंचते हैं, तो पूरी दुनिया उनके शोध का लोहा मान जाती है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण नोबल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक हरगोविंद खुराना हैं। पश्चिम के माहौल में उन्हें उड़ने के लिए पूरा आसमान मिलता है और वहां उनका रास्ता रोकने वाली कोई नौकरशाही या राजनीति नहीं होती। यही शायद कारोबार जगत में भी हो रहा है। हमें अपने देश में भी ऐसा माहौल तैयार करना होगा कि भारतीय और दुनिया भर की कंपनियां देश में उसी तरह भारी संख्या में रोजगार पैदा करें, जैसे वे पूरी दुनिया में करती हैं। कारोबारी सुगमता के विश्व सूचकांक में हमारी स्थिति जरूर कुछ बेहतर हुई है, लेकिन हालात बेहतर करने के मैदान और भी हैं।

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