Hindustan Hindi editorial: Indian Army strikes Naga insurgents along India-Myanmar border - एक और सैन्य पराक्रम DA Image
20 फरवरी, 2020|11:17|IST

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एक और सैन्य पराक्रम

सर्जिकल स्ट्राइक एक बार फिर चर्चा में आ गई है। खबरों में बताया गया है कि भारतीय सेना के जवानों ने म्यांमार की सीमा में घुसकर नगा आतंकवादियों को मार गिराया। सेना ने इसी तरह के काम को इसी सीमा पर साल 2015 में भी अंजाम दिया था। फर्क बस इतना है कि इस बार सरकार और सेना किसी की भी तरफ से सीमा पार करके आतंकवादियों को मार गिराने का दावा नहीं किया जा रहा। नगा विद्रोहियों के खापलांग गुट के आतंकवादियों को मार गिराने की बात जरूर कही जा रही है। हालांकि पिछली बार सर्जिकल स्ट्राइक के संकेत आधिकारिक तौर पर दिए गए थे। यह बात अलग है कि तब भी म्यांमार में इसका खंडन किया था कि भारतीय सेना ने उसकी सीमा का कोई उल्लंघन किया है। वैसे साल 2015 की उस सर्जिकल स्ट्राइक की उतनी चर्चा नहीं हुई थी, जितनी कि पाकिस्तान की सीमा में घुसकर की गई सर्जिकल स्ट्राइक की हुई थी। इसलिए उम्मीद यही है कि इस सर्जिकल स्ट्राइक की चर्चा भी जल्द ही थम जाएगी। वैसे यह भी कहा जा रहा है कि सर्जिकल स्ट्राइक भले ही म्यांमार की सीमा पर हुई है, लेकिन इसका मकसद पाकिस्तान को यह संदेश देना भी है कि सुरक्षा के मसले पर भारत कोई भी गड़बड़ी ज्यादा बर्दाश्त नहीं करेगा। इस मुठभेड़ का सच जो भी हो, पर फिलहाल तो इसमें नगालैंड का स्थानीय समीकरण ही ज्यादा दिख रहा है।

केंद्र सरकार पिछले काफी समय से लगातार नगा विद्रोहियों से बातचीत कर रही है। दो साल पहले उसने नगा विद्रोहियों के सबसे बड़े समूह मुइवा से युद्ध विराम भी किया था। तमाम उतार-चढ़ाव के बाद यह प्रक्रिया अभी भी जारी है। अभी 26 सितंबर को नगा विद्रोहियों के छह गुटों ने नई दिल्ली में सरकार की ओर से वार्ता के लिए नियुक्त वार्ताकार आर एन रवि से मुलाकात की थी। नगा विद्रोहियों के दूसरे सबसे बड़े गुट खापलांग ने शुरू से ही खुद को इस बातचीत से अलग रखा है और म्यांमार के सीमावर्ती क्षेत्र में वह अपनी गतिविधियां जारी रखे हुए है। यह भी माना जाता है कि उसका आधार क्षेत्र म्यांमार की सीमा के भीतर है। इसलिए एक दिन के भीतर ही खापलांग गुट के खिलाफ चलाए गए इस ऑपरेशन का संदेश बहुत साफ है कि जो लोग शांति वार्ता के लिए आगे नहीं आ रहे हैं, वे कहीं पर भी सुरक्षित नहीं रह सकेंगे, न सीमावर्ती इलाके में और न ही सरहद के पार। माना जाना चाहिए कि यह संदेश मूलत: खापलांग गुट के बागियों के लिए है, लेकिन इसकी आवाज दूर तक जाएगी। भले ही यह एक स्थानीय ऑपरेशन था, लेकिन यह सरकार के संकल्प को तो दर्शाता ही है।

इस बीच नगालैंड से जो खबरें आ रही हैं, वे यही बताती हैं कि प्रदेश की जनता अब पूरी तरह से इन बागी गुटों के खिलाफ हो चुकी है। ज्यादातर विद्रोही गुटों के बारे में यही कहा जाता है कि वे फिरौती और लोगों से अवैध वसूली का कारोबार चलाते हैं। लेकिन इस मामले में दिक्कत यह है कि इस स्थिति के कारण नगालैंड के आम लोग अभी भी केंद्र सरकार के शांति प्रयासों में उसके साथ नहीं आ सके हैं। जो संघर्ष-विराम हुए हैं, उनमें इन गुटों को अपने हथियार अपने पास रखने की इजाजत दी गई है। ये वही हथियार हैं, जिनसे वसूली का उनका कारोबार चलता है। इसी कारण से सरकार के लिए अब जरूरी हो गया है कि वह शांति प्रयासों को बहुत जल्द उस अंजाम तक ले जाए, जिसमें इन गुटों से हथियार-समर्पण करवाया जाए। इससे एक तो स्थानीय जनता को काफी राहत मिलेगी और दूसरे, जो लोग हथियारों का समर्पण नहीं करेंगे, उन्हें चिह्नित करना और उनके खिलाफ अभियान चलाना भी आसान हो जाएगा।

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  • Web Title:Hindustan Hindi editorial: Indian Army strikes Naga insurgents along India-Myanmar border